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Dr. Harsh J Shah

अचानक तेज़ दर्द, पेट में छेद

आख़िरी बदलाव: 19 अक्तूबर 2026

Dr Harsh Shah, आमाशय और पेट के सर्जन, अहमदाबाद

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach & Gastro Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89, 216 reviews (Gota clinic) · 4.94, 18 reviews (Apollo, Bhat)

संक्षेप में

दर्द अचानक शुरू होता है, पेट के ऊपरी हिस्से में, और कुछ मिनटों में पूरे पेट में फैल जाता है. पेट तख़्ते जैसा कड़ा हो जाता है.

पहले तरल, antibiotic, नाक की नली और acid घटाने वाला इंजेक्शन. इसके बाद कुछ घंटों में छेद बंद करने का ऑपरेशन.

आम ऑपरेशन में छेद पर टाँके लगाकर, चर्बी के परदे की पट्टी रखकर बाँध दी जाती है. फिर पूरा पेट धोया जाता है.

छेद होना अल्सर की बीमारी का emergency हिस्सा है. खून बहने वाला अल्सर, आमाशय का रास्ता सिकुड़ना और उनके planned ऑपरेशन की पूरी जानकारी पेप्टिक अल्सर और gastric outlet obstruction की सर्जरी वाले पेज पर है.

छेद होने पर क्या होता है

अल्सर का मतलब है आमाशय (stomach) या duodenum की अंदरूनी परत में बना घाव. Duodenum छोटी आँत का पहला हिस्सा है. घाव दीवार की पूरी मोटाई पार कर जाए, तो छेद बन जाता है. आमाशय का रस पेट की गुहा में रिसने लगता है.

दर्द ही पहली पहचान है. वह अचानक उठता है, पेट के ऊपरी हिस्से में, और मिनटों में पूरे पेट में फैल जाता है. गहरी साँस लेने पर भी दर्द होता है. ज़्यादातर मरीज़ घंटा तक बता देते हैं कि दर्द कब शुरू हुआ.

पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक उठा तेज़ दर्द, जो फैले और पेट को कड़ा कर दे, जाँच होने तक छेद ही माना जाता है.

बीच की शांति धोखा देती है

छेद होने के बाद तीन चरण आते हैं. पहले रिसा हुआ acid पेट की परत को जलाता है. फिर शांति का दौर आता है, अक्सर छह से बारह घंटे पर. दर्द घट जाता है और मरीज़ बेहतर दिखता है, जबकि कुछ सुधरा नहीं होता. तीसरे चरण में पूरे पेट में infection फैलता है, और फिर रक्तचाप गिरने लगता है. बहुत मरीज़ इसी शांति के दौर में दवाख़ाने पहुँचते हैं, और कुछ को गोली देकर घर भेज दिया जाता है. वे खोए हुए घंटे नतीजे पर सर्जन के काम से भी ज़्यादा असर डालते हैं.

X-ray और CT क्या बताते हैं

छेद का शक हो तब होने वाली जाँचें
जाँचक्या दिखता हैयाद रखने की बात
खड़े होकर छाती का X-rayडायाफ़्राम के नीचे जमी हवा.साफ़ X-ray का अर्थ यह नहीं कि छेद नहीं है.
पेट का CTछेद कहाँ है, और कितना रिसा है.मरीज़ स्थिर हो और शक बना रहे, तब यही चुनी जाने वाली जाँच है.
Contrast पिलाकर जाँचछेद अब भी रिस रहा है या अपने-आप बंद हो गया है.ऑपरेशन के बिना इलाज सोचा जा रहा हो, तभी की जाती है.

साफ़ X-ray छेद को ख़ारिज नहीं कर सकता. पेट कड़ा हो तो अगला क़दम CT है, दिलासा नहीं.

ऑपरेशन से पहले क्या किया जाता

रिसाव रोकना ज़रूरी है, पर यह एक पल का काम नहीं है. ऑपरेशन से पहले की तेज़ और मज़बूत तैयारी मरीज़ को ऑपरेशन सहने लायक़ बनाती है.

