Skip to main contentGastroclinix · Dr Harsh Shah · अहमदाबाद और गांधीनगर
पिछला सुधार: 18-Oct-2026
मलद्वार में कट, यानी anal fissure, का इलाज Dr Harsh Shah के पास · Gota OPD, Gota, Ahmedabad · Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर
ज़्यादातर फिशर बिना ऑपरेशन के भर जाते हैं। Dr Harsh Shah पहले मल नरम करने की दवा, रेशे वाला खाना, गुनगुने पानी की सिकाई (sitz bath) और diltiazem या GTN मरहम छह से आठ हफ़्ते देते हैं।
पुराना फिशर पूरा कोर्स करने के बाद भी न भरे, तो lateral internal sphincterotomy (LIS) का छोटा ऑपरेशन होता है। इसमें कसी हुई मांसपेशी ढीली की जाती है, ताकि कट भर सके। उसी दिन घर जा सकते हैं।
कट बीच की लाइन से हटकर हो, एक से ज़्यादा हों, या अलग दिखे, तो ऑपरेशन सोचने से पहले दूसरी वजहें जाँची जाती हैं।
इलाज दो चरणों में होता है। पहले छह से आठ हफ़्ते दवा और शौच की देखभाल। ऑपरेशन सिर्फ़ उस पुराने फिशर के लिए, जो पूरे और सही कोर्स के बाद भी न भरा हो।
Dr Harsh Shah को पेट, आँत और गुदा की surgery में 18 साल का अनुभव है। फिशर की जाँच और ज़रूरत हो तो sphincterotomy, दोनों वे ख़ुद करते हैं।
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
GI & Proctology Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad
Gota clinic पर 216 Google reviews में 4.89, और Apollo, Bhat पर 18 reviews में 4.94 rating.
| आपका फिशर | इलाज | दोबारा कब दिखाना है |
|---|---|---|
| नया कट, बीच की लाइन में | रेशा, पानी, मल नरम करने की दवा और गुनगुने पानी की सिकाई। अक्सर diltiazem या GTN मरहम भी। | छह से आठ हफ़्ते बाद |
| पुराना कट, बीच की लाइन में | वही देखभाल, साथ में diltiazem या GTN मरहम, रोज़ दिन में दो बार। | छह से आठ हफ़्ते बाद |
| पूरे कोर्स के बाद भी न भरा पुराना कट | Lateral internal sphincterotomy (LIS), उसी दिन घर। | घाव देखने दो हफ़्ते पर, भराव देखने छह से आठ हफ़्ते पर |
| किनारे पर कट, एक से ज़्यादा कट, या अलग तरह का दिखना | पहले जाँच, अक्सर बेहोशी में जाँच और छोटा टुकड़ा (biopsy)। | Report आने के बाद आगे तय होता है |
घर की देखभाल हमारे फिशर वाले लेख में है।
फिशर यानी मलद्वार की चमड़ी में छोटा-सा कट। शौच के समय और बाद में चीरने जैसा तेज़ दर्द होता है, और मल या टिशू पेपर पर ताज़े खून की लकीर दिखती है।
दर्द के डर से लोग शौच रोकते हैं, मल और सख़्त होता है, और कट फिर फटता है। बवासीर (piles) में ज़्यादातर बिना ख़ास दर्द के खून आता है, या मस्सा बाहर आता है। कुछ लोगों को दोनों साथ होते हैं।
मलद्वार से खून आए तो जाँच ज़रूर कराएँ, भले ही फिशर दिख रहा हो। 45 से ऊपर की उम्र या शौच की आदत बदली हो, तो Dr Shah colonoscopy की सलाह देते हैं। बवासीर का अलग पेज है: बवासीर (piles) का इलाज।
नया फिशर ताज़ा और उथला कट होता है, जो ज़्यादातर मल नरम रखने से भर जाता है। छह से आठ हफ़्ते से पुराना या बार-बार होने वाला फिशर पुराना माना जाता है, और उसमें मांसपेशी ढीली करनी पड़ती है।
