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Dr. Harsh J Shah

भारत में मलाशय का कैंसर: कम उम्र में क्यों?

आख़िरी बार अपडेट: 27 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah, पेट और आँत के सर्जन, अहमदाबाद

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89 from 216 reviews (Gota clinic) · 4.94 from 18 reviews (Apollo, Bhat)

संक्षेप में

आँत के कैंसर का बड़ा हिस्सा मलाशय का होता है। भारत में यह अक्सर बड़ी आँत के कैंसर जितना आम है, जो पश्चिमी देशों जैसा नहीं है।

भारतीय मरीज़ ज़्यादातर कम उम्र के होते हैं और देर से स्टेज में आते हैं। कम उम्र बचाव नहीं करती, और ख़ून को अंदाज़े से बवासीर नहीं मानना चाहिए।

किसी भी आँकड़े से ज़्यादा यह मायने रखता है कि गाँठ मलाशय में कहाँ है। उसी से ऑपरेशन तय होता है, और यह भी कि गुदा की मांसपेशी बच सकेगी या नहीं।

अगर निदान हो चुका है, तो इलाज की योजना मध्य मलाशय के कैंसर की सर्जरी पेज पर है। यह लेख बताता है कि यह बीमारी कितनी आम है और किसे होती है।

मलाशय का कैंसर कितना आम है?

मलाशय का कैंसर दुनिया के आम कैंसरों में गिना जाता है। पश्चिमी देशों में आँत के कैंसर का लगभग तिहाई हिस्सा यही है, और एशिया में इससे बड़ा हिस्सा।

  • आँत का कैंसर, यानी बड़ी आँत और मलाशय मिलाकर, दुनिया में आम है। कैंसर से होने वाली कई मौतें इसी से होती हैं।
  • अमीर देशों में दर ऊँची रहती है। वजह खान-पान, वज़न और लंबी उम्र है।
  • कम आय वाले देशों में दर कम है, पर आदतें बदलने से संख्या बढ़ रही है।
  • जहाँ स्कैन, पेड़ू का MRI और प्रशिक्षित surgeon मुश्किल से मिलते हैं, वहाँ नए मामलों की तुलना में मौतें ज़्यादा होती हैं।

पुरुषों में यह महिलाओं से थोड़ा ज़्यादा दिखता है। कारण पूरी तरह पता नहीं हैं। हार्मोन और धूम्रपान या शराब जैसी आदतें, दोनों की भूमिका हो सकती है।

भारत और पश्चिमी देशों में फ़र्क़ क्या है?

भारत में मलाशय अक्सर बड़ी आँत जितना ही, या उससे ज़्यादा प्रभावित होता है। पश्चिम में बड़ी आँत का कैंसर ज़्यादा आम है। इसीलिए भारतीय surgeon रोज़ अलग तस्वीर देखते हैं।

मलाशय का कैंसर: भारत और पश्चिमी देशों की तुलना
बातभारतपश्चिमी देश
मलाशय और बड़ी आँत की तुलनाअक्सर बराबर, कभी मलाशय ज़्यादाबड़ी आँत साफ़ तौर पर ज़्यादा आम
निदान के समय आम उम्रलगभग चालीस के आख़िरी से पचास के बीचलगभग साठ के मध्य
पचास से कम उम्र के मरीज़बड़ा हिस्सा, पश्चिम से ज़्यादाबहुत छोटा हिस्सा
पहली बार दिखाते समय स्टेजअक्सर बढ़ा हुआ, तीसरा या चौथाजाँच कार्यक्रमों के कारण ज़्यादातर पहले दौर में
माइक्रोस्कोप में गाँठकम उम्र में म्यूकस वाले प्रकार ज़्यादाआम ग्रंथि वाला प्रकार हावी
वंशानुगत कारणशायद छूट जाते हैं, क्योंकि जाँच नियमित नहींसभी मरीज़ों में ज़्यादा बार जाँच

ये रजिस्ट्री और अस्पतालों के अध्ययनों के रुझान हैं, किसी एक व्यक्ति के नियम नहीं। भारत की रजिस्ट्री आबादी के एक हिस्से को ही गिनती है, ज़्यादातर शहरों में। इसलिए देश भर के आँकड़े शायद कम बैठते हैं।

कम उम्र में यह क्यों दिखता है?

