Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 वर्ष का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89 from 216 reviews (Gota clinic) · 4.94 from 18 reviews (Apollo, Bhat)
संक्षेप में
पेट के परदे पर, जिगर में या आमाशय से दूर की लसीका गाँठों में कैंसर मिले, तब उसे फैल चुका कैंसर कहा जाता है.
ऐसी स्थिति में मुख्य इलाज दवा है. आमाशय निकाल देने से बाहर बैठा कैंसर वहीं रह जाता है, और यह सवाल एक अध्ययन में सीधे जाँचा गया है.
कौन-सी दवा चलेगी, यह biopsy के चार marker तय करते हैं: HER2, PD-L1, मरम्मत के marker MMR और MSI, और Claudin-18.2.
खून बहता हो, आमाशय का मुँह बंद हो गया हो या दीवार में छेद हो, तब ऑपरेशन होता है. वह तकलीफ़ का इलाज है, कैंसर का नहीं.
फैला हुआ कैंसर पेट के कैंसर का एक चरण है। staging से लेकर, कैंसर न फैला हो तब होने वाले ऑपरेशन तक की पूरी जानकारी पेट के कैंसर का इलाज, अहमदाबाद (English) वाले पेज पर है।
फैल चुका कैंसर यानी कैंसर ऐसी जगह बैठ चुका है जहाँ आमाशय का ऑपरेशन पहुँचता ही नहीं. ऐसी जगहें गिनी-चुनी हैं, और हर जगह अपनी अलग तरह से सामने आती है.
| फैलाव कहाँ | क्या दिखाई देता है |
|---|---|
| पेट का परदा | पेट में पानी भरना, आँत का बंद होना, या किसी भी scan में न दिखने वाले छोटे दाने |
| जिगर | Ultrasound या CT में एक या कई गाँठें |
| आमाशय से दूर की लसीका गाँठें | हँसली की हड्डी के ऊपर हाथ में आने वाली गाँठ, या scan में पेट के पीछे गहराई में गाँठें |
| अंडाशय | महिला में एक या दोनों अंडाशय में गाँठ, जो कभी-कभी आमाशय की गाँठ से पहले पकड़ी जाती है |
| फेफड़ा या हड्डी | कम होता है, और आम तौर पर किसी नई तकलीफ़ के लिए कराए गए scan में निकलता है |
जगह मायने रखती है, क्योंकि पेट के परदे का फैलाव जिगर की गाँठ से अलग तरह से चलता है. वह किसी तस्वीर में दिखने से बहुत पहले ही खाने और आँत की तकलीफ़ खड़ी कर देता है.
पाँच क़दम इसे तय करते हैं. क्रम सोच-समझकर रखा गया है. आख़िरी दो क़दम ही अक्सर पूरी योजना बदल देते हैं.
नमक के पानी में कैंसर की कोशिका मिले तो वह फैलाव ही गिना जाता है, चाहे हर scan साफ़ दिखा हो. यही एक बात इलाज को ऑपरेशन से हटाकर दवा की ओर ले जाती है.
कैंसर आमाशय के बाहर बैठ जाने के बाद आमाशय निकाल देने से बाहर का कैंसर जहाँ है वहीं रह जाता है. यह बात मान नहीं ली गई, जाँची गई है. जिन मरीज़ों में एक ऐसी जगह थी जिसे निकाला नहीं जा सकता था, उन्हें या तो अकेली दवा दी गई, या पहले आमाशय निकालकर फिर दवा. जिनका ऑपरेशन हुआ उन्हें ज़्यादा फ़ायदा नहीं मिला, और दवा उन्हें दूसरे समूह से आधी से भी कम मिल पाई.
इसलिए यहाँ कैंसर निकालने वाला ऑपरेशन पहला इलाज नहीं है. दवा जो कर सकती है वह यह है: बीमारी को क़ाबू में रखना, तकलीफ़ शांत करना, और रोज़मर्रा की ज़िंदगी चलती रहे ऐसे महीने देना. यह मक़सद पहले cycle से पहले ही साफ़ शब्दों में कह दिया जाता है, बाद में समझ लेने के लिए नहीं छोड़ा जाता.
