Skip to main contentDr Harsh Shah · Gota OPD, अहमदाबाद · Apollo Hospital, Bhat
पिछला सुधार: 18-Oct-2026
बवासीर (piles) की जाँच, banding और ऑपरेशन, अहमदाबाद · Gota OPD, Gota, Ahmedabad · Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर
यह पन्ना अंग्रेज़ी में भी पढ़ें
संक्षेप में: Dr Harsh Shah बवासीर का इलाज तीन कदमों में करते हैं। पहले खान-पान, दवा और गुनगुने पानी में बैठना। फिर grade 1 से 3 के अंदरूनी मस्सों में OPD में rubber band ligation। बड़े, बाहर रहने वाले या बार-बार लौटने वाले मस्सों में open ऑपरेशन।
मल के साथ खून आए तो उसे सीधे बवासीर नहीं मान लिया जाता। पहले जाँच होती है, और ज़रूरत हो तो colonoscopy।
Banding के बाद एक-दो दिन हल्का दर्द रहता है, और अगले दिन काम पर लौट सकते हैं। Open ऑपरेशन के बाद एक-दो हफ़्ते दर्द रहता है, और घाव चार से सात हफ़्ते में भरते हैं।
गुदा के अंदर खून से भरी नरम गद्दियाँ हर इंसान में होती हैं। जब ये सूजकर नीचे खिसकने लगती हैं, तो इसे बवासीर या मस्से कहते हैं। मस्सा कितना बाहर आता है, यही grade इलाज तय करता है।
Dr Harsh Shah को पेट, आँत और गुदा की surgery में 18 साल का अनुभव है। जाँच, grade, इलाज और बाद की मुलाक़ात, सब एक ही surgeon के पास होता है।
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
GI & Proctology Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad
Gota clinic पर 216 Google reviews में 4.89, और Apollo, Bhat पर 18 reviews में 4.94 rating.
बवासीर के मरीज़ अक्सर डरते हैं कि डॉक्टर के पास गए तो सीधे ऑपरेशन बता दिया जाएगा, और फिर महीनों बैठ नहीं पाएँगे। इसी डर में बहुत से लोग सालों ख़ुद ही दवा लेते रहते हैं। सच यह है कि grade 1 और 2 के ज़्यादातर मस्से खान-पान, दवा या OPD की छोटी प्रक्रिया से काबू में आ जाते हैं।
ये गद्दियाँ गुदा को कसकर बंद रखने में मदद करती हैं। कब्ज़, सख़्त मल, ज़ोर लगाना, टॉयलेट में फ़ोन लेकर देर तक बैठना, बार-बार दस्त, गर्भावस्था और उम्र इनका सहारा कमज़ोर करते हैं। तब गद्दियाँ सूजकर खून देती हैं और नीचे खिसकती हैं।
अंदरूनी मस्से (internal piles) गुदा के अंदर होते हैं, जहाँ संवेदना कम है, इसलिए इनमें ज़्यादातर खून आता है या मस्सा बाहर निकलता है। बाहरी मस्से (external piles) गुदा के किनारे की त्वचा के नीचे होते हैं; इनमें खून जम जाए तो तेज़ दर्द होता है। कई लोगों में दोनों होते हैं।
| Grade | आपको क्या दिखता है |
|---|---|
| Grade 1 | टॉयलेट पेपर पर या पॉट में चमकीला लाल खून। कुछ बाहर नहीं आता। |
| Grade 2 | शौच के समय कुछ बाहर आता है, और अपने आप अंदर चला जाता है। |
| Grade 3 | मस्सा बाहर आता है, और उँगली से अंदर करना पड़ता है। |
| Grade 4 | मस्सा बाहर ही रहता है, अंदर नहीं जाता। अक्सर गीलापन, खुजली या जलन। |
फिशर और भगंदर के बारे में हमारे बवासीर, फिशर और भगंदर clinic के पन्ने पर पढ़ सकते हैं।
जितना छोटा कदम तकलीफ़ को काबू में ला दे, उतना ही उठाया जाता है। Grade 1 और 2 के ज़्यादातर मस्सों में ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ती। Grade 4 में अक्सर पड़ती है।
| Grade या प्रकार | पहला कदम | उससे न सुधरे तो |
