Skip to main contentDr Harsh Shah · Gastro & Cancer Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar और Gota OPD, Ahmedabad
नीचे की आँत से होने वाला bleeding यानी वह खून जो बड़ी आँत (large intestine) से आता है, या छोटी आँत (small intestine) के उस हिस्से से जहाँ आम scope नहीं पहुँचता। ज़्यादातर मामलों में यह अपने आप रुक जाता है और बहुत कम मरीज़ों को ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है — लेकिन यह जानना हमेशा ज़रूरी है कि खून ठीक-ठीक कहाँ से आ रहा है, क्योंकि यहाँ सबसे बुरा नतीजा अंदाज़े पर किया गया आँत का ऑपरेशन है। Dr Harsh Shah यह काम Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre में उसी क्रम में करते हैं जो आज का evidence कहता है: पहले मरीज़ को स्थिर करना, फिर तय करना कि स्रोत ऊपर है या नीचे, bleeding point ढूँढना, जहाँ तक हो सके scope या catheter से इलाज करना, और ऑपरेशन सिर्फ़ पकड़ी जा चुकी जगह पर करना।

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon
· Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad
Surgical gastroenterology में दो बार की degree और बड़े केंद्रों की training — Dr Harsh Shah के पास वे मरीज़ आते हैं जिनका bleeding रुक नहीं रहा, जिनकी दो scope में कुछ नहीं मिला, या जिन्हें स्रोत मिले बिना ऑपरेशन की सलाह दे दी गई है; यहाँ ज़रूरी ऑपरेशन करने जितना ही काम ग़ैरज़रूरी ऑपरेशन रोकने का है। Gota clinic पर Google rating 4.89, कुल 216 reviews; Apollo Hospital, Bhat listing पर 4.94, कुल 17 reviews।
मल के साथ आने वाला ताज़ा या काला खून ज़्यादातर बड़ी आँत से आता है — diverticular disease, आँत की दीवार की कमज़ोर नसें जिन्हें angiodysplasia कहते हैं, खून की सप्लाई घट जाना, colitis, या polyp निकालने के बाद बची जगह। Colonoscopy और gastroscopy दोनों साफ़ हों तो स्रोत अक्सर छोटी आँत में होता है — जिसे अब small bowel bleeding कहा जाता है, पुराना शब्द obscure bleeding नहीं; नाम इसलिए बदला कि ऐसे बहुत से lesion आम scope की पहुँच में ही थे और पहली बार चूक गए थे।
दो स्थितियाँ यहाँ नहीं देखी जातीं। Liver की बीमारी में varices का bleeding अलग emergency है। और बवासीर (piles), चीर (fissure) और भगंदर (fistula) का इलाज इस unit में होता ही नहीं — ऐसे मरीज़ colorectal service को भेजे जाते हैं, एक सख़्त शर्त के साथ।
ऊपर की आँत की जाँच किए बिना, खून की कमी (anaemia) या ज़्यादा खून जाने का कारण कभी बवासीर पर नहीं डाला जाता। बवासीर इतनी आम है कि आँत में असली lesion वाले मरीज़ को भी वह होती ही है, और जो दिख रहा है उसी पर दोष डालकर रुक जाने से इलाज लायक lesion साल भर छूट जाता है। अधेड़ उम्र, iron की कमी, वज़न घटना या शौच की आदत बदलना हो तो गुदा के पास चाहे जो दिखे, पूरी बड़ी आँत की जाँच होती ही है।
जिस मरीज़ की नब्ज़ तेज़ चल रही हो और blood pressure गिर रहा हो, उसमें नीचे से आता ताज़ा लाल खून — जब तक साबित न हो जाए — पेट (stomach) या duodenum का bleeding माना जाता है। ऊपर का तेज़ bleeding आँत में इतनी जल्दी उतरता है कि नीचे ताज़े लाल खून की तरह ही दिखता है। ऐसे मरीज़ की पहली जाँच upper endoscopy है। उसे bowel preparation और colonoscopy की कतार में लगाना उन्हीं घंटों को गँवाना है जिनमें असली bleeding point मिल सकता था।
