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Dr. Harsh J Shah

पेट पर चोट के बाद अंदरूनी खून: कब ऑपरेशन ज़रूरी?

Dr. Jivraj Mehta Hospital · Vasna, Ahmedabad

पिछली बार अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

पेट की चोट (abdominal trauma): सड़क दुर्घटना, ऊँचाई से गिरना, खेल में चोट, मारपीट और चाकू का घाव · liver, तिल्ली (spleen), आँत, अग्न्याशय और नसों की चोट · Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad

हाईवे पर टक्कर या बाइक से गिरने के बाद बाहर कोई घाव न दिखे, तब भी पेट के अंदर खून बह सकता है। दर्द, चक्कर या पेट फूले तो तुरंत emergency जाएँ।

Liver या तिल्ली में दरार हो, तब भी कई मरीज़ बिना ऑपरेशन ठीक हो जाते हैं। ICU में लगातार निगरानी, खून की जाँच और scan चलते रहते हैं।

खून बंद न हो, आँत फट गई हो या blood pressure न टिके, तब ऑपरेशन करना पड़ता है। यह फ़ैसला scan और बिस्तर के पास की जाँच दोनों मिलकर लेते हैं।

पेट की चोट किसे कहते हैं?

बाहर से लगे ज़ोर से पेट के अंदर के अंगों को हुआ नुकसान पेट की चोट कहलाता है। यह दो तरह की होती है: भोथरी चोट और अंदर तक घुसा घाव।

डॉ. हर्ष शाह, gastro surgeon, अहमदाबाद
Dr Harsh Shah — MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology).

Dr. Jivraj Mehta Hospital. पाचन तंत्र की सर्जरी में दो उच्च डिग्री, और liver, अग्न्याशय, पेट और आँतों की सर्जरी का 18 साल का अनुभव, पहले से तय और emergency दोनों। Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad में scan, दूरबीन, ICU, blood bank और operation theatre एक टीम की तरह काम करते हैं।

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Intestine & Gastro Surgeon · Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad

घायल मरीज़ की देखभाल emergency डॉक्टर, anaesthetist, radiologist और ICU टीम के साथ मिलकर होती है। हड्डियों, सिर, छाती और किडनी की जाँच उसी समय उनके विशेषज्ञ करते हैं।

गुजरात में भोथरी चोट ज़्यादा देखी जाती है। बाइक या कार की दुर्घटना, छत या सीढ़ी से गिरना, गाय-भैंस की लात, बच्चे के पेट में साइकिल का हैंडल लगना, या मारपीट। त्वचा पर कुछ न दिखे, पर अंदर नुकसान हो। पसलियों के पास रहने वाले liver और तिल्ली में दरार आकर खून बहता है। जहाँ seat belt या हैंडल दबता है, वहाँ आँत और उसकी नसों का पंखा फट सकता है।

घुसा हुआ घाव चाकू, धारदार औज़ार, काँच, सरिये पर गिरने या गोली से होता है। बाहर का घाव छोटा दिखे, पर नोक गहराई तक गई हो। छाती के निचले हिस्से का घाव liver, तिल्ली या diaphragm तक पहुँच सकता है। Diaphragm यानी छाती और पेट को अलग करने वाला मांसपेशी का पर्दा।

अंगआम तौर पर चोट कैसे लगती हैउसके बाद क्या होता है
तिल्ली (spleen), पेट के बाएँ ऊपरबाईं पसलियों पर चोट, गिरना, दुर्घटना।स्थिर मरीज़ में ज़्यादातर निगरानी। खून जारी रहे तो catheter से नस बंद करना या ऑपरेशन।
Liver, पेट के दाएँ ऊपरदाईं पसलियों पर चोट, दुर्घटना, चाकू।स्थिर मरीज़ में ज़्यादातर निगरानी। जारी खून या पित्त रिसे तो catheter या ऑपरेशन।
छोटी आँत और उसकी नसेंSeat belt, हैंडल, लात, चाकू।फटी हो तो ज़्यादातर ऑपरेशन से सिलना या जोड़ना पड़ता है।
बड़ी आँतचाकू, दुर्घटना, किसी चीज़ पर गिरना।सिलना, या छोटा हिस्सा निकालना। कभी-कभी कुछ समय के लिए थैली।
अग्न्याशय और duodenumहैंडल या steering पेट के ऊपरी हिस्से में लगे।मुख्य नली फटी है या नहीं, उससे निगरानी, drain या ऑपरेशन तय होता है।
Diaphragmछाती के नीचे चाकू, भारी दुर्घटना।सिलना पड़ता है, कई बार दूरबीन से, ताकि बाद में hernia न बने।