|---|---|---|
| Grade 1 | फ़ाइबर, पानी, मल नरम करने की दवा, गोली या मलहम। | OPD में rubber band ligation। |
| Grade 2 | फ़ाइबर और शौच की आदत सुधारना, फिर rubber band ligation। | दूसरी या तीसरी बार banding। |
| Grade 3, छोटे और कम मस्से | Rubber band ligation, अक्सर दो-तीन बार में। | Open haemorrhoidectomy। |
| Grade 3 बड़े मस्से, grade 4, अंदर-बाहर दोनों, या banding के बाद लौटे मस्से | Open haemorrhoidectomy। | — |
| बाहरी मस्से में जमा खून | जल्दी आएँ और तेज़ दर्द हो तो छोटे चीरे से गाँठ निकालना; देर से आएँ तो गोली और मलहम। | बार-बार हो तभी ऑपरेशन। |
फ़ाइबर और अच्छी आदतें हर इलाज के बाद भी जारी रखनी होती हैं, वरना मस्से जल्दी लौटते हैं।
चमकीले लाल खून का आम कारण बवासीर है, पर अकेला कारण नहीं। पहली मुलाक़ात में यह पक्का किया जाता है कि खून किसी और वजह से तो नहीं आ रहा।
खून फिशर (गुदा चीर), polyp, आँत की सूजन या गाँठ से भी आ सकता है, इसलिए हर मरीज़ की जाँच होती है।
हर मरीज़ का इलाज यहीं से शुरू होता है। Grade 1 और 2 में अक्सर इतना ही काफ़ी होता है।
विज्ञापन देखकर ली गई दवा में महीने न गँवाएँ; खून जारी रहे तो जाँच करवाएँ।
मस्से के ऊपरी हिस्से पर, जहाँ महसूस करने की क्षमता कम है, एक छोटा rubber band लगाया जाता है। मस्सा सूखकर लगभग एक हफ़्ते में गिर जाता है। बेहोशी या भर्ती की ज़रूरत नहीं पड़ती।
आप करवट लेकर लेटते हैं, और Dr Harsh Shah proctoscope से band लगाते हैं। लगाते ही तेज़ दर्द हो, तो band नीचे लगा है और उसे तुरंत ऊपर किया जाता है। एक बार में एक से तीन मस्सों पर band लगता है, ज़रूरत हो तो चार से छह हफ़्ते बाद फिर। दो-तीन बार के बाद भी तकलीफ़ रहे, तो open ऑपरेशन की बात होती है।
फिशर या संक्रमण हो तो पहले उसका इलाज होता है। खून पतला करने की दवा या बेकाबू डायबिटीज़ में plan ज़्यादा सावधानी से बनता है।
Open (Milligan-Morgan) haemorrhoidectomy में मस्से निकाल दिए जाते हैं, और छोटे घाव खुले छोड़कर भरने दिए जाते हैं। इसमें मस्सों के लौटने की संभावना कम है, पर भरने के दौरान दर्द ज़्यादा रहता है।
ऑपरेशन Apollo Hospital, Bhat में, कमर में इंजेक्शन (spinal) देकर या पूरी बेहोशी में होता है। मुख्य मस्से, आमतौर पर तीन तक, निकाले जाते हैं। घावों के बीच त्वचा की पट्टी छोड़ी जाती है, ताकि गुदा सिकुड़ न जाए।
मल रोकने वाली गुदा की गोल मांसपेशी (sphincter) काटी नहीं जाती, ताकि मल और गैस पर नियंत्रण बना रहे। ज़्यादा त्वचा काटने से बेहतर है कि छोटा skin tag रह जाए। ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगली सुबह घर जाते हैं, और मल नरम करने की दवा व दर्द की गोली कम से कम दो हफ़्ते चलती हैं।
बाहरी मस्से में खून जम जाए, तो नीली और छूने पर दुखने वाली गाँठ बनती है। दर्द दो-तीन दिन बढ़ता है, फिर दो से चार हफ़्तों में धीरे-धीरे कम होता है।
लगभग तीन दिन के अंदर दिखाएँ और दर्द तेज़ हो, तो जगह सुन्न करके (local anaesthesia) छोटे चीरे से गाँठ निकाली जा सकती है। इससे दर्द जल्दी कम होता है। सिर्फ़ गाँठ फोड़ने से बचा जाता है, क्योंकि खून फिर जम जाता है।
