Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 4 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
बहुत शुरुआती मलाशय का कैंसर, जो आँत की दीवार की ऊपरी परतों तक ही है, कभी-कभी गुदा के रास्ते निकाला जा सकता है। पेट नहीं खोलना पड़ता। निकले हुए टुकड़े को माइक्रोस्कोप में जाँचा जाता है, और वही रिपोर्ट तय करती है कि यह काफ़ी था या नहीं।
अगर रिपोर्ट में जोखिम वाले लक्षण दिखें, तो पूरा ऑपरेशन सुझाया जाता है, क्योंकि मलाशय के पास की गाँठों में कैंसर हो सकता है। जो छोटा ऑपरेशन काफ़ी न निकले, वह शुरू से किए गए पूरे ऑपरेशन से बुरा चुनाव है।
दीवार में और गहरे उतर चुके ज़्यादातर शुरुआती कैंसरों में भी पूरा ऑपरेशन ही चाहिए, जिसे टोटल मीज़ोरेक्टल एक्सिज़न (TME) कहते हैं।
मलाशय के कैंसर के इलाज की पूरी योजना, जाँच से ऑपरेशन तक, मध्य मलाशय के कैंसर की सर्जरी पेज पर है। यह लेख शुरुआती अवस्था और छोटे ऑपरेशन के बारे में है।
शुरुआती का मतलब है कि कैंसर छोटा और उथला है, और गाँठों या दूसरे अंगों में फैलने का कोई संकेत नहीं। स्टेज स्कैन से पढ़ा जाता है और फिर निकाले गए टुकड़े से पक्का किया जाता है।
| जाँच में क्या मिला | इसका मतलब | आम पहला चुनाव |
|---|---|---|
| कार्सिनोमा इन सीटू, या हाई-ग्रेड बदलाव वाला पॉलिप | असामान्य कोशिकाएँ, अभी अंदर की परत में ही | कोलोनोस्कोप से निकालना, न हो सके तो लोकल एक्सिज़न |
| T1, कम जोखिम वाले लक्षणों के साथ | परत के नीचे की तह तक पहुँचा है, माइक्रोस्कोप में अनुकूल दिखता है | लोकल एक्सिज़न, और नज़दीकी फ़ॉलो-अप |
| T1, अधिक जोखिम वाले लक्षणों के साथ | गहराई वही, पर माइक्रोस्कोप में गाँठों तक फैलने की संभावना दिखती है | पूरा ऑपरेशन (TME) |
| T2, MRI में गाँठें साफ़ | मांसपेशी की दीवार में घुस चुका है | पूरा ऑपरेशन। लोकल एक्सिज़न के साथ कीमो-रेडिएशन सिर्फ़ चुने हुए मरीज़ों में |
| शुरुआती T3, MRI में गाँठें साफ़ | मांसपेशी के ठीक पार, पेल्विस की सीमा से दूर | पूरा ऑपरेशन, कभी-कभी कीमो-रेडिएशन के बाद, ट्यूमर कितना नीचे है इस पर निर्भर |
T और N अक्षरों का मतलब हमारे लेख मलाशय कैंसर का स्टेज कैसे तय होता है में विस्तार से है। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले MRI और मलाशय का अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। छोटे ऑपरेशन के बिगड़ने का मुख्य कारण स्टेज को कम आँकना है।
हाँ, कुछ मरीज़ों में। चपटा या डंडी वाला घाव, जो बस अभी घुसना शुरू हुआ हो, पूरा उठाकर निकाला जा सकता है। इसके लिए स्कोप से फंदा या चाकू डाला जाता है।
सौम्य पॉलिप को टुकड़ों में निकालना चलता है। कैंसर के लिए यह कमज़ोर चुनाव है, क्योंकि इससे रिपोर्ट धुंधली हो जाती है।
लोकल एक्सिज़न में ट्यूमर को आँत की दीवार की पूरी मोटाई के साथ गुदा के रास्ते निकाला जाता है। TEMS और TAMIS दो तरीक़े हैं, जिनसे सर्जन मलाशय के अंदर साफ़ देखकर काम कर पाता है।
ये तरीक़े कुछ ही केंद्रों पर मिलते हैं, और नतीजा ऑपरेशन करने वाले पर निर्भर करता है। पूछिए कि आपके सर्जन ने ऐसे कितने ऑपरेशन किए हैं, और क्या आँत की बीमारियों का विशेषज्ञ पैथोलॉजिस्ट टुकड़े की रिपोर्ट तैयार करेगा।
