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Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89, 216 reviews (Gota clinic) · 4.94, 18 reviews (Apollo, Bhat)
संक्षेप में
पेट के कैंसर की पुष्टि endoscopy और कई biopsy से होती है। फिर scan और ज़रूरत हो तो laparoscopy से देखा जाता है कि गाँठ कहाँ तक फैली है।
छाती, पेट और pelvis का CT scan हर मरीज़ के लिए है। EUS और PET-CT सिर्फ़ कुछ चुने हुए मरीज़ों में होते हैं।
पेट के परदे पर छोटे दाने CT में अक्सर नहीं दिखते। Staging laparoscopy और नमकीन पानी की जाँच इन्हें बड़े ऑपरेशन से पहले पकड़ लेती है।
घर वाले अक्सर पूछते हैं — biopsy में कैंसर आ गया, अब इतनी जाँचें क्यों? जवाब सीधा है। इलाज इस पर टिका है कि गाँठ कहाँ है, कितनी गहरी है और कहाँ तक फैली है। पर उससे पहले यह जानना ज़रूरी है कि endoscopy तक लोग पहुँचते कैसे हैं। नीचे के लक्षण कैंसर का सबूत नहीं हैं, पर endoscopy की वजह ज़रूर हैं।
| मरीज़ को क्या महसूस होता है | इसका मतलब क्या हो सकता है |
|---|---|
| वज़न घटना, भूख न लगना, थोड़ा खाते ही पेट भर जाना। | आमाशय (stomach) में कहीं भी गाँठ। आमाशय सख़्त और छोटा हो जाए तो पूरा खाना खाया ही नहीं जाता। |
| 45 साल के बाद ऊपरी पेट में दर्द या अपच, जो acid की दवा से भी शांत न हो। | गाँठ या छाला, जिसकी biopsy ज़रूरी है। |
| खून की कमी से थकान, या काला मल। | गाँठ से धीरे-धीरे खून रिसना। |
| खाना गले से नीचे उतरते समय अटकना। | आमाशय के ऊपरी हिस्से में, भोजन नली के पास गाँठ। |
| खाने के बाद उल्टी। | निचले हिस्से में गाँठ, जो आमाशय का मुँह बंद कर दे। |
| बाईं हँसली के ऊपर सख़्त गाँठ, या नाभि के पास गठान। | देर से हुआ फैलाव। आगे की जाँच बताती है कि यह कहाँ तक है। |
OPD में अक्सर दिखता है कि लोग महीनों तक acid की गोली खाते रहते हैं। इसीलिए हमारे यहाँ पेट का कैंसर अक्सर बड़ा होने के बाद पकड़ में आता है। आगे की जाँचें फैलाव को इतनी बारीकी से इसी वजह से खोजती हैं।
पहली endoscopy में गाँठ ठीक कहाँ है, यह नापकर लिखा जाता है। इसी दूरी से बाद में तय होता है कि आमाशय का एक हिस्सा निकलेगा या पूरा आमाशय।
मुँह से camera वाली पतली नली आमाशय में जाती है। ऊपर के गुंबद से आमाशय के मुँह तक, और आँत के पहले हिस्से तक, सब कुछ देखा जाता है। ख़ास रोशनी से गाँठ के किनारे साफ़ दिखते हैं।
गाँठ के अलग-अलग हिस्सों से और उसके तले से कई टुकड़े लिए जाते हैं। आमाशय के बाकी हिस्सों से भी कुछ टुकड़े लिए जाते हैं, ताकि आसपास की परत की हालत पता चले। रिपोर्ट में गाँठ का आकार लिखा जाता है। दाँतों से, भोजन नली के जोड़ से और आमाशय के मुँह से उसकी दूरी भी लिखी जाती है। तस्वीरें सँभालकर रखी जाती हैं।
दो हालात में ज़्यादा ध्यान चाहिए:
ऑपरेशन से पहले, ऑपरेशन करने वाले surgeon ख़ुद endoscopy दोहराते हैं। इससे गाँठ की जगह पक्की होती है। कटाई के किनारे के लिए स्याही का छोटा निशान भी लगाया जा सकता है।
Pathologist पहले कैंसर का प्रकार तय करते हैं। पेट के ज़्यादातर कैंसर adenocarcinoma होते हैं। रिपोर्ट में यह भी लिखा जाता है कि यह intestinal type है या diffuse type। Signet-ring कैंसर diffuse समूह में आता है।
फिर उसी टुकड़े पर दवा चुनने वाले marker जाँचे जाते हैं। ये हैं HER2, PD-L1, MMR (MSI) और Claudin-18.2। कैंसर फैल चुका हो तो बड़ा gene test भी जोड़ा जाता है।
छाती, पेट और pelvis का contrast CT हर मरीज़ में होता है। इसमें गाँठ, आसपास की लसीका गाँठें, और liver, फेफड़ों या परदे पर फैलाव दिखता है।
Scan से ठीक पहले पानी पिलाया जाता है, ताकि आमाशय फूल जाए। Injection से dye दी जाती है, और दो चरणों में तस्वीरें ली जाती हैं। Radiologist गाँठ, पास की और दूर की लसीका गाँठें, liver, फेफड़े, हड्डियाँ और पेट का परदा देखते हैं। महिलाओं में अंडाशय भी देखे जाते हैं, क्योंकि पेट का कैंसर वहाँ पहुँच सकता है।
CT की भी सीमाएँ हैं। परदे पर बहुत छोटे दाने अक्सर नहीं दिखते। अंडाशय का छोटा फैलाव छूट सकता है। Linitis plastica में आमाशय ठीक से न फूले, तो गाँठ असल से कम गहरी लगती है।
| जाँच | किसे | क्या बताती है |