यही वह ग़लती है जो बच सकने वाली स्थिति को जानलेवा बना देती है। इसीलिए मरीज़ refer होकर आए तो Dr Harsh Shah का पहला सवाल यह नहीं होता कि colonoscopy में क्या दिखा, बल्कि यह कि खून आते समय नब्ज़ और blood pressure कैसे थे।
कौन सी जाँच पहले हो, यह इससे तय होता है कि मरीज़ कितना स्थिर है — इससे नहीं कि कौन सी जाँच आसानी से मिल रही है। अस्थिर और अभी bleeding कर रहे मरीज़ की CT angiography होती है: उसमें खून निकलता दिखता है और radiologist को नस बंद करने की जगह मिल जाती है। bleeding धीमा पड़ चुका हो तो ठीक preparation के बाद colonoscopy — रात के अँधेरे में नहीं।
| स्थिति | पहले क्या |
|---|---|
| अस्थिर मरीज़, bleeding जारी | पहले resuscitation, फिर CT angiography, फिर catheter से नस बंद करना |
| ताज़ा लाल खून और तेज़ नब्ज़ | पहले upper endoscopy — जब तक नकारा न जाए, stomach का bleeding मानकर |
| स्थिर मरीज़, bleeding रुका या धीमा | ठीक preparation के बाद colonoscopy, सही समय पर |
| Colonoscopy और gastroscopy दोनों साफ़ | Small bowel pathway — दोबारा scope, capsule, फिर balloon enteroscopy |
| Iron की कमी, खून दिखता नहीं | बवासीर पर दोष डालने से पहले पूरी बड़ी आँत और stomach की जाँच |
Dr Harsh Shah बताते हैं कि colonoscopy किसे और कब ज़रूरी होती है — मल में खून आना उन्हीं कारणों में से एक है।
Imaging के साथ पहली मुलाक़ात में वे बातें भी दर्ज होती हैं जो scan जितनी ही इलाज तय करती हैं: haemoglobin और उसका रुख़, clotting, kidney और liver function, और aspirin, clopidogrel, warfarin या नई दवाओं की सूची — हर दवा किस वजह से शुरू हुई थी, यह भी। यह काग़ज़ी बात नहीं; इसी से तय होता है कि अब क्या सुरक्षित है।
कुछ समय पहले तक यही पढ़ाया जाता था कि जोखिम वाले मरीज़ की colonoscopy एक दिन के भीतर कर ली जाए। American College of Gastroenterology ने नई guideline में वह सिफ़ारिश पलट दी: जल्दबाज़ी की colonoscopy से दोबारा bleeding कम नहीं होता और कोई नतीजा नहीं सुधरता। स्थिर मरीज़ में अगले पंद्रह दिनों में की गई colonoscopy उतनी ही असरदार है — और ठीक से साफ़ हुई आँत की जाँच ज़्यादा सुरक्षित है और उसमें मिलता भी ज़्यादा है।
घरवालों को यह उलटी बात लगती है, और उन्हें आदेश नहीं, वजह मिलनी चाहिए। जल्दबाज़ी की preparation के बाद रात में की गई colonoscopy उस आँत में देखती है जो अभी खून से भरी है — bleeding point नहीं दिखता और जाँच दोबारा करनी पड़ती है। इंतज़ार देरी नहीं, काम की और बेकार जाँच के बीच का फ़र्क़ है।
अपवाद अस्थिर मरीज़ है, और वहाँ जवाब endoscopy है ही नहीं। bleeding जारी हो और circulation टिक न रहा हो तो CT angiography और फिर interventional radiologist, जो catheter से उस नस तक पहुँचकर बंद कर देते हैं। उस घड़ी scope उठाना ग़लत समय पर ग़लत औज़ार है।
नीचे की आँत का ज़्यादातर bleeding ऑपरेशन के बिना क़ाबू में आ जाता है। Colonoscopy में bleeding point पर clip, injection या band लगाई जाती है और दीवार की कमज़ोर नसें argon plasma से बंद की जाती हैं। जहाँ bleeding तेज़ हो और CT पर जगह पकड़ में आ गई हो, वहाँ interventional radiologist अंदर से ही वह नस बंद कर देते हैं। हर इलाज lesion को वहीं ठीक करता है और आँत पूरी बची रहती है।