छोटा, उथला और अच्छी बनावट वाला ट्यूमर, जो औज़ारों की पहुँच में हो, MRI साफ़ हो और संदिग्ध गाँठें न हों, तो लोकल एक्सिज़न अच्छा रहता है।
| स्थिति | लोकल एक्सिज़न |
|---|---|
| छोटा T1 ट्यूमर, बायोप्सी में अनुकूल रूप, MRI में गाँठें साफ़ | उचित |
| बड़ा पॉलिप, हाई-ग्रेड बदलाव, स्कोप से नहीं निकल सकता | उचित |
| T1 में गहरी घुसपैठ, रक्त वाहिकाओं में कैंसर, बेढंगी कोशिकाएँ | अकेला काफ़ी नहीं। पूरा ऑपरेशन सुझाया जाता है |
| T2 ट्यूमर | मानक नहीं। अनुभवी केंद्र में, प्रोटोकॉल के तहत, कीमो-रेडिएशन के साथ ही सोचा जाता है |
| T3 या बड़ा, या संदिग्ध गाँठें | उचित नहीं। पूरा ऑपरेशन |
| ट्यूमर स्फिंक्टर की मांसपेशी तक पहुँचा हो | उचित नहीं। अलग ऑपरेशन चाहिए |
कमज़ोर मरीज़ कभी-कभी रिपोर्ट पूरी अच्छी न होने पर भी छोटा ऑपरेशन चुन लेते हैं। यह मिलकर लिया गया फ़ैसला होता है, जिसमें जोखिम पहले समझाया जाता है।
निकाला गया टुकड़ा ही असली स्टेजिंग जाँच है। उसकी रिपोर्ट बताती है कि छोटा ऑपरेशन काफ़ी था या उसके बाद पूरा ऑपरेशन करना चाहिए।
ये लक्षण बताते हैं कि कैंसर के गाँठों तक पहुँचने की संभावना ज़्यादा है।
इनमें से एक भी मिले तो जोखिम इतना है कि रुकना ठीक नहीं। तब पूरा ऑपरेशन सुझाया जाता है, और पहले ऑपरेशन के जल्दी बाद करना बेहतर है। महीनों तक फ़ैसला टालने से कुछ नहीं मिलता।
दूसरा ऑपरेशन आम टोटल मीज़ोरेक्टल एक्सिज़न ही होता है। इसे कैंसर के ऑपरेशन की तरह ही योजना से किया जाता है, पर पहले का निशान इसे कठिन बना सकता है।
इसीलिए अच्छी रिपोर्ट, अच्छा MRI और पहले की खुली बातचीत, तरीक़े के चुनाव से ज़्यादा मायने रखते हैं।
कभी-कभी। चुने हुए मरीज़ों में पहले कीमो-रेडिएशन दिया जाता है, फिर ट्यूमर के बचे निशान को काटकर निकाला जाता है। इस रास्ते का मक़सद मलाशय को बचाना है।
यह डिफ़ॉल्ट रास्ता नहीं है। एक मिलते-जुलते रास्ते के लिए, जिसमें कीमो-रेडिएशन के बाद ट्यूमर पर नज़र रखी जाती है, हमारा पेज मलाशय कैंसर में अंग बचाने का इलाज पढ़िए।
पूरे ऑपरेशन में आँत का हिस्सा आसपास की चर्बी की परत, यानी मीज़ोरेक्टम, के साथ निकाला जाता है और आँत वापस जोड़ दी जाती है। शुरुआती कैंसर में आम तौर पर स्फिंक्टर बचा रहता है।
नीचे जोड़ बनने के बाद कई लोगों में आँत की आदतें बदल जाती हैं, जिसे लो एंटीरियर रिसेक्शन सिंड्रोम (LARS) कहते हैं। हमारा लेख मलाशय कैंसर के बाद फ़ॉलो-अप और आँत की देखभाल देखिए। इसके बारे में ऑपरेशन से पहले पूछिए, बाद में नहीं।
आम तौर पर नहीं। स्टेज I में पूरे ऑपरेशन के बाद कोई अतिरिक्त इलाज नहीं, यही मानक है। कम जोखिम वाले ट्यूमर के साफ़ लोकल एक्सिज़न के बाद भी ज़रूरत नहीं।
लोकल एक्सिज़न में फ़ौरी क़ीमत कम है, पर जानकारी कम मिलती है और गाँठें अपनी जगह रह जाती हैं। पूरा ऑपरेशन गाँठें निकालकर पूरी तस्वीर देता है, पर शुरुआती क़ीमत ज़्यादा है।
| मुद्दा | लोकल एक्सिज़न | पूरा ऑपरेशन |
|---|---|---|