इस निदान वाले हर मरीज़ की दवा एक जैसी नहीं होती. Biopsy के ऊतक पर की गई चार जाँचें यह तय करती हैं, और शुरुआत में ही चारों माँगी जाती हैं.
| Marker | वह क्या है, और क्या बदलता है |
|---|---|
| HER2 | कुछ आमाशय के कैंसर की सतह पर बैठा प्रोटीन. यह मौजूद हो तो chemotherapy के साथ उसी प्रोटीन को निशाना बनाने वाली दवा जोड़ी जाती है. |
| PD-L1 | शरीर की अपनी रक्षा प्रणाली को कैंसर कितना दिखता है, उसका अंक. अंक ऊँचा हो तो chemotherapy के साथ immunotherapy जोड़ी जाती है. |
| MMR और MSI | कैंसर की कोशिका के भीतर मरम्मत की व्यवस्था में ख़राबी. ऐसी ख़राबी वाला कैंसर immunotherapy को असामान्य रूप से अच्छा जवाब देता है. |
| Claudin-18.2 | आमाशय के एक समूह के कैंसर पर मिलने वाला प्रोटीन. यह मौजूद हो और HER2 न हो, तब उसे निशाना बनाने वाली दवा जोड़ी जाती है. |
एक ही गाँठ के भीतर HER2 छिटका हुआ रहता है, इसलिए endoscopy के समय एक के बजाय कई टुकड़े लिए जाते हैं. बीमारी बदलने के साथ यह खो भी सकता है, इसीलिए पहली दवा का असर रुकने पर कभी-कभी नई biopsy माँगी जाती है.
चारों में से कोई न मिले तो अकेली chemotherapy चलाई जाती है. एक और marker अध्ययन में है, और gene panel में वह लिखा आने लगा है.
यहाँ भी ऑपरेशन की साफ़ जगह है. तीन तकलीफ़ों के लिए वह किया जाता है, और हर बार निशाना तकलीफ़ होती है, कैंसर नहीं.
जो दर्द दवाओं से शांत न हो, उसे आमाशय के पीछे बैठे तंत्रिकाओं के गुच्छे को सुन्न करके भी कम किया जाता है. यह scan की निगरानी में सुई से होने वाला काम है, ऑपरेशन नहीं.
आमाशय का मुँह बंद हो जाने पर खाना आगे पहुँचाने के तीन रास्ते हैं. चुनाव दो बातों पर टिकता है: कितने समय के लिए ज़रूरत होगी, और anaesthesia का जोखिम वाजिब है या नहीं.
| क्या किया जाता है | किसे ठीक बैठता है |
|---|---|
| Endoscopy के रास्ते stent लगाना | बिना चीरे का तेज़ हल. एक-दो दिन में निगलना फिर से शुरू हो जाता है. कमज़ोर मरीज़ को, या जिसके इलाज का समय सीमित हो, उसे ठीक बैठता है. |
| आमाशय और छोटी आँत के बीच bypass जोड़ | ऑपरेशन झेल सकने वाले मरीज़ को, जिसे कई महीनों तक खाते रहना है, टिकाऊ हल देता है. |
| छोटी आँत में खाने की नली | Chemotherapy चलने तक पोषण बनाए रखती है. मुँह से खाना यह वापस नहीं देती, इसलिए ऊपर के किसी एक रास्ते के साथ या अकेली इस्तेमाल होती है. |
इस बीमारी में पोषण किनारे की बात नहीं है. तय किया गया chemotherapy का cycle टलने का एक आम कारण वज़न का घटना है.
परदे के फैलाव की बात अलग से करनी पड़ती है, क्योंकि उसकी जगह कोई समझाए उससे पहले ही मरीज़ को गरम chemotherapy के बारे में बता दिया गया होता है.
मुख्य इलाज यहाँ भी शिरा में दी जाने वाली दवा ही है. दो और रास्ते हैं. आम इलाज के साथ-साथ पेट के भीतर ही एक छोटे port के रास्ते chemotherapy दी जा सकती है, इसे अध्ययनों में परखा गया है. ऑपरेशन के आख़िर में पेट के भीतर गरम chemotherapy घुमाना, जिसे HIPEC कहते हैं, बिलकुल अलग समूह की बात है. वह उन मरीज़ों के लिए है जिनके दाने गिने-चुने हों और सब निकाले जा सकते हों, और वह परदे की बीमारी का कार्यक्रम चलाने वाले केंद्र में ही होता है. फैल चुके आमाशय के कैंसर के आम इलाज का वह हिस्सा नहीं है, और उसे ख़ुद ढूँढकर माँगने की चीज़ नहीं है.