|---|---|---|
| EUS (endoscopic ultrasound) | बहुत शुरुआती गाँठ। भोजन नली के जोड़ पर गाँठ। छिपे हुए linitis plastica का शक। | गाँठ दीवार में कितनी गहरी है, और पास की गाँठें शामिल लगती हैं या नहीं। शक वाली गाँठ से सुई से नमूना लिया जा सकता है। बहुत गहरी गाँठ में कम भरोसेमंद। |
| PET-CT | चुने हुए मरीज़, ज़्यादातर intestinal type वाले। जिनके CT में दूर कोई शक वाला धब्बा हो। | दूर की गाँठों या हड्डियों में फैलाव। Diffuse और signet-ring कैंसर में कम काम का। लंबी chemotherapy के दौरान गाँठ बढ़ रही है या नहीं, यह भी देखा जा सकता है। |
| Tumour marker (CEA, CA 19-9, CA 72-4) | अक्सर शुरुआत में। | इनसे कैंसर का निदान नहीं होता। शुरुआत में बढ़े हों तो बाद में तुलना के काम आते हैं। सामान्य आएँ तब भी यह नहीं कह सकते कि फैलाव नहीं है। |
बहुत शुरुआती गाँठ में EUS एक बड़ा सवाल सुलझाता है। कैंसर सिर्फ़ अंदर की परत में हो, तो endoscopy से ही निकाला जा सकता है। उसके नीचे की परत तक पहुँचा हो, तो आम तौर पर ऑपरेशन चाहिए।
परदे पर छोटे दाने CT में छिप जाते हैं। Keyhole से अंदर देखकर और नमकीन पानी से धोकर जाँचने पर, ये बड़े ऑपरेशन से पहले पकड़ में आ जाते हैं।
तीन छोटे चीरों से camera अंदर जाता है। पेट की दीवार, चर्बी का परदा, आँतें, आमाशय के पीछे की जगह और liver की सतह ध्यान से देखी जाती है। महिलाओं में अंडाशय भी देखे जाते हैं। ऊपरी पेट और pelvis में गुनगुना नमकीन पानी घुमाकर, उसे कैंसर कोशिकाएँ खोजने के लिए laboratory भेजा जाता है। शक वाले धब्बे की biopsy ली जाती है।
किसे ज़रूरी है:
निचले हिस्से की छोटी गाँठ में, जहाँ लसीका गाँठें साफ़ हों, यह जाँच वैकल्पिक है। बहुत शुरुआती गाँठ में इसकी ज़रूरत नहीं।
कभी-कभी धुलाई के पानी में कैंसर कोशिकाएँ मिलती हैं, पर कुछ दिखता नहीं। तब भी इसे फैलाव माना जाता है। ऐसे में chemotherapy पहले दी जाती है। उसके बाद laparoscopy और धुलाई की जाँच दोहराई जाती है। पानी साफ़ आए, तभी ऑपरेशन पर विचार होता है।
ख़ून की जाँच में हीमोग्लोबिन, आयरन, vitamin B12, शुगर (HbA1c), liver और किडनी का काम, और ख़ून जमने की क्षमता देखी जाती है। ECG होता है। बड़ी उम्र या दिल की बीमारी हो तो echo होता है। फेफड़ों की बीमारी हो तो साँस की जाँच होती है। पोषण की जाँच होती है और हाथ की पकड़ की ताक़त नापी जाती है। CT में माँसपेशियाँ कितनी हैं, यह भी देखा जाता है। इससे अंदाज़ा मिलता है कि ऑपरेशन के बाद शरीर कितना सह पाएगा।
ऑपरेशन से पहले की तैयारी:
माँसपेशी की परत तक या उससे आगे पहुँचे हर पेट के कैंसर पर, इलाज से पहले tumour board में चर्चा होती है। Surgeon, medical oncologist, pathologist और radiologist साथ बैठते हैं। जोड़ की गाँठ में radiation oncologist भी जुड़ते हैं। ज़रूरत हो तो पोषण और राहत की देखभाल वाले डॉक्टर भी जुड़ते हैं। पहले ऑपरेशन होगा या पहले chemotherapy, यह यहीं तय होता है। Chemotherapy कब पहले आती है, यह इस पेज पर समझाया गया है।
नहीं। CT scan हर मरीज़ में होता है। PET-CT चुने हुए मरीज़ों में होता है, ज़्यादातर तब जब CT में कोई शक वाला धब्बा हो।
ऑपरेशन करने वाले surgeon गाँठ की जगह ख़ुद देखते हैं और कटाई का किनारा तय करते हैं। ज़रूरत हो तो स्याही का निशान लगाया जाता है।
Linitis plastica अंदर की परत के नीचे छिप सकता है। गहरी biopsy या EUS के बाद ही कहा जा सकता है कि कैंसर नहीं है।
ऐसा नहीं है। Marker से निदान या फैलाव तय नहीं होता। शुरुआत में बढ़े हों तो बाद की तुलना में काम आते हैं।
नहीं। यह तीन छोटे चीरों से होने वाली keyhole जाँच है। यह ऐसा फैलाव खोजती है, जिसमें बड़ा ऑपरेशन फ़ायदा नहीं करता।
इलाज के विकल्प stomach cancer treatment पेज पर हैं (English में)। यात्रा से पहले कोई सवाल हो तो +91-63555-64601 पर कॉल करें।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
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Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. Endoscopy, staging laparoscopy, ऑपरेशन और भर्ती मरीज़ों की देखभाल।
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