| पेट खुलता है | नहीं | दूरबीन से या खुला |
| अस्पताल में रुकना और रिकवरी | कम | ज़्यादा |
| स्टोमा | कम ही | अक्सर अस्थायी, कभी-कभी स्थायी |
| बाद में आँत का काम | आम तौर पर सामान्य के क़रीब | बदल सकता है, कभी बहुत |
| गाँठें निकालकर जाँची गईं | नहीं | हाँ |
| पेल्विस में कैंसर लौटने की संभावना | ज़्यादा, इसलिए स्कैन और स्कोप जाँच नज़दीक रखी जाती है | कम |
| किसके लिए | छोटे, उथले, कम जोखिम वाले ट्यूमर | बाक़ी सभी शुरुआती ट्यूमर |
कोई एक रास्ता सबके लिए सही नहीं है। ईमानदार चुनाव वही है जो कैंसर के जोखिम को आपकी आँत की क़ीमत के सामने तौले।
छोटे ऑपरेशन की गुणवत्ता मशीन से ज़्यादा टीम पर निर्भर करती है। कुछ माँगें आपको बचाती हैं।
कभी-कभी। छोटा, उथला, कम जोखिम वाला ट्यूमर लोकल एक्सिज़न से गुदा के रास्ते निकाला जा सकता है। फिर टुकड़ा माइक्रोस्कोप में जाँचा जाता है। रिपोर्ट में जोखिम वाले लक्षण दिखें तो पूरा ऑपरेशन सुझाया जाता है।
दोनों में मलाशय का ट्यूमर गुदा के रास्ते निकाला जाता है। TEMS में सख़्त नली और ख़ास औज़ार लगते हैं। TAMIS में मुलायम सिंगल पोर्ट और आम दूरबीन के औज़ार। मरीज़ और सर्जन ठीक से मेल खाएँ तो नतीजे एक जैसे रहते हैं।
परत के नीचे की तह में गहरी घुसपैठ, छोटी वाहिकाओं में कैंसर की कोशिकाएँ, बेढंगी कोशिकाएँ, ट्यूमर बडिंग, या प्रभावित अथवा पास का किनारा। इनमें से एक भी हो तो गाँठों तक फैलने की संभावना बढ़ती है, और पूरा ऑपरेशन सुझाया जाता है।
कम ही। लोकल एक्सिज़न के बाद स्टोमा आम बात नहीं है। अगर बाद में पूरा ऑपरेशन करना पड़े, तो पहले के निशान की वजह से इसकी संभावना बढ़ जाती है।
कम जोखिम वाले ट्यूमर में ठीक से चुना गया लोकल एक्सिज़न, नज़दीकी फ़ॉलो-अप के साथ, अच्छे नतीजे देता है। गहरे ट्यूमर में गाँठें पीछे रह जाती हैं, और पेल्विस में कैंसर लौटने की संभावना ज़्यादा होती है।
स्टेज I में आम तौर पर नहीं। अंतिम रिपोर्ट में गाँठों में कैंसर या जोखिम वाले लक्षण मिलें तो इस पर विचार होता है। सर्जन और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट साथ में तय करते हैं।
मलाशय कैंसर के पूरे इलाज की शुरुआत मध्य मलाशय के कैंसर पेज से होती है। आने से पहले सवाल हों तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, डॉ. जीवराज मेहता मार्ग, वासणा, अहमदाबाद 380007.
परामर्श, रिपोर्ट और स्कैन की समीक्षा, ऑपरेशन और फॉलो-अप। OPD सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे।
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क्या स्कोप या स्कैन में शुरुआती मलाशय का कैंसर निकला है? आपको छोटा ऑपरेशन भी सुझाया जा सकता है और बड़ा भी। अपनी कोलोनोस्कोपी, बायोप्सी और MRI की रिपोर्ट साथ लाइए। Dr Harsh Shah बताएँगे कि आपके ट्यूमर के लिए कौन-सा रास्ता ठीक बैठता है, और हर रास्ते की क़ीमत आपकी आँत के काम पर क्या पड़ती है। फ़ोन करें या WhatsApp पर संदेश भेजें। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर पूछें
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