पूरी दुनिया में पचास से कम उम्र वालों में मलाशय का कैंसर बढ़ रहा है। इस उम्र समूह में यह अनुपात से ज़्यादा दिखता है, और भारत भी अपवाद नहीं।

  • जवानी से ही बढ़ा वज़न और कम कसरत।
  • ज़्यादा मैदा या रिफ़ाइंड स्टार्च, लाल मांस और पैकेट वाला खाना, और कम रेशा।
  • आँत के कीटाणुओं में बदलाव, और बार-बार एंटीबायोटिक।
  • धूम्रपान और रोज़ की शराब।
  • वंशानुगत बीमारियाँ, जो कम उम्र में आँत का कैंसर देती हैं।

इनमें से कोई एक कारण पक्का साबित नहीं हुआ है। हर परिवार के लिए सीख साफ़ है। कम उम्र में ख़ून आए तो मलहम नहीं, जाँच और scope चाहिए। शुरुआती संकेत जानने के लिए पढ़ें मल में ख़ून हमेशा बवासीर क्यों नहीं होता।

मलाशय में गाँठ की ऊँचाई क्यों ज़रूरी?

मलाशय को इस आधार पर बाँटा जाता है कि गाँठ गुदा के मुँह से कितनी दूर है। यही ऊँचाई ऑपरेशन, थैली (stoma) से बचने की संभावना और पहले रेडिएशन की ज़रूरत तय करती है।

मलाशय के हिस्से और हर एक का इलाज पर असर
हिस्सागुदा के मुँह से दूरीआम तौर पर मतलब
ऊपरी मलाशयलगभग 11 से 15 सेमीऊँचा resection अक्सर काफ़ी है। रेडिएशन हर बार नहीं लगता
मध्य मलाशयलगभग 6 से 10 सेमीमलाशय की चर्बी और गाँठों समेत पूरा हिस्सा निकलता है। मांसपेशी ज़्यादातर बच जाती है
निचला मलाशय6 सेमी से कममांसपेशी बचाना मुश्किल है। ऑपरेशन से पहले का इलाज यहाँ ज़्यादा मायने रखता है

गाँठ जितनी नीचे हो, योजना उतनी सावधानी से बनती है। हर ऊँचाई के विकल्प ऊपरी और निचले मलाशय के कैंसर वाले पेज पर हैं।

जीने की संभावना पर आँकड़े क्या कहते हैं?

नतीजा ज़्यादातर इस पर टिका है कि पहली बार निदान के समय स्टेज क्या था। जो गाँठ आँत की दीवार तक सीमित है, उसके नतीजे अच्छे रहते हैं। दूर के अंगों तक फैली गाँठ का इलाज कहीं कठिन है।

  • गाँठ छोटी हो और गाँठों (lymph nodes) तक न पहुँची हो, तो ज़्यादातर लोग सालों बाद भी स्वस्थ रहते हैं।
  • गाँठें प्रभावित हों, तो नतीजे थोड़े कम होते हैं, पर सही क्रम में इलाज से अच्छे रहते हैं।
  • लिवर या फेफड़ों तक फैली हो, तो इलाज का लक्ष्य उसे क़ाबू में रखना है। कुछ लोगों में उसे हमेशा के लिए हटाना भी संभव होता है।
  • पिछले दो दशकों में बड़ी आँत के कैंसर से ज़्यादा सुधार मलाशय के कैंसर में हुआ है। वजह MRI से योजना, बेहतर सर्जरी और ऑपरेशन से पहले का इलाज है।

भारत में कुल नतीजे कम हैं, और मुख्य कारण देर से आना है। जहाँ पूरा MRI, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी एक साथ मिलती हैं, वहाँ के नतीजे अब पश्चिमी अध्ययनों के क़रीब हैं। नतीजा स्टेज तय करता है, भूगोल नहीं।

आपके परिवार के लिए इसका क्या मतलब है?