ऑपरेशन से पहले की तैयारी और उसका कारण
क़दमकारण
शिरा से तरलरक्तचाप और अंगों तक जाने वाला ख़ून लौट आए.
शिरा से antibioticआँत के जीवाणु रिस चुके हैं, उन्हें ढकता है. देर से आए या कमज़ोर मरीज़ में फंगस की दवा जोड़ी जाती है.
नाक से नलीआमाशय ख़ाली रहे, जिससे रस कम रिसे.
पेशाब की नलीपेशाब की मात्रा बताती है कि तरल काम कर रहे हैं या नहीं.
Acid घटाने वाला इंजेक्शनरिसता acid कम हो, और बाद में घाव भरने में मदद मिले.
कुछ घंटों में ऑपरेशनबीमार मरीज़ में देर का हर घंटा नुक़सान करता है.

क्रम यही रहता है: तेज़ी से तैयारी, फिर तेज़ी से ऑपरेशन. सारे आँकड़े ठीक होने का इंतज़ार करने से बीमार मरीज़ सुधरता नहीं, बिगड़ता है. ऑपरेशन के समय पेट का तरल culture के लिए भेजा जाता है, जिससे बाद में antibiotic घटाए जा सकें.

जोखिम किसमें ज़्यादा रहता है

ऑपरेशन के तरीक़े से ज़्यादा, तीन बातें जोखिम तय करती हैं: आते समय रक्तचाप कम होना, दर्द एक दिन से पुराना होना, और कोई दूसरी गंभीर बीमारी. तीनों हों तो मरीज़ को ICU की देखभाल और घरवालों से साफ़ बात चाहिए. Steroid, diabetes और बड़ी उम्र लक्षण छिपा देते हैं, इसलिए छेद खुला होने पर भी पेट नरम लग सकता है. ऐसे मरीज़ों में पेट की जाँच से ज़्यादा ख़ून की रिपोर्ट और scan पर भरोसा किया जाता है.

टाँके और चर्बी की पट्टी

यह ऑपरेशन दशकों से होता आया है, और आज भी पहली पसंद है. छेद के दोनों किनारे, दीवार की पूरी मोटाई से तीन टाँके लिए जाते हैं. पेट में लटकता चर्बी का परदा, जिसे omentum कहते हैं, उसकी जीवित पट्टी छेद पर खींची जाती है, और टाँके उसके ऊपर बाँध दिए जाते हैं.

चर्बी की पट्टी छेद को बाहर से ढकती है. उसे छेद में ठूँसा नहीं जाता. टाँके कसे जाते हैं, पर इतने नहीं कि चर्बी दब जाए.

इसके बाद सर्जन दूसरा छेद ढूँढता है, पूरा पेट और पेडू धोकर पानी साफ़ आने तक सफ़ाई करता है, और रिसाव की जाँच करता है. छेद बड़ा हो, शक बना रहे, या पेट बहुत गंदा हो, तभी नली रखी जाती है.

दूरबीन से या पेट खोलकर

किस तरफ़ दूरबीन, और किस तरफ़ पेट खोलना
दूरबीन की तरफ़पेट खोलने की तरफ़
रक्तचाप स्थिर है.रक्तचाप कम है, या दवा से टिका है.
छेद छोटा है.छेद बड़ा है, या किनारे नरम और टूटते हैं.
एक दिन के भीतर पहुँच गए.देर से आए, पूरे पेट में infection फैल गया.
रिसाव एक जगह तक सीमित है.पेट के चारों कोनों में गंदगी फैली है.
प्रशिक्षित टोली और उपकरण तैयार हैं.रात की पतली टोली, या दूरबीन का उपकरण नहीं.