दुर्घटना के बाद खतरे के संकेत

कुछ चोटें देर से दिखती हैं। मौके पर ठीक लगने वाला मरीज़ घंटों बाद अंदर खून खो सकता है, इसलिए ये संकेत दिखें तो दोबारा emergency में दिखाएँ।

  • बढ़ता हुआ पेट दर्द, या बाईं तरफ़ चोट के बाद बाएँ कंधे में दर्द। Diaphragm के नीचे जमा खून कंधे में दर्द करता है।
  • पेट फूलना, सख़्त लगना या छूने पर दर्द।
  • चक्कर, बेहोशी, तेज़ धड़कन, ठंडा पसीना या चेहरा पीला पड़ना।
  • उल्टी, ख़ासकर खून की उल्टी।
  • पेशाब या मल में खून।
  • Seat belt की लाइन में पेट पर नील, या हैंडल का निशान।
  • एक-दो दिन बाद बुख़ार और बढ़ता दर्द। यह आँत की छूट गई दरार का संकेत हो सकता है।

बच्चे और बुज़ुर्ग दर्द ठीक से बता नहीं पाते। गिरने के बाद बच्चा चलना न चाहे, खेलना बंद कर दे या बार-बार उल्टी करे, तो जाँच कराएँ। खून पतला करने की दवा लेने वाले बुज़ुर्गों को छोटी चोट के बाद भी ज़्यादा खून बहता है।

मौके पर परिवार क्या करे?

  1. 108 पर ambulance बुलाएँ। मरीज़ जहाँ है वहाँ ख़तरा हो, तभी हिलाएँ।
  2. खाना, पानी या चाय न दें। ऑपरेशन करना पड़े तो भरा पेट बेहोशी की दवा में जोखिम बढ़ाता है।
  3. शरीर में चाकू या सरिया फँसा हो तो न निकालें। खींचने से भारी खून शुरू हो सकता है।
  4. खुले घाव से खून बहे तो साफ़ कपड़ा दबाकर रखें।
  5. मरीज़ को गर्म रखें, सीधा लिटाएँ, और चोट का समय तथा चल रही दवाएँ लिख लें।

जाँच किस क्रम में होती है?

जाँच का क्रम तय है: पहले साँस और blood pressure, फिर बिस्तर के पास sonography, और मरीज़ स्थिर हो जाए तब CT scan।

  1. Primary survey. टीम साँस की नली, साँस और खून का दौरा जाँचती है। ड्रिप चढ़ती है, blood group के लिए खून जाता है, और बाहर का खून रोका जाता है।
  2. बिस्तर के पास sonography (FAST). Emergency कमरे में ही कुछ मिनट की जाँच, liver, तिल्ली, दिल और पेड़ू के आसपास खून ढूँढने के लिए। मरीज़ को हिलाना नहीं पड़ता।
  3. खून की जाँच. Haemoglobin, blood group और cross-match, किडनी की जाँच, खून जमने की जाँच, और lactate, जो बताता है कि शरीर में खून की कितनी कमी है।
  4. Contrast के साथ CT scan. स्थिर मरीज़ में यही मुख्य जाँच है। यह liver और तिल्ली की दरार का grade, जारी खून, और आँत फटने का इशारा देने वाली हवा या पानी दिखाता है।
  5. बार-बार जाँच. Surgeon कुछ-कुछ घंटों पर पेट दोबारा जाँचते हैं। Scan छोटी दरार चूक सकता है, पर बढ़ता दर्द नहीं चूकता।
  6. ज़रूरत हो तो दूरबीन से देखना (diagnostic laparoscopy). चाकू का घाव पेट की दीवार या diaphragm पार गया या नहीं, यह scan से तय न हो, तब छोटे कैमरे से अंदर देखा जाता है।

मरीज़ अस्थिर हो और sonography में खून दिखे, तो CT का इंतज़ार नहीं होता। सीधे operation theatre। जो मरीज़ रुक सकता है, उसकी scan मदद करता है; जो नहीं रुक सकता, उसे scan के लिए रोका नहीं जाता।

सिर्फ़ चोट है या कुछ और भी?