| सवाल | नया फिशर | पुराना फिशर |
|---|---|---|
| कितना समय | लगभग छह हफ़्ते से कम | छह से आठ हफ़्ते से ज़्यादा, या बार-बार लौटे |
| कैसा दिखता है | साफ़, उथला कट | गहरा कट, किनारे सख़्त और उभरे हुए |
| किनारे पर मस्से जैसी चमड़ी | अक्सर नहीं | अक्सर बाहर छोटी चमड़ी (sentinel tag), और अंदर छोटी गाँठ |
| मांसपेशी | दर्द से कस सकती है | हर समय कसी रहती है, इसलिए कट तक खून कम पहुँचता है |
| पहला क़दम | रेशा, पानी, मल नरम करने की दवा, सिकाई | वही, साथ में मांसपेशी ढीली करने वाला मरहम |
फिशर अटक क्यों जाता है? अंदर की गोल मांसपेशी, internal sphincter, दर्द से ऐंठकर कट तक ख़ून कम पहुँचने देती है, इसलिए कट नहीं भरता। पुराने फिशर का हर इलाज इसी मांसपेशी को ढीला करता है।
हल्की जाँच में Dr Shah चार निशान देखते हैं। इनमें से एक भी हो, तो फिशर पुराना है और सिर्फ़ शौच की देखभाल से ज़्यादा इलाज चाहिए।
जाँच सिर्फ़ कूल्हों को धीरे से अलग करके देखने से होती है; दर्द देने वाली अंदरूनी जाँच ज़रूरी नहीं।
आम फिशर मलद्वार की बीच वाली लाइन में, पीछे या आगे होता है। कट किनारे पर हो, या एक से ज़्यादा हों, तो सादा फिशर मानने से पहले दूसरी वजह जाँची जाती है।
| संभावित वजह | शक कब होता है | जाँच कैसे |
|---|---|---|
| Crohn’s disease | एक से ज़्यादा कट, सूजी हुई चमड़ी, दस्त, वज़न घटना | Biopsy, colonoscopy, कभी-कभी MRI |
| TB (टीबी) | धीरे-धीरे फैलता, न भरने वाला घाव; हमारे यहाँ आम | टुकड़ा TB की जाँच के लिए भेजा जाता है |
| संक्रमण, यौन संबंध से फैलने वाले संक्रमण समेत | अलग तरह का घाव, कभी-कभी कम दर्द के साथ | ख़ून की जाँच और swab |
| दूसरी दुर्लभ वजहें | सख़्त, टेढ़े-मेढ़े किनारे, या सही इलाज पर भी न भरने वाला घाव | बेहोशी में जाँच और biopsy |
ऐसी बीमारियों में मांसपेशी काटने से नुक़सान हो सकता है, इसलिए Dr Shah पहले पक्का करते हैं कि फिशर सादा ही है।
ज़्यादातर फिशर में पहला plan है: नरम मल, गुनगुने पानी की सिकाई और मांसपेशी ढीली करने वाला मरहम। छह से आठ हफ़्ते का पूरा कोर्स बहुत-से फिशर बिना ऑपरेशन भर देता है।
एक surgeon के तौर पर कहूँ तो, मरहम “काम नहीं कर रहा” लगने की आम वजह है उसे जल्दी बंद कर देना। दो हफ़्ते में बंद किया GTN पूरा कोर्स नहीं है।
एक सीधी बात याद रखें: कट भरना मरहम का काम है, पर कट दोबारा न फटे यह नरम मल का काम है। दोनों में से एक भी छूटा तो इलाज अधूरा रहेगा।
दवा का पूरा और सही कोर्स करने के बाद भी पुराना फिशर न भरे, या बार-बार लौटे, और शौच पर नियंत्रण सुरक्षित हो, तब LIS की सलाह दी जाती है।
बड़े अध्ययन बताते हैं कि सिर्फ़ मरहम से ज़्यादा फिशर इस ऑपरेशन से भरते हैं और कम लौटते हैं। फिर भी Dr Shah दवा को पूरा मौक़ा देने के बाद ही इसकी सलाह देते हैं।
पहले वे पूछते हैं: गैस या मल पर पकड़ कभी कम हुई? कितनी डिलीवरी हुईं? मलद्वार का कोई ऑपरेशन? बार-बार दस्त? इन जवाबों और जाँच से तय होता है कि मांसपेशी कितनी काटना सुरक्षित है, या काटनी ही नहीं।