दर्द पहले से कम हो रहा हो, तो गोली, गुनगुना पानी और मलहम से एक-दो हफ़्ते में आराम आ जाता है।
मस्सा बाहर आकर अंदर न जाए, सूज जाए, बहुत दुखे या काला पड़ने लगे, तो उसी दिन दिखाएँ। यह फँसा हुआ मस्सा है। इसमें तुरंत इलाज, और कभी-कभी ऑपरेशन चाहिए।
Banding के बाद अगले दिन से लगभग सामान्य जीवन। Open ऑपरेशन के बाद पहला हफ़्ता दर्द भरा, फिर लगातार सुधार।
| कब | Rubber band ligation के बाद | Open ऑपरेशन के बाद |
|---|---|---|
| इलाज का दिन | कुछ घंटे भारीपन और हल्का दर्द। तुरंत घर। | Spinal या बेहोशी में ऑपरेशन। पेशाब होने के बाद उसी शाम या अगली सुबह घर। |
| दिन 1–2 | हल्का दर्द और शौच जाने जैसा एहसास। रोज़ का काम जारी, भारी वज़न नहीं। | दर्द, जो गोली और गुनगुने पानी से काबू में रहता है। पहला मल दूसरे-तीसरे दिन। |
| दिन 3–10 | मस्सा और band गिर जाते हैं; पेपर पर थोड़ा खून सामान्य है। | दर्द धीरे-धीरे घटता है। दूसरे हफ़्ते तक ज़्यादातर लोग बैठकर करने वाले काम पर लौट आते हैं। |
| हफ़्ता 4–7 | ज़रूरत हो तो दूसरी बार band। | घाव पूरी तरह भरते हैं; तब तक pad काम आता है। |
| दोबारा दिखाना | चार से छह हफ़्ते पर। | दो हफ़्ते पर, और फिर छह-आठ हफ़्ते पर। |
पहले हफ़्ते मल नरम करने की दवा रोज़ लें और हर शौच के बाद गुनगुने पानी में बैठें। Banding के बाद एक हफ़्ते aspirin जैसी गोलियाँ बिना सलाह न लें; इनसे खून आने की संभावना बढ़ती है।
इनमें से कुछ भी हो तो तुरंत फ़ोन करें या वापस आएँ।
तेज़ दर्द, बुख़ार और पेशाब रुकना साथ हों तो यह दुर्लभ गहरा संक्रमण हो सकता है।
Banding में जोखिम छोटे हैं। Open ऑपरेशन में ज़्यादा हैं, पर ज़्यादातर थोड़े समय के। हर जोखिम सहमति से पहले समझाया जाता है।
Banding के बाद: एक-दो दिन दर्द; band गिरते समय थोड़ा खून, कुछ लोगों में पाँचवें से चौदहवें दिन ज़्यादा खून; पास के मस्से में खून जमना; थोड़े समय पेशाब में दिक़्क़त; बहुत कम मामलों में गहरा संक्रमण; और मस्सों का लौटना।
Open ऑपरेशन के बाद:
कुछ दूसरे सेंटर बवासीर के लिए laser या stapler इस्तेमाल करते हैं। Dr Harsh Shah banding और open ऑपरेशन करते हैं, जो लंबे समय से परखे हुए तरीके हैं।
| विकल्प | Dr Harsh Shah करते हैं? | शुरुआती दर्द | मस्से लौटने की संभावना | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| खान-पान, फ़ाइबर, दवा, गुनगुना पानी | हाँ | नहीं | सिर्फ़ इससे ज़्यादा | हर grade में पहला कदम |
| Rubber band ligation | हाँ | हल्का, एक-दो दिन | मध्यम; दोबारा band से फ़ायदा | Grade 1 से 3 के अंदरूनी मस्से |
| Open haemorrhoidectomy | हाँ | ज़्यादा; एक-दो हफ़्ते | कम | Grade 3 और 4, अंदर-बाहर दोनों मस्से, banding से न सुधरे मस्से |
| Laser या stapler | नहीं। दूसरे सेंटर करते हैं। | Open ऑपरेशन से कम | Open ऑपरेशन से ज़्यादा | कुछ grade 2 और 3 के मस्से |
Dr Shah laser या stapler क्यों नहीं अपनाते? अध्ययन बताते हैं कि इनके बाद मस्से ज़्यादा बार लौटते हैं, और grade 4 या बड़े बाहरी हिस्से वाले मस्सों में ये उतने कारगर नहीं हैं। कम शुरुआती दर्द असली फ़ायदा है, पर बदले में दोबारा इलाज की संभावना बढ़ती है।