दूरबीन के ऑपरेशन में घाव का infection और बाद का दर्द कम रहता है; रिसाव और सुरक्षा उपयुक्त मरीज़ों में लगभग बराबर रहती है. दिखाई न दे या रक्तचाप गिरने लगे तो पेट खोल देना समझदारी है, नाकामी नहीं. भारत में रात के समय तेज़ खुला ऑपरेशन कई जगह ज़्यादा उपयुक्त रहता है.

टाँके काफ़ी न पड़ें तब

कुछ छेद टाँकों से बंद नहीं होते. Duodenum का बहुत बड़ा छेद, या टाँका न थामने वाले नरम किनारे, दोबारा खुल जाते हैं. तब बड़े विकल्प आते हैं: छोटी आँत की दीवार की पट्टी, duodenum में नली रखकर उसे ख़ाली रखना, आमाशय का मुँह बंद करके आँत से नया रास्ता, या आमाशय का निचला हिस्सा निकाल देना.

बहुत बड़ा या टूटते किनारों वाला छेद टाँके नहीं थामता. तब ऑपरेशन बड़ा होता है, और मरीज़ कितना सह सकता है, उसी से तय होता है.

आमाशय में गाँठ के कारण बना छेद अलग मामला है, क्योंकि गाँठ पर रखी पट्टी भरती नहीं. मरीज़ सह सके तो गाँठ निकाल दी जाती है. न हो सके तो किनारे की biopsy लेकर छेद बंद किया जाता है, और ठीक से उठने के बाद कैंसर के इलाज की योजना बनती है.

कुछ मरीज़ों में ऑपरेशन टलता है

ध्यान से चुने गए थोड़े मरीज़ों का इलाज ऑपरेशन के बिना होता है: मुँह से कुछ नहीं, नाक की नली, शिरा से तरल, antibiotic और acid घटाने वाला इंजेक्शन, साथ में कुछ-कुछ घंटों पर जाँच. ये सारी बातें सही होनी चाहिए:

  1. Contrast जाँच में छेद अपने-आप बंद दिखे, कुछ रिस न रहा हो.
  2. पेट नरम हो, पूरे पेट में infection फैला न हो.
  3. मरीज़ घंटे-दर-घंटे साफ़ तौर पर सुधरता दिखे.
  4. उम्र और दूसरी बीमारी नज़दीकी निगरानी सहने दें, और सर्जन तैयार हो.

आधे दिन में सुधार न दिखे, तो ऑपरेशन करना पड़ता है. बड़ी उम्र में यह रास्ता ज़्यादा नाकाम होता है. शक हो तब ऑपरेशन ही सुरक्षित जवाब है.

ऑपरेशन के बाद अल्सर बाक़ी

छेद बंद करने से रिसाव रुकता है. अल्सर क्यों बना, उसका जवाब इसमें नहीं है. Acid बनाने वाली तंत्रिका काटने का पुराना ऑपरेशन अब नहीं होता, क्योंकि गोलियाँ वह काम बेहतर करती हैं.

छुट्टी से पहले तय होने वाली बातें
बातक्या किया जाता है
H. pyloriजाँच होती है और इलाज दिया जाता है. यह जीवाणु निकलने पर अल्सर दोबारा होना रुकता है.
जीवाणु जाने की पुष्टिAntibiotic पूरे होने के चार हफ़्ते बाद, और acid की गोली दो हफ़्ते बंद रखकर, साँस या मल की जाँच.
दर्द की गोलीसूजन उतारने वाली गोली बंद. दिल के लिए दी गई aspirin acid की दवा के साथ चलती रहती है.
आमाशय का अल्सरऑपरेशन के समय biopsy, और बाद में दोबारा endoscopy से घाव भरने की पुष्टि.
खाना और नलीआँत जागने पर खाना शुरू. नली का तरल साफ़ होने पर नली निकाल ली जाती है.

आमाशय में बने हर छेद के किनारे की biopsy ऑपरेशन के समय ली जाती है. रात में गाँठ का छेद और अल्सर का छेद एक जैसे दिखते हैं.

