Skip to main contentअंतिम बार अपडेट: 5 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Intestine & Gastro Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
सड़क दुर्घटना, गिरने या पेट पर लात लगने के बाद अगर पेट फूले या कड़ा हो जाए, दर्द बढ़ता जाए, बाएं कंधे की नोक में दर्द हो, बेहोशी आए, ख़ून की उल्टी हो, या पेशाब या मल में ख़ून दिखे, तो तुरंत सर्जन को दिखाइए। ऊपर से सामान्य दिखती त्वचा का मतलब यह नहीं कि अंदर चोट गंभीर नहीं है।
कुछ चोटें घंटों बाद दिखती हैं। पहली जांच के बाद चलकर बाहर आने वाले मरीज़ में भी लिवर या तिल्ली से ख़ून बह सकता है, या फटी आंत से रिसाव हो सकता है। इसलिए दूसरी बार जांच कराना सही देखभाल का हिस्सा है।
स्थिर मरीज़ों में लिवर और तिल्ली की ज़्यादातर चोटों में ऑपरेशन के बिना अस्पताल में निगरानी रखी जाती है। फटी आंत, या ख़ून जो रुकता नहीं, उसमें ऑपरेशन ज़रूरी होता है।
घायल पेट की जांच, निगरानी और इलाज की पूरी तस्वीर के लिए हमारा पेट की चोट का इलाज पन्ना पढ़ें। इस लेख में एक ही सवाल है: कौन-से लक्षण बताते हैं कि मरीज़ को अभी सर्जन के पास ले जाना है।
नीचे तालिका में दिया कोई भी लक्षण, चाहे बाहर घाव छोटा हो या नील हल्का दिखे। अगर मरीज़ पीला पड़ गया हो, पसीने में हो या उनींदा हो, तो एम्बुलेंस से इमरजेंसी विभाग पहुंचिए, ख़ुद गाड़ी मत चलाइए।
| लक्षण | इसका संभावित मतलब | क्या करें |
|---|---|---|
| पेट फूलना, कड़ा लगना या छूने पर दुखना | पेट के अंदर ख़ून या आंत की सामग्री | अभी इमरजेंसी विभाग |
| दर्द जो लगातार बढ़ता जाए | किसी अंग से अब भी ख़ून बहना, या आंत फटना | अभी इमरजेंसी विभाग |
| बाईं ओर चोट के बाद बाएं कंधे की नोक में दर्द | डायाफ़्राम के नीचे ख़ून, अक्सर तिल्ली से | अभी इमरजेंसी विभाग |
| चक्कर, बेहोशी, तेज़ नाड़ी, ठंडी पसीने वाली त्वचा | बहुत ज़्यादा ख़ून बहना | एम्बुलेंस, सीधा लिटाकर रखें |
| उल्टी, ख़ासकर ख़ून की उल्टी | पेट, ग्रहणी या आंत में चोट | अभी इमरजेंसी विभाग |
| पेशाब या मल में ख़ून | गुर्दे, मूत्राशय या आंत में चोट | उसी दिन डॉक्टर के पास |
| सीट बेल्ट की लाइन में नील, या हैंडल का निशान | उसके नीचे आंत की चोट छिपी हो सकती है | ठीक महसूस होने पर भी डॉक्टर से जांच |
| एक-दो दिन बाद बुख़ार और बढ़ा हुआ दर्द | पहले छूटी आंत की दरार, जो अब रिस रही है | अभी इमरजेंसी विभाग |
बाक़ी फ़ैसला अस्पताल अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और बार-बार की जांच से करेगा। जांचों का पूरा क्रम हमारे पेट की चोट वाले पन्ने पर है।
क्योंकि नुक़सान अंदर होता है। त्वचा सिर्फ़ ऊपर का आवरण है। लिवर, तिल्ली, आंत और उनकी रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं, जबकि बाहर कुछ भी नहीं दिखता।
इसीलिए दुर्घटना के बाद डॉक्टर पेट को एक से ज़्यादा बार जांचते हैं, और पहले स्कैन का सामान्य आना निगरानी का अंत नहीं होता।
108 पर फ़ोन कीजिए, मरीज़ को सीधा लिटाकर गर्म रखिए और मुंह से कुछ मत दीजिए। ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है, और भरा पेट बेहोशी को कम सुरक्षित बनाता है।
बच्चे, बुज़ुर्ग, ख़ून पतला करने वाली दवा लेने वाले और गर्भवती महिलाएं। ये ख़ून बहते हुए भी ठीक दिख सकते हैं, इसलिए अस्पताल जाने की सीमा नीची रखिए।
| कौन | ज़्यादा सावधानी क्यों |
|---|---|
| बच्चा | दर्द बता नहीं पाता; गिरने या हैंडल की चोट के बाद बस खेलना बंद कर सकता है, चलने से मना कर सकता है या बार-बार उल्टी कर सकता है |
| बुज़ुर्ग | दर्द कम तेज़ महसूस होता है और छोटी चोट के बाद भी ज़्यादा ख़ून बहता है |
| ख़ून पतला करने वाली दवा लेने वाला | ख़ून ठीक से जमता नहीं, इसलिए छोटी दरार भी बहती रहती है |
| गर्भवती महिला | हल्के गिरने के बाद भी मां और बच्चे दोनों की जांच ज़रूरी है |
| बढ़ी हुई तिल्ली वाला व्यक्ति, जैसे मलेरिया या टाइफ़ॉइड के बाद | हल्की चोट से भी तिल्ली फट सकती है |
टीम पहले सांस और रक्तचाप देखती है, फिर बिस्तर के पास अल्ट्रासाउंड करती है, और मरीज़ स्थिर होने पर सीटी स्कैन कराती है।