ऑपरेशन लगभग पंद्रह से बीस मिनट का है। कसी हुई अंदरूनी मांसपेशी का छोटा हिस्सा मलद्वार के किनारे, कट से दूर, काटा जाता है। मांसपेशी ढीली होती है तो कट भर सकता है।
महिलाओं में और कमज़ोर मांसपेशी वालों में कट और छोटा रखा जाता है।
बहुत लोगों को कुछ ही दिनों में पुराना चीरने वाला दर्द कम लगने लगता है। शुरू के कुछ दिन घाव पर दर्द रहता है, जो गोली, सिकाई और मल नरम करने की दवा से काबू में रहता है।
| कब | क्या होता है |
|---|---|
| ऑपरेशन का दिन | पेशाब हो जाने पर शाम को घर। दर्द की गोली समय पर। सामान्य खाना। |
| पहले से तीसरे दिन | छोटे कट पर दर्द, पर गहरा चीरने वाला दर्द अक्सर कम। हर शौच के बाद सिकाई। पेपर पर थोड़ा खून आम है। |
| चौथे से सातवें दिन | दर्द और घटता है। बैठकर काम करने वाले ज़्यादातर लोग काम पर लौटते हैं। |
| दूसरा हफ़्ता | Clinic में घाव की जाँच। चलना, गाड़ी चलाना और हल्का काम ठीक है। |
| छह से आठ हफ़्ते पर | भराव और पकड़ की जाँच। कसरत धीरे-धीरे शुरू। |
इनमें से कुछ भी हो तो तुरंत वापस आएँ, या नज़दीकी emergency विभाग जाएँ।
LIS छोटा ऑपरेशन है, पर इसमें गैस और मल रोकने में मदद करने वाली मांसपेशी का हिस्सा कटता है। समझने वाला मुख्य जोखिम इसी पकड़ में बदलाव है।
गैस और मल पर पकड़. कुछ लोगों को गैस पर पकड़ कम लगती है या अंडरवियर पर हल्का दाग़ लगता है, ज़्यादातर हल्का और हफ़्तों-महीनों में सुधरने वाला। सख़्त मल पर पकड़ जाना दुर्लभ है। छोटा हिस्सा काटने से जोखिम कम रहता है।
किसे ज़्यादा जोखिम. डिलीवरी के बाद महिलाएँ, बुज़ुर्ग, पहले मलद्वार का ऑपरेशन, आगे की तरफ़ फिशर, या बार-बार दस्त। इनके लिए Dr Shah दवा लंबी देते हैं, बहुत छोटा नापा हुआ कट रखते हैं, या मांसपेशी बचाने वाले इलाज के लिए दूसरी जगह भेजते हैं।
दूसरे जोखिम: खून आना या चमड़ी के नीचे छोटा थक्का, कट पर संक्रमण या छोटा फोड़ा, फिशर का न भरना (तब दूसरी वजह के लिए फिर जाँच), और कब्ज़ रहे तो फिशर का लौटना। बेहोशी के सामान्य जोखिम भी लागू होते हैं। Dr Harsh Shah consent से पहले आमने-सामने हर बात समझाते हैं।
कुछ सेंटर Botox injection, fissurectomy या चमड़ी का flap करते हैं। Dr Shah ये इलाज नहीं करते। वे दवा और LIS करते हैं, और दूसरा इलाज बेहतर बैठे तो दूसरी जगह भेजते हैं।
| इलाज | क्या है | किसके लिए | Dr Shah के पास? |
|---|---|---|---|
| शौच की देखभाल और मरहम (diltiazem या GTN) | बिना काटे मांसपेशी ढीली करता है | लगभग सबके लिए, पहले क़दम के तौर पर | हाँ |
| Lateral internal sphincterotomy | अंदरूनी मांसपेशी का छोटा हिस्सा काटता है | दवा से न भरा पुराना फिशर, जब पकड़ सुरक्षित हो | हाँ |
| Botox injection | कुछ महीने मांसपेशी ढीली रखता है, फिर असर चला जाता है | पकड़ का ज़्यादा जोखिम वाले कुछ लोग | नहीं; असर उतरने पर फिशर लौट सकता है |
| Fissurectomy या चमड़ी का flap | मांसपेशी काटे बिना कट के किनारे निकालना, या स्वस्थ चमड़ी कट पर लाना | चुने हुए, ज़्यादा जोखिम वाले लोग | नहीं |