Diverticular bleeding सबसे आम कारण है और सबसे राहत देने वाला भी: आम तौर पर बिना दर्द, देखने में डरावना, ज़्यादातर अपने आप रुक जाने वाला। Bleeding point दिखे तो scope से इलाज; bleeding चलता रहे और जगह पकड़ में आए तो नस बंद। सिर्फ़ एक ही हिस्से से बार-बार होने वाला और खून चढ़ाने की ज़रूरत डालने वाला bleeding ही उसे निकालने की दलील बनता है।
Angiodysplasia में अक्सर औज़ार से ज़्यादा सब्र काम आता है। ये नसें बार-बार बनती हैं, इसलिए बुज़ुर्ग मरीज़ में बार-बार की procedure से बेहतर लंबे समय की iron की दवा है। इनका संबंध दिल के सिकुड़े valve और kidney की बीमारी से भी है, इसलिए दोनों को संयोग मानकर छोड़ा नहीं जाता।
खून की सप्लाई घटने से हुई तकलीफ़ ज़्यादातर सहारे के इलाज से ठीक होती है; ऑपरेशन तभी जब आँत मर गई हो, पेट में infection फैला हो, या सिकुड़न रह गई हो। Polyp के बाद का bleeding colonoscopy में ही रुक जाता है। Colitis का इलाज मूल बीमारी की तरह होता है।
खून पतला करने वाली दवाएँ उसी doctor के साथ तय होती हैं जिसने शुरू की थीं, अपने आप नहीं; bleeding रुकने के बाद वे दोबारा शुरू होती हैं — लंबे समय बंद रखने से थक्के का ख़तरा असली है और दिखते bleeding के डर के सामने उसे कम आँका जाता है।
Colon और stomach दोनों साफ़ हों तो क्रम तय है। पहले आम scope से दोबारा जाँच, क्योंकि ऐसे बहुत से lesion scope की पहुँच में ही होते हैं और पहली बार छूट जाते हैं। फिर video capsule — निगलने वाला छोटा camera — पर सिकुड़न न होने की पुष्टि के बाद ही, क्योंकि फँसा capsule निकालना पड़ता है; रुकावट या गाँठ का शक हो तो पहले CT enterography। फिर balloon enteroscopy lesion तक पहुँचकर इलाज करती है और निशान लगाती है।
दो जाँचें ख़ास स्थितियों में जुड़ती हैं। Bleeding जारी हो तो CT angiography या red-cell scan उस हिस्से को पकड़ लेती है। जवान मरीज़ में बिना कारण के bleeding में Meckel scan होती है — जन्म से रह गई छोटी थैली, जिसका निदान सालों छूटता है क्योंकि बड़ी उम्र में कोई उसका ख़याल नहीं करता।
आख़िरी रास्ता ऑपरेशन के दौरान की जाने वाली enteroscopy है, जिसमें surgeon और endoscopist साथ काम करते हैं — ताकि table तक पहुँचे मरीज़ को भी अंदाज़े पर कटी आँत नहीं, पकड़ा हुआ स्रोत मिले।
ऑपरेशन आख़िरी कदम है, और उससे पहले स्रोत मिलना चाहिए। एक पहचाने गए हिस्से से बार-बार होने वाले और खून चढ़ाने की ज़रूरत डालने वाले bleeding में वही हिस्सा निकाला जाता है; enteroscopy में निशान लगाया गया छोटी आँत का lesion थोड़े हिस्से के साथ निकल जाता है। दोनों एक तय निशाने पर होते हैं। जो कभी नहीं किया जाता — स्रोत मिले बिना अंदाज़े से colon काट देना।
वजह इस पन्ने का सबसे अहम वाक्य है। स्रोत मिला ही न हो तो उसके बचे हुए colon में होने की संभावना इतनी ज़्यादा है कि मरीज़ दोबारा bleeding करता है — बड़ा ऑपरेशन झेलने के बाद, और दूसरी बार और कमज़ोर होकर। ऐसे में वजह बदक़िस्मती नहीं, ग़लत हिस्सा निकलना होती है।