इतना जानें कि मलाशय का कैंसर यहाँ आम है, कम उम्र के लोगों को भी होता है, और जल्दी क़दम उठाने से नतीजा बदलता है। नीचे लिखी जाँचें माँगें।

  • लगभग छह हफ़्ते ख़ून चले, तो किसी भी उम्र में उँगली से जाँच और scope कराएँ।
  • मलाशय के कैंसर में इलाज से पहले पेड़ू का MRI ज़रूरी है। वह दिखाता है कि गाँठ कितनी गहरी है।
  • पचास से कम उम्र हो, तो वंशानुगत आँत के कैंसर के लिए टिशू जाँच के बारे में पूछें। परिवार की जेनेटिक सलाह भी पूछें।
  • आँत के कैंसर वाले मरीज़ के नज़दीकी रिश्तेदार पूछें कि scope जाँच कब से शुरू करें।
  • कम उम्र में हों, तो पहला इलाज चुनने से पहले संतान क्षमता और मल की क्रिया पर बात करें।
  • यह मानकर बैठना कि अपने आप ठहर जाएगा, आम भूल है।

जवान उम्र की गाँठ किसी वंशानुगत सिंड्रोम से जुड़ी हो सकती है। परिवार में आँत या बच्चेदानी का कैंसर रहा हो, तो वंशानुगत आँत के कैंसर सिंड्रोम के बारे में पढ़ें।

डॉक्टर से पूछने के सवाल

  • मेरी गाँठ गुदा के मुँह से कितनी दूर है, और मेरे ऑपरेशन के लिए इसका क्या मतलब है?
  • क्या पेड़ू का MRI हो चुका है, और वह कौन सा स्टेज दिखाता है?
  • क्या मेरी उम्र को देखते हुए वंशानुगत कारण की जाँच होनी चाहिए?
  • क्या मेरे रिश्तेदारों की जाँच हो सकती है, और किस उम्र से?
  • क्या ऑपरेशन से पहले का इलाज मेरे काम आएगा, और क्या गुदा की मांसपेशी बच सकती है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में मलाशय का कैंसर कितना आम है?

यह आम है। भारत में मलाशय अक्सर बड़ी आँत जितना ही प्रभावित होता है, जो पश्चिमी देशों जैसा नहीं है।

भारतीय मरीज़ कम उम्र के क्यों होते हैं?

कारण पक्के नहीं हैं। वज़न, खान-पान, आँत के कीटाणु, धूम्रपान और वंशानुगत बीमारियाँ, सबकी भूमिका हो सकती है। देर से आना तस्वीर और बिगाड़ता है।

क्या तीस से कम उम्र में मलाशय का कैंसर हो सकता है?

हाँ। कम होता है, पर होता है। कम उम्र में ख़ून आए तो उँगली से जाँच और scope ज़रूरी है।

क्या मलाशय का कैंसर परिवारों में चलता है?

कभी-कभी। कुछ परिवारों में ऐसा जीन होता है जो आँत के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। किसी रिश्तेदार को कम उम्र में आँत या बच्चेदानी का कैंसर हुआ हो, तो जाँच के बारे में पूछें।

क्या मलाशय का कैंसर पुरुषों में ज़्यादा होता है?

हाँ, थोड़ा ज़्यादा। पुरुषों में यह महिलाओं से कुछ अधिक दिखता है। कारण पूरी तरह पता नहीं हैं।

क्या देश के आँकड़े मेरा अपना भविष्य बताते हैं?

नहीं। आपका नतीजा आपकी अपनी गाँठ के स्टेज और ऊँचाई पर टिका है। रजिस्ट्री के आँकड़े समूहों का हाल बताते हैं, किसी एक व्यक्ति का नहीं।

Dr Harsh Shah कहाँ मिलते हैं

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क्या आपको मलाशय का कैंसर बताया गया है, या परिवार में किसी की जाँच चल रही है? आँकड़े अकेले पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। अपनी रिपोर्ट हमें WhatsApp पर भेजें, या मुलाक़ात बुक करें। Dr Harsh Shah उन्हें देखते हैं और आपके लिए उनका मतलब समझाते हैं। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर रिपोर्ट भेजें

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