ज़्यादातर चोट ही पूरी बात होती है। कभी छोटी चोट के बाद किसी अंग से खून बहता है क्योंकि वह पहले से बीमार था, और scan इसे पकड़ लेता है।

छोटे से गिरने पर फटी तिल्ली malaria, typhoid, viral बुख़ार या खून की बीमारी से पहले ही बढ़ी हुई हो सकती है। हल्की चोट के बाद बहुत खून बहाने वाले liver में adenoma जैसी साधारण गाँठ, या कभी-कभार cancer, हो सकता है। Trauma CT में दुर्घटना से असंबंधित चीज़ें भी दिखती हैं, जैसे किडनी या adrenal की गाँठ, liver पर धब्बा या पथरी।

ऐसी बातें हम radiologist के साथ पढ़ते हैं और परिवार को सरल शब्दों में बताते हैं। साधारण चीज़ के लिए follow-up तय होता है। गाँठ होने का शक हो तो चोट शांत होने के बाद सही जाँच होती है, emergency के बीच कभी नहीं।

इलाज के सभी चरण

इलाज एक-एक कदम आगे बढ़ता है: नज़दीकी निगरानी, catheter से खून देने वाली नस बंद करना, दूरबीन से ऑपरेशन, और खुला ऑपरेशन। कई मरीज़ शुरुआती कदमों पर ही रुक जाते हैं।

  1. नज़दीकी निगरानी (non-operative care). HDU या ICU के बेड पर आराम, ड्रिप, दर्द की दवा, बार-बार haemoglobin और जाँच। Operation theatre तैयार रहता है।
  2. Angioembolisation. Radiologist जाँघ की नस से पतली नली खून देने वाली नस तक ले जाकर अंदर से बंद करते हैं। इससे तिल्ली या liver ऑपरेशन से बच सकते हैं।
  3. दूरबीन या drain. पित्त नली या अग्न्याशय के कुछ रिसाव में पेट खोले बिना दूरबीन या drain मदद करता है।
  4. Laparoscopy. स्थिर मरीज़ में चाकू का घाव, diaphragm की दरार या आँत पर शक हो तो दूरबीन से देखना और सिलना।
  5. Laparotomy. पेट के बीच से खुला ऑपरेशन, भारी खून या फटी आँत के लिए। Surgeon खून रोकते हैं, चोट वाला हिस्सा सिलते या निकालते हैं, और पेट धोकर साफ़ करते हैं।
  6. Damage-control surgery. बहुत गंभीर मरीज़ में पहला ऑपरेशन सिर्फ़ खून और रिसाव रोकता है। ICU में मरीज़ को गर्म और स्थिर किया जाता है, और पूरी मरम्मत एक-दो दिन बाद होती है।

ऑपरेशन कब ज़रूरी नहीं?

स्थिर मरीज़ में liver या तिल्ली की दरार हो और आँत को चोट न हो, तो कई बार निगरानी काफ़ी है। शर्त यह है कि बार-बार जाँच हो और theatre तैयार रहे।

धड़कन और blood pressure स्थिर रहें, haemoglobin टिका रहे, CT में contrast बाहर रिसता न दिखे, और पेट का दर्द न बढ़े, तब निगरानी से इलाज चलता है। ऐसे कई मरीज़ एक हफ़्ते में घर जाते हैं। बाद में कुछ समय आराम रखना पड़ता है, क्योंकि भरती हुई तिल्ली या liver पर फिर चोट लगे तो फिर खून बह सकता है।

पेट की दीवार पार न गया हो, ऐसा छोटा चाकू का घाव सिर्फ़ साफ़ करके टाँके लगाने से ठीक हो सकता है। Surgeon पहले उस जगह को सुन्न करके घाव की गहराई जाँचते हैं।

धड़कन बढ़े, blood pressure गिरे, ज़्यादा से ज़्यादा खून चढ़ाना पड़े, या पेट पत्थर जैसा सख़्त हो जाए, तो निगरानी बंद और ऑपरेशन शुरू। यह बदलाव पहले घंटे से ही सोचा हुआ होता है, इसलिए समय बर्बाद नहीं होता।

किस अंग में कौन सा ऑपरेशन?