एक ही स्थिति में स्रोत के बिना ऑपरेशन होता है, और वह सोच-समझकर लिया फ़ैसला होता है, आदत नहीं: जिस मरीज़ का bleeding मूसलाधार हो और जगह ढूँढने की हर कोशिश नाकाम रही हो, उसमें पूरी बड़ी आँत निकालकर ileostomy लगाई जाती है। बीमार मरीज़ में यह बड़ा ऑपरेशन है, इसमें जान का असली ख़तरा है, और घरवालों को वजह बताकर ही लिया जाता है — यह किसी हिस्से पर अंदाज़ा लगाने जैसा नहीं।
ऑपरेशन दूरबीन (laparoscopic) से हो या खुला — यह मरीज़ की हालत तय करती है, पसंद नहीं: स्थिर मरीज़ में नियोजित ऑपरेशन आम तौर पर दूरबीन से, और भारी bleeding वाले अस्थिर मरीज़ में जो रास्ता सबसे तेज़ और सुरक्षित हो — अक्सर खुला। Dr Harsh Shah हर complication पहले नाम लेकर समझाते हैं: जोड़ से leak, अस्थायी या स्थायी stoma, पेट में पीप, आँतों का देर से चालू होना, चिपकाव से रुकावट, चीरे की जगह hernia, और स्रोत ठीक न पहचाना गया हो तो दोबारा bleeding। आपके मामले के आँकड़े consent की बातचीत में आमने-सामने दिए जाते हैं, website पर नहीं।
छुट्टी कैलेंडर देखकर नहीं दी जाती। उसके लिए चाहिए स्थिर circulation, टिका हुआ haemoglobin, bleeding बंद — और सबसे बढ़कर, या तो निदान या निदान तक पहुँचने की लिखी हुई योजना। बिना कारण के bleeding वाले मरीज़ को घर भेज देना और अगला कदम तय न करना, इस तकलीफ़ की सबसे आम चूक है और यह टाली जा सकती है।
घर जाने से पहले चार चीज़ें जाँची जाती हैं: निदान या तारीख़ वाली जाँच; खून पतला करने वाली दवा कब शुरू होगी और किस doctor के कहने पर; iron की दवा, जो नियम से भुला दी जाती है; और लिखी चेतावनी — दोबारा खून, चक्कर या तेज़ नब्ज़ का मतलब है follow-up का इंतज़ार किए बिना वापस आना।
जिनका ऑपरेशन हुआ हो उनकी रिकवरी enhanced-recovery के हिसाब से चलती है — जल्दी खाना-पीना, पहले दिन बिस्तर से बाहर, stoma हो तो अस्पताल में ही उसकी training। एक-डेढ़ महीने बाद haemoglobin और iron की जाँच के साथ follow-up होता है, ताकि पक्का हो कि खून की कमी सुधर रही है और बाक़ी हर जाँच पूरी हो गई है।
आँत के bleeding का admission अक्सर emergency होता है, इसलिए Apollo Hospital, Bhat का office भर्ती होते ही cashless pre-authorisation शुरू कर देता है; CGHS और corporate panel भी उसी office से चलते हैं। योजना साफ़ होते ही लिखा हुआ अनुमान दिया जाता है। वह बदलता है — खून चढ़ाना पड़ा या नहीं, CT angiography और embolisation लगे या नहीं, कितनी endoscopy हुईं, ऑपरेशन हुआ या नहीं, room category और ठहरने के दिन। phone पर बताया गया कोई एक आँकड़ा अंदाज़ा ही है।
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“I am writing to express my sincere gratitude for the exceptional care provided by Dr. Harsh Shah and his team. Dr. Harsh Shah is an outstanding expert in intestinal surgery, executing complex procedures with remarkable calm and precision. Dealing with gastrointestinal diseases is incredibly stressful for both patients and their families. In my experience, what sets Dr. Harsh Shah apart is his incredible patience; he takes the time to listen to every question and provides clear, reassuring answers to every concern.”