जो मरीज़ अस्थिर है और जिसके बिस्तर के पास के अल्ट्रासाउंड में ख़ून दिखता है, वह सीटी स्कैन का इंतज़ार नहीं करता। उसे सीधा ऑपरेशन थिएटर ले जाया जाता है।
रक्तचाप और स्कैन तय करते हैं। लिवर या तिल्ली की चोट वाले स्थिर मरीज़ की आम तौर पर अस्पताल में निगरानी होती है। जो मरीज़ अस्थिर है, या जिसके स्कैन में आंत फटी दिखे, उसे ऑपरेशन चाहिए।
| स्थिति | आम योजना |
|---|---|
| लिवर या तिल्ली की चोट, रक्तचाप स्थिर | निगरानी वाले बिस्तर पर रखा जाता है, ज़रूरत हो तो स्कैन या ख़ून की जांचें दोहराई जाती हैं |
| स्कैन में बहती रक्त वाहिका दिखे, मरीज़ स्थिर | जांघ की जड़ से एक कैथेटर डालकर वाहिका बंद की जाती है (एम्बोलाइज़ेशन) |
| तरल और ख़ून देने पर भी रक्तचाप गिरता रहे | ख़ून रोकने के लिए बिना देर ऑपरेशन |
| स्कैन में आंत के बाहर हवा या तरल दिखे | आंत को सिलने का ऑपरेशन, या उसका छोटा हिस्सा हटाना |
| चाकू का घाव जिसकी गहराई पर शक हो | निगरानी, या छोटे कैमरे से अंदर देखना |
तिल्ली या लिवर को अक्सर क्यों बिना छेड़े छोड़ा जा सकता है, और कब नहीं, यह हमारे पेट की चोट में बिना ऑपरेशन के इलाज वाले पन्ने पर समझाया है।
उसी दिन अस्पताल लौटिए। आंत की छोटी दरार, और अग्न्याशय की कुछ चोटें, पहले सीटी स्कैन में नहीं दिखतीं, और यहां पेट की जांच स्कैन से बेहतर फ़ैसला देती है।
पहले अस्पताल की हर स्कैन, रिपोर्ट और नोट, जिस क्रम में वे बने उसी क्रम में लाइए। जो सर्जन तस्वीरें ख़ुद देखता है, वह आम तौर पर जल्दी साफ़ राय दे पाता है।
आराम, लगातार चलना, तय समय पर दोबारा जांच, और शुरुआती हफ़्तों के लिए चेतावनी के लक्षणों की साफ़ सूची।
हां। लिवर, तिल्ली और आंत अंदर फट या बह सकते हैं, जबकि त्वचा पर कुछ नहीं दिखता। संकेत हैं पेट का फूलना या कड़ा होना, बढ़ता दर्द, बेहोशी और बाएं कंधे की नोक में दर्द।
यह कुछ ही मिनटों में दिख सकता है, या कई घंटों बाद। आंत की कुछ दरारें एक-दो दिन बाद बुख़ार और बढ़े दर्द के रूप में दिखती हैं। इसीलिए दूसरी बार जांच सही देखभाल का हिस्सा है।
डायाफ़्राम के नीचे जमा ख़ून एक तंत्रिका को छेड़ता है, जिसका दर्द कंधे में महसूस होता है। बाईं पसलियों पर चोट के बाद यह दर्द तिल्ली से ख़ून बहने का संकेत हो सकता है और इसमें इमरजेंसी जांच चाहिए।
नहीं। मुंह से कुछ मत दीजिए। ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है, और भरा पेट बेहोशी को कम सुरक्षित बनाता है। होंठों पर गीला कपड़ा रखना ठीक है।
नहीं। जिन घायल मरीज़ों का रक्तचाप स्थिर रहता है, उनमें से कई की अस्पताल में निगरानी होती है और वे ऑपरेशन के बिना ठीक हो जाते हैं। ऑपरेशन या कैथेटर से इलाज उस ख़ून के लिए है जो रुकता नहीं।
उसी दिन अस्पताल लौटिए और रिपोर्ट दोबारा दिखाइए। आंत की छोटी दरार पहले स्कैन में न दिखे, तो भी सर्जन की दोहराई जांच वह पकड़ सकती है जो स्कैन से छूट गया।
पेट पर हैंडल की चोट, या किसी सख़्त किनारे पर गिरना। बच्चा बस खेलना बंद कर सकता है, चलने से मना कर सकता है या बार-बार उल्टी कर सकता है। नील न हो तब भी ऐसे बच्चे को अस्पताल में दिखाइए।
पेट की चोट के बाद की पूरी देखभाल के लिए पेट की चोट का इलाज पन्ने से शुरू करें। यात्रा से पहले के सवालों के लिए +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, डॉ. जीवराज मेहता मार्ग, वासणा, अहमदाबाद 380007.
परामर्श, रिपोर्ट और स्कैन की समीक्षा, ऑपरेशन और फॉलो-अप। OPD सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे।
अपॉइंटमेंट: +91-63555-64601 · +91-63590-11009 · अस्पताल 079-2663 6363
अस्पताल की दिशा · WhatsApp +91-63555-64601
क्या किसी को अभी पेट में चोट लगी है? 108 पर फ़ोन कीजिए या सीधे नज़दीकी इमरजेंसी विभाग पहुंचिए। इंतज़ार मत कीजिए कि दर्द अपने-आप थम जाए। अगर मरीज़ पहले से अस्पताल में है और परिवार स्कैन या आगे की योजना पर पेट के सर्जन की राय चाहता है, तो Dr Harsh Shah रिपोर्टें और सीटी स्कैन की तस्वीरें देखकर बताएंगे। फ़ोन कीजिए, या WhatsApp पर भेजिए। Call +91-63555-64601 रिपोर्टें साथ लाएं
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