ऑपरेशन इस पर निर्भर करता है कि कौन सा अंग कितना घायल है। लक्ष्य हमेशा खून रोकना, रिसाव बंद करना और जितना सुरक्षित हो उतना स्वस्थ अंग बचाना है।

तिल्ली. फटी तिल्ली को दरार और मरीज़ की स्थिरता के अनुसार सिला जाता है, थोड़ा निकाला जाता है, या पूरी निकाली जाती है (splenectomy)। तिल्ली के बिना सामान्य जीवन जिया जा सकता है, पर टीके और बुख़ार में जल्दी इलाज ज़रूरी है, जो नीचे समझाया गया है।

Liver. Liver की ज़्यादातर दरारें packing, टाँकों या seal करने से बंद होती हैं। बड़ी नसों के पास की गहरी दरार के लिए ऐसा surgeon चाहिए जो liver के ऑपरेशन नियमित करता हो। बाद में पित्त रिसे तो ज़्यादातर drain या ERCP stent से ठीक होता है, दूसरे ऑपरेशन से नहीं।

छोटी आँत. छोटा छेद टाँकों से बंद होता है। बुरी तरह कुचला या फटा हिस्सा निकालकर दोनों सिरे जोड़े जाते हैं। आँत की नसों का पंखा (mesentery) फटे तो एक हिस्से को खून नहीं मिलता, और वह हिस्सा निकालना पड़ता है।

ज़्यादातर मामलों में आँत की चोट उसी दिन सिल दी जाती है। सीधे जोड़ना सुरक्षित न हो, तभी कुछ समय के लिए थैली रखी जाती है।

बड़ी आँत. साफ़ और जल्दी पकड़ी गई दरार सिल दी जाती है। बड़ी या देर से पकड़ी गई दरार, या अंदर गंदगी फैली हो, तो कुछ समय के लिए stoma, यानी पेट पर थैली, रखनी पड़ती है। यह ज़्यादातर कुछ हफ़्तों बाद बंद हो जाती है।

अग्न्याशय और duodenum. मुख्य नली न फटी हो, ऐसी सूजन drain और समय से ठीक होती है। Body या tail में नली फटी हो तो ज़्यादातर वह हिस्सा, तिल्ली के साथ या बिना, निकालना पड़ता है। Head के पास की चोट में पित्त नली, duodenum और बड़ी नसें मिलती हैं, इसलिए बहुत सावधानी से फ़ैसला लिया जाता है।

आमाशय और diaphragm. फटा आमाशय टाँकों से बंद होता है। फटा diaphragm सिलना पड़ता है, वरना बाद में आमाशय या आँत छाती में खिसक सकती है।

ऑपरेशन से पहले और दौरान सावधानी

  • खून जल्दी cross-match होता है, और चीरा लगाने से पहले खून तैयार रहता है।
  • मरीज़ को गर्म रखा जाता है। ठंडे मरीज़ में ज़्यादा खून बहता है, इसलिए ड्रिप और कंबल गर्म रखे जाते हैं।
  • पहले चीरे से पहले antibiotic दी जाती है।
  • पूरा पेट तय क्रम में जाँचा जाता है, ताकि दूसरी चोट न छूटे।
  • सिर, छाती, हड्डियों या किडनी में भी चोट हो तो वह टीम साथ में काम करती है।

इलाज के बाद के पहले दिन

पहले दो दिन नज़दीकी निगरानी में बीतते हैं। दर्द पर काबू, जल्दी पानी और जल्दी चलना, ये तीन बातें ठीक होने की रफ़्तार बढ़ाती हैं।