अंदाज़ा इलाज पर निर्भर है। Banding OPD में होती है; open ऑपरेशन में थोड़ा अस्पताल में रुकना पड़ता है।
ख़र्च इनसे बदलता है: banding कितनी बार, colonoscopy, बेहोशी का तरीका, एक रात रुकना या नहीं, कमरे का प्रकार और दूसरी बीमारियाँ। Haemorrhoidectomy आमतौर पर insurance में आती है; OPD banding शायद न आए, इसलिए policy देख लें। Apollo Hospital, Bhat cashless सुविधा के साथ काम करता है, और pre-authorisation office संभालता है। साथ लाएँ: report, दवाओं की सूची, insurance card और पहचान-पत्र। सवाल हो तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
नहीं। Grade 1 और 2 के ज़्यादातर मस्से खान-पान, दवा या OPD में banding से काबू में आ जाते हैं। ऑपरेशन ज़्यादातर grade 3 और 4, या banding के बाद बार-बार लौटने वाले मस्सों में होता है।
ज़्यादातर लोगों को एक-दो दिन भारीपन और हल्का दर्द रहता है। Band उस हिस्से पर लगता है जहाँ संवेदना कम है, और लगाते समय तेज़ दर्द हो तो तुरंत हटाया जाता है।
पहला हफ़्ता दर्द भरा होता है, ख़ासकर शौच के समय। बैठकर करने वाले काम पर ज़्यादातर लोग लगभग दो हफ़्ते में लौट आते हैं, और घाव चार से सात हफ़्ते में पूरी तरह भरते हैं।
खून आँत के ऊपरी हिस्से के polyp, सूजन या गाँठ से भी आ सकता है। 40 साल से ऊपर, शौच की आदत में बदलाव, वज़न घटना, खून की कमी या परिवार में आँत की बीमारी हो, तो colonoscopy की सलाह दी जाती है।
हाँ। सिर्फ़ दवा या banding के बाद, open ऑपरेशन की तुलना में मस्से ज़्यादा बार लौटते हैं। फ़ाइबर, पानी और टॉयलेट की अच्छी आदतें उम्र भर रखने से संभावना घटती है। लौटे मस्सों पर फिर band लग सकता है, या उन्हें निकाला जा सकता है।
आमतौर पर plan बनाकर इलाज हो जाता है। कुछ दवाएँ लगभग एक हफ़्ते रोकी जाती हैं, वह भी तभी जब दिल के डॉक्टर हाँ कहें। हाल में stent लगा हो, तो वह दवा बवासीर के लिए कभी नहीं रोकी जाती; दूसरा रास्ता चुना जाता है।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, Ahmedabad
SF-203, 2nd Floor, Olive Greens, Gota, Ahmedabad.
Consultation, बवासीर की जाँच और grade, rubber band ligation, और दोबारा दिखाना।
Google: Dr Harsh Shah · 216 reviews में 4.89
Gota clinic का रास्ता · +91-63555-64601
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar.
Open haemorrhoidectomy, और फँसे या खून देते मस्सों का emergency इलाज।
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 18 reviews में 4.94
Apollo, Bhat का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601
गांधीनगर, मेहसाणा, नडियाद, आणंद, राजकोट, कच्छ समेत पूरे गुजरात से और दक्षिण राजस्थान से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।
शौच में खून, बाहर निकलता मस्सा, या अचानक दर्द वाली गाँठ? Colonoscopy और खून की report WhatsApp पर पहले भेज सकते हैं, ताकि consultation में वे पढ़ी जा चुकी हों। इलाज जाँच के बाद ही तय होता है। थक्कों के साथ बहुत खून आए, या बुख़ार के साथ दर्द हो और पेशाब न उतरे, तो आज ही नज़दीकी emergency विभाग जाएँ। फ़ोन करें +91-63555-64601 · Reports WhatsApp पर भेजें
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