दोबारा की गई endoscopy में घाव न भरा हो, तो फिर biopsy ली जाती है, एक महीने की और गोलियाँ नहीं. सालों बाद आमाशय का मुँह सिकुड़ जाए और बासी खाना उल्टी में आए, वह बात peptic ulcer और gastric outlet obstruction के पन्ने पर है.

क्रम संक्षेप में

  1. अचानक तेज़ दर्द और कड़ा पेट, यानी emergency.
  2. खड़े होकर छाती का X-ray; साफ़ आए और शक रहे तो CT.
  3. तरल, antibiotic, नाक की नली, पेशाब की नली और acid घटाने वाला इंजेक्शन, तुरंत.
  4. कुछ घंटों में ऑपरेशन, सुबह तक इंतज़ार नहीं.
  5. स्थिर, जल्दी आए और छोटे छेद में दूरबीन; बाक़ी में पेट खोलकर.
  6. टाँके और चर्बी की पट्टी, पूरा पेट धोना, आमाशय के छेद की biopsy.
  7. H. pylori का इलाज, दर्द की गोली बंद, और जाँच से पुष्टि.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छेद के बाद ऑपरेशन कितनी देर में?

ज़्यादातर मरीज़ों में भर्ती होने के कुछ घंटों में. तरल और antibiotic साथ-साथ चलते हैं, पहले नहीं.

X-ray साफ़ आया, तो छेद नहीं?

ऐसा नहीं है. हर चार में से एक छेद में X-ray पर हवा नहीं दिखती. पेट कड़ा हो तो CT कराना पड़ता है.

दूरबीन से होगा या पेट खोलना पड़ेगा?

मरीज़ स्थिर हो, जल्दी आया हो और छेद छोटा हो तो दूरबीन चलती है. देर से आया, गंदा या अस्थिर पेट हो तो खोलना सुरक्षित रहता है.

छेद के किनारे से टुकड़ा क्यों लिया?

आमाशय का छेद किसी गाँठ का भी हो सकता है. ऑपरेशन के समय दोनों एक जैसे दिखते हैं, इसलिए किनारे की biopsy हमेशा ली जाती है.

ऑपरेशन के बाद अल्सर दोबारा हो सकता है?

हाँ, अगर H. pylori का इलाज न हो या दर्द की गोली चलती रहे. इन दो बातों को सुधारना ही दोबारा होने से बचाता है.

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अल्सर का पूरा इलाज, ख़ून बहने वाला अल्सर और बंद आमाशय सहित, peptic ulcer और gastric outlet obstruction के पन्ने पर है. यात्रा से पहले कोई प्रश्न हो तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें.

Dr Harsh Shah कहाँ मिलते हैं

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad

Consultation, ऑपरेशन की नोट, biopsy और scan की रिपोर्ट देखना, दूसरी राय और दोबारा endoscopy की योजना.

+91-63555-64601 · गोता clinic का रास्ता

Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar

Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. Emergency ऑपरेशन, endoscopy और भर्ती मरीज़ की देखभाल.

WhatsApp +91-63555-64601 · Apollo, भाट का रास्ता

दर्द शुरू हो चुका है, तो यह इसी घंटे की बात है: जहाँ emergency ऑपरेशन होता है, वहाँ पहुँचिए. ऑपरेशन हो चुका हो, या अल्सर बार-बार हो रहा हो, तो छुट्टी का काग़ज़ और रिपोर्ट WhatsApp पर पहले से भेजे जा सकते हैं, जिससे consultation के समय वे पढ़े हुए हों. इलाज consultation में जाँच के बाद तय होता है. फ़ोन करें +91-63555-64601 मुलाक़ात से पहले रिपोर्ट भेजें

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Dr. Harsh J Shah
Dr Harsh Shah - Surgical Gastroenterologist and GI Robotic Surgeon, Ahmedabad
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