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“I done my stoma closer operation with harsh sir such a nice and kind person never doing miss guide always give right advice polite nature.”
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“I had my appendix surgery done by Dr. Harsh Shah, and I am very satisfied with the care I received. Dr. Harsh Shah explained the procedure clearly, performed the surgery smoothly, and ensured I was comfortable throughout my treatment. The recovery has been excellent, and the entire experience was reassuring. I highly recommend Dr. Harsh Shah for his professionalism, expertise, and compassionate care.”
— Dipen Shah, Google review, Apollo Hospital, Bhat listing
— Jigar Jadav, Google review, Gota clinic listing
— Sakina Magar, Google review, Apollo Hospital, Bhat listing
हाँ। अपने आप रुक जाना इस bleeding का सामान्य तरीक़ा है, सब ठीक होने की निशानी नहीं। कारण ढूँढना ही पड़ेगा — वही lesion दोबारा खून दे सकता है, और कुछ मामलों में कारण ऐसा होता है जिसे बिना निदान छोड़ा नहीं जा सकता। Bleeding रुकने पर जल्दबाज़ी घटती है, ज़रूरत नहीं।
क्योंकि जल्दी करने से नतीजा नहीं सुधरता और जाँच ख़राब हो जाती है। American College of Gastroenterology की नई guideline ने पुरानी सलाह पलट दी है: स्थिर मरीज़ में ठीक से साफ़ हुई आँत की colonoscopy रातोंरात की गई जाँच जितनी ही असरदार है, ज़्यादा सुरक्षित है और उसमें bleeding point मिलने की संभावना कहीं ज़्यादा। अस्थिर मरीज़ की बात अलग है — वहाँ पहला कदम CT angiography है, scope नहीं।
काफ़ी तभी जब ऊपर की आँत की जाँच हो चुकी हो, और खून की कमी का कारण तो बवासीर कभी नहीं मानी जाती। बवासीर, चीर और भगंदर का इलाज इस unit में नहीं होता — वे colorectal service को भेजे जाते हैं — लेकिन anaemia, ज़्यादा खून जाना, वज़न घटना, शौच की आदत बदलना या अधेड़ उम्र हो तो पहले पूरी बड़ी आँत की जाँच होती है।
अब small bowel का क्रम शुरू होता है, क्रम से ही: पहले आम scope से दोबारा जाँच, क्योंकि ऐसे बहुत से lesion पहुँच में होते हैं और पहली बार छूट जाते हैं; फिर सिकुड़न नकारने के बाद video capsule; फिर balloon enteroscopy, जो lesion तक पहुँचकर इलाज करती है और निशान लगाती है। कदम छोड़ने से ही मरीज़ महीनों तक चक्कर काटते रहते हैं।
ज़्यादातर मरीज़ों को दोनों में से कुछ नहीं चाहिए। ऑपरेशन सिर्फ़ पकड़े गए स्रोत पर होता है और आम तौर पर थोड़ा ही हिस्सा निकलता है। Stoma की संभावना तभी बड़ी होती है जब भारी bleeding में स्रोत न मिले और पूरी बड़ी आँत निकालनी पड़े। स्रोत मिले बिना ऑपरेशन की सलाह मिली हो, तो दूसरी राय लेने का यही समय है।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre
Gota, Ahmedabad, Gujarat
Google rating 4.89 · 216 reviews
Dr Harsh Shah दो जगह बैठते हैं — Gota, Ahmedabad और Apollo Hospital, Bhat।
मल में खून आ रहा है, या haemoglobin कम है और कारण नहीं मिल रहा? Colonoscopy की report, CT की images (सिर्फ़ typed report नहीं) और खून पतला करने वाली दवाओं की सूची भेजिए — इतने से ही अगला कदम अक्सर तय हो जाता है। Call +91-63555-64601 · WhatsApp Dr Harsh Shah का office
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