Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 27 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89 from 216 reviews (Gota clinic) · 4.94 from 18 reviews (Apollo, Bhat)
संक्षेप में
मलाशय के कैंसर की पुष्टि scope से लिए गए biopsy के टुकड़े से होती है। फिर पेड़ू का MRI और छाती-पेट का CT scan बताते हैं कि गाँठ कितनी फैली है।
इनमें मलाशय का MRI पहले और ज़्यादा मायने रखता है। यह दिखाता है कि गाँठ दीवार में कितनी गहरी है, पेड़ू की दीवार से कितनी पास है, और गुदा की मांसपेशी तक पहुँची है या नहीं।
उँगली से जाँच, CEA नाम की ख़ून की जाँच और गाँठ की मरम्मत वाले जीन की जाँच से यह पूरा सेट बनता है। फिर एक टीम सब कुछ साथ बैठकर पढ़ती है।
जाँचें पूरी होने के बाद इलाज की योजना मध्य मलाशय के कैंसर की सर्जरी पेज पर है। यह लेख उन जाँचों के बारे में है जो उससे पहले होती हैं।
पूरे सेट में सात हिस्से होते हैं। हर जाँच अलग सवाल का जवाब देती है, और कोई एक दूसरी की जगह नहीं ले सकती।
| जाँच | क्या पता चलता है | क्यों ज़रूरी है |
|---|---|---|
| उँगली से जाँच | गाँठ गुदा के मुँह से कितनी दूर है, और हिलती है या नहीं | तय होता है कि गुदा की मांसपेशी बचाई जा सकती है या नहीं |
| Scope और biopsy | कैंसर है या नहीं, और किस क़िस्म का है | biopsy के बिना कुछ भी तय नहीं होता |
| पूरी colonoscopy | बाक़ी बड़ी आँत में कोई दूसरी गाँठ या पॉलिप है या नहीं | दूसरी गाँठ मिले तो ऑपरेशन बदल जाता है |
| पेड़ू का MRI | गाँठ की गहराई, आसपास की गाँठें, और उसके चारों ओर का किनारा | तय करता है कि पहले रेडिएशन होगी या पहले सर्जरी |
| छाती, पेट और पेड़ू का CT | कैंसर लिवर या फेफड़ों तक फैला है या नहीं | गाँठ को हमेशा के लिए हटाने की योजना और लंबे इलाज की योजना में फ़र्क़ करता है |
| CEA की ख़ून जाँच | एक निशानी, जो कुछ मलाशय के कैंसर छोड़ते हैं | बाद की जाँचों से मिलाने के लिए शुरुआती आँकड़ा |
| मरम्मत वाले जीन की जाँच (MMR या MSI) | गाँठ में मरम्मत की ख़राबी है या नहीं | इलाज का अलग रास्ता खुल सकता है |
हर मरीज़ में क्रम थोड़ा बदल सकता है। सूची वही रहती है।
हल्के हाथ से की गई उँगली की जाँच वह पहली संख्या देती है जो सर्जन को चाहिए: गाँठ की गुदा के मुँह से दूरी।
इसमें एक मिनट लगता है। जिस रिपोर्ट में बिना दूरी के सिर्फ़ “गाँठ दिखी” लिखा हो, वह योजना के लिए काफ़ी नहीं है, और यह नाप अक्सर छोटी सीधी scope से दोबारा ली जाती है।
MRI में मलाशय की दीवार की परतें और उसके चारों ओर की चर्बी दिखती है। इसी जाँच से तय होता है कि ऑपरेशन से पहले रेडिएशन या कीमोथेरेपी चाहिए या नहीं।
हर MRI रिपोर्ट में ये पाँचों बातें नहीं होतीं। आपकी रिपोर्ट में न हों, तो उसे ऐसे radiologist से दोबारा पढ़वाएँ जो मलाशय के स्कैन रोज़ पढ़ते हैं। बाहर के स्कैन कभी-कभी ग़लत कोण से लिए जाते हैं। ऐसे में हम उसे दोबारा करवा सकते हैं, क्योंकि आगे के सारे फ़ैसले उसी पर टिके होते हैं।
CT scan फैलाव खोजता है। इसमें छाती, पेट और पेड़ू आते हैं, और आम तौर पर ड्रिप से रंग (dye) चढ़ाया जाता है।