गिने-चुने चुने हुए मरीज़ों में दिशा बदलती है. जिनमें ऑपरेशन के रास्ते की एकमात्र अड़चन नमक के पानी में मिली कोशिकाएँ थीं, या किसी एक अंग में अकेली गाँठ थी, उन्हें कई महीनों की दवा के बाद दोबारा देखा जाता है.
यह रास्ता शुरू से ही medical oncologist के साथ बैठकर बनाया जाता है, बाद में तय नहीं होता. यह आम रास्ता नहीं है, और पहली मुलाक़ात में इसका वादा नहीं किया जाता.
तकलीफ़ का इलाज दवा के साथ पहले हफ़्ते से चलता है, दवा का असर रुकने के बाद नहीं. पाँच बातें बार-बार सामने आती हैं.
| क्या परेशान करता है | क्या किया जाता है |
|---|---|
| दर्द | घड़ी के हिसाब से नियमित दवाएँ, और दर्द बना रहे तो आमाशय के पीछे की तंत्रिकाओं को सुन्न करना |
| पेट में पानी | पानी निकालना, और जल्दी फिर भर जाए तो छोटी नली लगाकर रखना |
| खाना बंद हो जाना | Stent, bypass या खाने की नली, साथ में आहार विशेषज्ञ की योजना |
| थकान और खून की कमी | हर cycle से पहले जाँच, और ज़रूरत पड़ने पर लोहतत्व या खून चढ़ाना |
| आगे क्या होगा, इसका डर | राहत की देखभाल वाली टीम शुरू में ही, और मक़सद पर सच्ची बातचीत |
उस टीम को इलाज चलते समय ही साथ लेने से तकलीफ़ बेहतर क़ाबू में रहती है, और आपात स्थिति में भर्ती होना कम पड़ता है.
| सवाल | क्यों ज़रूरी है |
|---|---|
| मेरी biopsy में चारों marker लिखे गए हैं? | दवा वही तय करते हैं, और एक छूट जाए तो चुनाव बिना वजह सिमट जाता है. |
| दूरबीन से देखकर नमक के पानी की जाँच हुई है? | परदे पर बैठे दाने यही जाँच पकड़ती है, और यह योजना बदल देती है. |
| इस इलाज का मक़सद साफ़ शब्दों में क्या है? | वह पहले cycle से पहले बताया जाना चाहिए, बाद में अंदाज़ा लगाने के लिए नहीं. |
| खाना बंद हो जाए या दर्द बढ़ जाए तो किसे फ़ोन करूँ? | तय रास्ता हो तो रात में आपात भर्ती से बचा जा सकता है. |
है, पर कैंसर के लिए नहीं, तकलीफ़ के लिए: न रुकने वाला खून, बंद हो चुका आमाशय का मुँह, या दीवार में छेद. आमाशय निकाल देने से बाहर बैठे दानों का इलाज नहीं होता.
दवा वही marker तय करते हैं, और वे गाँठ के ऊतक पर ही पढ़े जा सकते हैं. HER2 ख़ास तौर पर छिटका हुआ रहता है, इसलिए कई टुकड़े लिए जाते हैं, और पहली दवा का असर रुकने पर उसे दोबारा जाँचा जाता है.
पेट के भीतर गरम chemotherapy गिने-चुने चुने हुए मरीज़ों के लिए है, जिनके दाने थोड़े हों और सब निकाले जा सकते हों, और वह परदे की बीमारी का कार्यक्रम चलाने वाले केंद्र में ही होती है. फैल चुके आमाशय के कैंसर के आम इलाज का वह हिस्सा नहीं है.
Endoscopy के रास्ते लगाया गया stent आम तौर पर एक-दो दिन में निगलना वापस दे देता है. Anaesthesia का जोखिम वाजिब हो और कई महीनों तक खाना ज़रूरी हो, तो bypass जोड़ ज़्यादा टिकता है.
गिने-चुने चुने हुए मरीज़ों में हाँ. इसके लिए नया scan, दूरबीन से दूसरी जाँच के साथ साफ़ नमक का पानी, और जो दिख रहा है वह सब निकाला जा सकने लायक होना चाहिए. यह शुरू से बनाया जाता है, अचानक नहीं दिया जाता.
आमाशय के कैंसर का पूरा इलाज stomach cancer treatment पन्ने पर है (English में). सफ़र से पहले कोई सवाल हो तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें.
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
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Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. दूरबीन से जाँच, stent लगाना, bypass और खाने की नली, और भर्ती मरीज़ की देखभाल.
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