ऑपरेशन के बाद ज़्यादातर मरीज़ पहले एक-दो दिन ICU या HDU में रहते हैं। दर्द ड्रिप की दवा और कई बार पीठ में लगी पतली नली (epidural) से काबू में रहता है। आँत चालू होते ही पानी के घूँट, फिर नरम खाना। चलना जल्दी शुरू होता है, ताकि छाती का संक्रमण और पैरों में खून के थक्के का जोखिम घटे।

बिना ऑपरेशन के इलाज में पहले एक-दो दिन बिस्तर पर आराम, फिर चलना। घर जाने से पहले haemoglobin फिर जाँचा जाता है। परिवार को खतरे के संकेतों की लिखित सूची और संपर्क नंबर दिया जाता है।

जोखिम क्या हैं?

हर इलाज में जोखिम होता है, और चोट का अपना जोखिम ज़्यादा होता है। मुख्य जोखिम ये हैं:

  • फिर से खून बहना, चोट वाले अंग से या ऑपरेशन की जगह से;
  • घाव में या पेट के अंदर संक्रमण, या मवाद जमा होना जिसके लिए drain लगाना पड़े;
  • आँत के जोड़ से रिसाव;
  • ऐसी चोट जो बाद में सामने आए;
  • छाती का संक्रमण और पैरों की नसों में थक्के;
  • महीनों बाद टाँकों की जगह hernia, या पेट के अंदर पट्टियाँ (adhesions)।

सामने मौजूद चोट पर लागू होने वाले जोखिम हम consent से पहले, परिवार समझ सके ऐसे शब्दों में समझाते हैं।

तिल्ली के बिना जीवन

तिल्ली निकालने के बाद शरीर कुछ कीटाणुओं से कम लड़ पाता है। टीके, तैयार antibiotic, और तेज़ बुख़ार में तुरंत इलाज, यह जोखिम ज़िंदगी भर कम रखते हैं।

Pneumococcus, meningococcus और Haemophilus के टीके दिए जाते हैं, emergency splenectomy के बाद हो सके तो लगभग दो हफ़्ते पर, या मरीज़ लौट न सके तो छुट्टी से पहले। हर साल flu का टीका भी फ़ायदा करता है। आगे हर डॉक्टर को बताएँ कि आपकी तिल्ली नहीं है, और तेज़ बुख़ार हो तो उसी दिन दिखाएँ।

घर जाने के बाद रोज़मर्रा का जीवन

  • Surgeon इजाज़त न दें तब तक भारी वज़न, धक्का-मुक्की वाले खेल और बाइक चलाना टालें। Liver या तिल्ली की चोट के बाद ज़्यादातर कुछ हफ़्ते।
  • आँत ठीक से चलने लगे तो घर का सामान्य खाना। पहले हफ़्तों में थोड़ा-थोड़ा खाना अच्छा है।
  • घाव साफ़ और सूखा रखें। टाँके या clip पहली मुलाक़ात पर निकलते हैं।
  • बढ़ता दर्द, बुख़ार, चक्कर, उल्टी, या घाव में लाली और मवाद दिखे तो तुरंत वापस आएँ।

मरीज़ों और परिवारों के अनुभव

★★★★★

“Fabulous doctor Very good hospital with emergency service 24 X 7, our experience is very good save our father in critical situation thanks to Dr Harsh Shah.”

— Pratik Rajput, Google review

★★★★★

“Dr. Harsh Shah gets it. From his experience, excellent treatment and ability to connect, you know where you stand immediately and what next steps look like. Thank you Dr.Harsh Shah once again.”

— Abu sufiyan vasa, Google review

★★★★★

“Very good doctor and diagnosis skills is brilliant the way politely explained the patient about disease half pain relieve immediately very good experience and very knowledgeable doctors thanks Dr. Harsh for your kind treatment”

— snehal shah, Google review

Reviews Google पर जैसे लिखे गए वैसे ही रखे गए हैं। कोई भी review पेट की चोट के बारे में नहीं है। पहला परिवार के सदस्य की emergency देखभाल के बारे में है, और बाकी दो सामान्य इलाज के बारे में।