अगर scope आँत के ऊपरी हिस्से तक नहीं पहुँच पाई, तो इलाज शुरू करने से पहले बड़ी आँत का CT scan बाक़ी हिस्सा साफ़ कर सकता है।
आम ख़ून जाँच से सेहत और ख़ून की कमी देखी जाती है। CEA शुरुआती आँकड़ा देता है, और biopsy पर जीन की जाँच इलाज बदल सकती है।
पचास से कम उम्र में मलाशय का कैंसर हो, परिवार में कई लोगों को आँत या बच्चेदानी का कैंसर हुआ हो, या गाँठ की जाँच विरासत में मिली ख़राबी की ओर इशारा करे, तो जेनेटिक सलाह दी जाती है।
किसी भी इलाज से पहले हम दर्ज करते हैं कि आपकी आँत, मूत्राशय और यौन क्रिया आज कैसी चल रही है, और आप कितने स्वस्थ हैं। ये नोट योजना को दिशा देते हैं।
सर्जरी से पहले stoma की जगह तय करने का मतलब यह नहीं कि stoma बनेगा ही। मतलब सिर्फ़ इतना है कि ज़रूरत पड़े तो वह ऐसी जगह हो जहाँ आप उसे सँभाल सकें।
मलाशय के कैंसर पर इलाज शुरू होने से पहले टीम में चर्चा होनी चाहिए। सर्जन, रेडिएशन विशेषज्ञ, कैंसर के फ़िज़िशियन, पैथोलॉजिस्ट और मलाशय के radiologist एक ही फ़ाइल पढ़ते हैं।
उसके बाद योजना आपको सीधे शब्दों में समझाई जाती है। चरण से पहला क़दम कैसे तय होता है, इसके लिए नीचे के मलाशय का कैंसर: Sphincter बच सकता है? देखें।
हाँ। इलाज सिर्फ़ स्कैन या scope की तस्वीर देखकर तय नहीं होता। biopsy से कैंसर और उसकी क़िस्म की पुष्टि होती है।
CT फैलाव खोजता है। पेड़ू का MRI मलाशय की दीवार और उसके चारों ओर का किनारा दिखाता है, जो CT अच्छे से नहीं दिखा पाता।
आम तौर पर नहीं। दूसरे स्कैन साफ़ न हों या फैलाव का शक हो, तब जोड़ा जाता है। मलाशय के कैंसर की नियमित जाँचों में यह नहीं आता।
नहीं। कुछ मलाशय के कैंसर CEA छोड़ते ही नहीं, इसलिए सामान्य आने से कैंसर की संभावना ख़त्म नहीं होती। यह मुख्य रूप से बाद में मिलाने का शुरुआती आँकड़ा है।
यह इस पर निर्भर है कि MRI की तारीख़ कितनी जल्दी मिलती है। कई मरीज़ों में सेट लगभग दो हफ़्ते में पूरा होता है। ख़ून ज़्यादा जाए या आँत रुकी हो, तो हमें बताएँ।
अक्सर हाँ, अगर मलाशय का MRI पूरा हो। कोई ज़रूरी ब्योरा छूटा हो, तो हम उसे दोबारा पढ़वाने या दोबारा कराने को कह सकते हैं।
मलाशय के कैंसर की पूरी देखभाल मध्य मलाशय का कैंसर पेज से शुरू होती है। सफ़र से पहले सवाल हों तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
Consultation, endoscopy, biopsy और scan की रिपोर्ट देखना, दूसरी राय और नियमित जाँच।
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. Endoscopy, biopsy, CT scan, पेट और ग्रहणी के रोगों के ऑपरेशन, और भर्ती मरीज़ों की देखभाल।
biopsy में मलाशय की गाँठ निकली है, या scope में कुछ दिखा है जिसका नाम आपको नहीं पता। आगे की जाँचें पूरा इलाज तय करती हैं, इसलिए हर जाँच ठीक से होनी चाहिए। अपनी रिपोर्ट हमें भेजें, या मुलाक़ात बुक करें। Dr Harsh Shah आपके साथ बैठकर उन्हें देखते हैं। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर रिपोर्ट दिखाने के लिए पूछें
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