| मलद्वार ज़ोर से खींचकर फैलाना (stretching) | हाथ से मांसपेशी खींचना | अब surgeons इसकी सलाह नहीं देते, पकड़ की दिक्कत ज़्यादा होती है | नहीं |
दवा वाले इलाज में सिर्फ़ consultation और दवाओं का ख़र्च होता है। Sphincterotomy का अंदाज़ा बेहोशी के तरीक़े, उसी दिन घर जाने या न जाने, और पहले ज़रूरी जाँचों पर निर्भर करता है।
Apollo Hospital, Bhat में बड़ी insurance कंपनियों के साथ cashless सुविधा है, और pre-authorisation office संभालता है। साथ लाएँ: पुराने पर्चे और report, चल रही दवाओं की सूची, insurance card और पहचान पत्र।
बहुत-से फिशर दवा से ही भर जाते हैं। ज़्यादातर नए कट नरम मल और सिकाई से भरते हैं, और कई पुराने कट भी diltiazem या GTN मरहम के छह से आठ हफ़्ते के सही कोर्स से भर जाते हैं।
छह से आठ हफ़्ते, रोज़ दिन में दो बार। एक-दो हफ़्ते में बंद कर देना पूरा कोर्स नहीं है। कोर्स के आख़िर में Dr Shah फिशर दोबारा देखते हैं, तभी ऑपरेशन की बात होती है।
GTN से सिरदर्द आम है, ख़ासकर पहले हफ़्ते में। मरहम ख़ुद से बंद न करें; Dr Shah को बताएँ। वे इसे संभालने का तरीक़ा बताएँगे, या diltiazem मरहम पर बदल देंगे, जिसमें सिरदर्द कम होता है।
कुछ लोगों को गैस पर पकड़ कम लगती है या हल्का दाग़ लगता है, ज़्यादातर कुछ हफ़्तों से महीनों तक। सख़्त मल पर पकड़ जाना दुर्लभ है। मांसपेशी का छोटा हिस्सा ही काटने से जोखिम कम रहता है, और Dr Shah ऑपरेशन से पहले आपका जोखिम जाँचते हैं।
डिलीवरी से मांसपेशी बिना पता चले कमज़ोर हो सकती है। Dr Shah डिलीवरी के बारे में पूछते हैं और मांसपेशी की ताक़त जाँचते हैं। वे दवा लंबी दे सकते हैं, कट बहुत छोटा रख सकते हैं, या मांसपेशी न काटनी पड़े ऐसे इलाज के लिए दूसरी जगह भेज सकते हैं।
हो सकता है, ज़्यादातर तब जब कब्ज़ लौट आए। दवा के बाद भी और ऑपरेशन के बाद भी रेशा, पानी और ज़ोर न लगाने की आदत उम्र भर रखनी है।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, Ahmedabad
SF-203, 2nd Floor, Olive Greens, Gota, Ahmedabad.
Consultation, फिशर की जाँच, दवा का plan और दोबारा दिखाना।
Google: Dr Harsh Shah · 216 reviews में 4.89
Gota clinic का रास्ता · +91-63555-64601
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar.
उसी दिन घर जाने वाला sphincterotomy, और बेहोशी में जाँच।
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 18 reviews में 4.94
Apollo, Bhat का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601
गांधीनगर, मेहसाणा, नडियाद, आणंद, राजकोट, कच्छ समेत पूरे गुजरात से और दक्षिण राजस्थान से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।
हफ़्तों से हर बार शौच के समय चीरने जैसा दर्द और खून? पुराने पर्चे और report WhatsApp पर पहले भेज सकते हैं। बहुत ज़्यादा खून आए, मलद्वार के पास दर्द वाली सूजन के साथ बुख़ार हो, या पेशाब न उतरे, तो आज ही नज़दीकी emergency विभाग जाएँ। फ़ोन करें +91-63555-64601 · Report WhatsApp पर भेजें
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