Emergency से follow-up तक

  1. पहले emergency इलाज. 108 बुलाएँ या पास के emergency विभाग पहुँचें। मरीज़ को स्थिर करना पहला काम है।
  2. क्रम से जाँच. Primary survey, बिस्तर के पास sonography, खून की जाँच, और मरीज़ स्थिर हो तब CT scan।
  3. फ़ैसला. निगरानी, catheter इलाज या ऑपरेशन, emergency, radiology और ICU टीम के साथ तय होता है और परिवार को समझाया जाता है।
  4. इलाज और रिकवरी Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad में, रोज़ परिवार को जानकारी के साथ।
  5. Follow-up OPD, अहमदाबाद में: घाव, खून की जाँच, scan में दिखी बात, और splenectomy के बाद टीके।

खर्च, बीमा और भर्ती

खर्च इलाज के कदम, ICU के दिनों और दूसरी चोटों पर निर्भर करता है। Emergency जितनी इजाज़त दे, उतनी जल्दी परिवार को अनुमान दिया जाता है।

Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad मुख्य बीमा कंपनियों और cashless सुविधा के साथ काम करता है, और उसका office pre-authorisation संभालता है। दुर्घटना के केस क़ानून के मुताबिक़ medico-legal case (MLC) के रूप में दर्ज होते हैं; इससे इलाज नहीं रुकता। मरीज़ का पहचान पत्र, बीमा कार्ड, दवाओं की सूची और दूसरे hospital में हुआ scan CD या link पर साथ लाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाहर घाव न हो, तब भी चोट गंभीर हो सकती है?

हाँ। भोथरी चोट में त्वचा सामान्य दिखती है, पर अंदर liver, तिल्ली या आँत फटी हो सकती है। चोट के बाद दर्द, सूजन या चक्कर हो तो emergency में जाँच कराएँ।

Liver या तिल्ली की हर चोट में ऑपरेशन?

नहीं। कई स्थिर मरीज़ों का इलाज नज़दीकी निगरानी से, कभी catheter से नस बंद करके होता है। खून न रुके तो ऑपरेशन तैयार रहता है।

CT सामान्य है, फिर निगरानी क्यों?

आँत की छोटी दरार पहले scan में छिप सकती है। अगले घंटों की जाँच में वह पकड़ी जाती है, क्योंकि पेट ज़्यादा दुखता है और बुख़ार आ सकता है।

चोट के बाद दूरबीन से ऑपरेशन हो सकता है?

हाँ, स्थिर मरीज़ में। चाकू का घाव जाँचने, diaphragm सिलने या आँत की दरार ढूँढने में laparoscopy काम आती है। अस्थिर मरीज़ में खुला ऑपरेशन चाहिए।

काम या खेल पर कब लौट सकते हैं?

बैठकर होने वाला काम कई बार कुछ हफ़्तों में। भारी वज़न, धक्का-मुक्की वाले खेल और बाइक के लिए ज़्यादा इंतज़ार, जब तक surgeon इजाज़त न दें।

आँत के ऑपरेशन के बाद थैली लगेगी?

ज़्यादातर दरारें बिना थैली के सिल जाती हैं। दरार बड़ी या देर से पकड़ी गई हो, तब कुछ समय के लिए थैली रखी जाती है, जो ज़्यादातर कुछ हफ़्तों बाद बंद हो जाती है।

डॉ. हर्ष शाह कहाँ मिलते हैं?

Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Dr Jivraj Mehta Marg, Vasna, Ahmedabad 380007.
Emergency इलाज, CT scan, ICU, blood bank, दूरबीन और ऑपरेशन।
Google: Dr Harsh Shah · 4.94 · 18 reviews
Dr. Jivraj Mehta Hospital, वासणा का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601

पूरे गुजरात, दक्षिण राजस्थान और पश्चिम मध्य प्रदेश से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।

किसी को अभी पेट में चोट लगी है? 108 पर ambulance बुलाएँ, या सीधे पास के emergency विभाग पहुँचें। खाने-पीने को कुछ न दें। मरीज़ किसी दूसरे hospital में भर्ती है, तो CT scan और रिपोर्ट मुलाक़ात में साथ लाएं। फ़ोन करें +91-63555-64601 · CT और रिपोर्ट साथ लाएं

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Dr Harsh Shah, Gastro, Cancer & Laparoscopic Surgeon, Ahmedabad
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