WhatsApp Skip to main content

Dr. Harsh J Shah

हफ़्तों से मल में ख़ून? शायद बवासीर नहीं

आख़िरी बार अपडेट: 27 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah, पेट और आँत के सर्जन, अहमदाबाद

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89 from 216 reviews (Gota clinic) · 4.94 from 18 reviews (Apollo, Bhat)

संक्षेप में

मलाशय के कैंसर का पहला संकेत अक्सर मल में ख़ून होता है। फिर मल की आदत बदलती है और पेट पूरा साफ़ न होने का एहसास आता है।

ख़ासकर पचास से कम उम्र में ख़ून को महीनों बवासीर मान लिया जाता है। छह हफ़्ते चले तो उँगली से जाँच और scope ज़रूरी है।

शुरुआती मलाशय के कैंसर में अक्सर कोई ख़ास तकलीफ़ नहीं होती। दर्द, वज़न घटना और आँत का रुकना देर से आते हैं, इसलिए इंतज़ार में समय जाता है।

अगर निदान हो चुका है, तो इलाज की जानकारी मध्य मलाशय के कैंसर की सर्जरी पेज पर है। यह लेख शुरुआती दौर के लिए है, जब आपको बस इतना पता हो कि कुछ गड़बड़ है।

मलाशय के कैंसर में क्या महसूस होता है?

शुरुआती संकेत ख़ून, मल की आदत में बदलाव और झूठी इच्छा हैं। कोई एक संकेत सिर्फ़ कैंसर का नहीं होता, और यही धोखा देता है।

मलाशय के कैंसर के आम संकेत और हर एक का मतलब
संकेतलोग कैसे बताते हैंक्या जानें
मल के साथ ख़ूनमल पर, मल में मिला हुआ, या काग़ज़ पर लाल ख़ूनअक्सर पहला संकेत। ज़्यादातर बवासीर मान लिया जाता है
आदत में बदलावपतला मल, बार-बार जाना, अचानक जल्दी, या दोनों बारी-बारीनया हो और हफ़्तों चले, एक ख़राब दिन नहीं
झूठी इच्छाजाने की ज़रूरत लगे, पर थोड़ा या कुछ न निकलेबवासीर से ज़्यादा मलाशय की गाँठ में दिखती है
पेट पूरा साफ़ न होनामल अटका हो या अंदर गाँठ हो ऐसा लगेगाँठ ख़ुद मल जैसी लग सकती है
पेंसिल जैसा पतला मलमल संकरा होकर निकलेरास्ता तंग होने का संकेत
गुदा से चिपचिपा स्रावमल के साथ या अकेला चिपचिपा पदार्थकुछ गाँठों में और दूसरी आँत की तकलीफ़ में भी दिखता है

इनमें से कोई भी संकेत बेक़सूर कारण से भी हो सकता है। ज़रूरी यह है कि नया संकेत हफ़्तों तक टिके।

महीनों तक बवासीर क्यों मान लिया जाता है?

बवासीर और मलाशय का कैंसर, दोनों में ख़ून आता है। बवासीर आम है, इसलिए दोष उसी पर जाता है। इसके बाद की देरी ही असली ख़तरा है।

  • व्यक्ति ख़ून देखकर मलहम लगा लेता है। थोड़ा कम होता है, तो बात छोड़ दी जाती है।
  • कहानी सुनकर गुदा की जाँच किए बिना बवासीर की दवा दे दी जाती है।
  • कम उम्र के मरीज़ को कहा जाता है कि कैंसर की संभावना कम है। scope नहीं होती।
  • ख़र्च, शर्म और सफ़र के कारण scope टलती रहती है।

एक surgeon के तौर पर कहूँ — देरी की वजह शायद ही कैंसर होता है, वजह धारणा होती है। बवासीर और कैंसर साथ भी हो सकते हैं, इसलिए बवासीर दिखने पर भी ऊपर का मलाशय साफ़ नहीं माना जाता।

देर से दिखने वाले और तुरंत वाले लक्षण

दर्द, वज़न घटना, आँत रुकना और ज़्यादा ख़ून देर से आते हैं। इसका मतलब है कि गाँठ कुछ समय से है।

  • पेड़ू, रीढ़ के निचले सिरे या पैर तक दर्द। संकेत कि गाँठ आसपास की बनावट पर दबाव डाल रही है।
  • वज़न घटना और थकान। लंबे समय तक ख़ून जाने से बिना दिखे ख़ून की कमी हो सकती है।
  • कब्ज़ बढ़ना, पेट फूलना और उल्टी। यह आँत रुकने का संकेत है और तुरंत इलाज चाहिए।
  • पेशाब में बदलाव, या योनि से ख़ून या स्राव। मलाशय के आगे की गाँठ मूत्राशय या योनि तक पहुँच सकती है।

आँत रुकना आपातकाल है। पहले नज़दीकी अस्पताल जाएँ, फिर हमें फ़ोन करें।

जाँच कब करानी चाहिए?

उम्र कोई भी हो, ख़ून लगभग छह हफ़्ते चले तो जाँच कराएँ। दूसरी बार होने का इंतज़ार न करें।

  • गुदा से बार-बार ख़ून आना, किसी भी उम्र में।
  • मल की आदत में बदलाव छह हफ़्ते चले, ख़ासकर पचास के बाद।
  • बिना कारण ख़ून की कमी, साथ में आँत की तकलीफ़।
  • अंदर गाँठ महसूस हो, या झूठी इच्छा न थमे।
  • आँत की तकलीफ़ के साथ वज़न घटे।
  • गुदा के पास का फ़िस्टुला बार-बार हो या अलग दिखे।

कम उम्र बचाव नहीं करती। परिवार में कैंसर न होना अक्सर होता है, इसलिए उसकी ग़ैरमौजूदगी से तसल्ली न लें।

पहली मुलाक़ात में क्या होता है?

मुलाक़ात छोटी होती है। पहले सवाल और हल्की उँगली से जाँच, फिर अक्सर छोटा टुकड़ा लेकर scope।

  1. ख़ून, मल की आदत, वज़न, परिवार का इतिहास और दवाओं के बारे में पूछते हैं।
  2. उँगली से जाँच मलाशय के निचले हिस्से की गाँठ पहचानती है। इसमें एक मिनट लगता है।
  3. छोटी scope अंदर की दीवार देखती है। गाँठ दिखे तो biopsy के लिए छोटा टुकड़ा लिया जाता है।
  4. scope में कुछ न दिखे तो पूरी colonoscopy बाक़ी बड़ी आँत देखती है।
  5. कैंसर निकले तो इलाज तय करने के लिए पेड़ू का MRI और CT scan होते हैं।

निदान के बाद क्या होगा, यह गाँठ की जगह पर निर्भर है। नीचे की गाँठ के लिए नीचे के मलाशय का कैंसर: Sphincter बच सकता है? देखें।

इलाज से पहले की हालत क्यों देखें?

किसी भी इलाज से पहले हम दर्ज करते हैं कि आज आपकी आँत, मूत्राशय और यौन क्रिया कैसी चल रही है। यह नोट ऑपरेशन और सहमति की बातचीत को दिशा देता है।

  • मल पर नियंत्रण, आदत और रिसाव।
  • पेशाब की धार और नियंत्रण।
  • यौन क्रिया, जो नीचे के मलाशय के ऑपरेशन के बाद बदल सकती है।
  • बच्चे के लिए plan है या नहीं, क्योंकि पेड़ू की रेडिएशन प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती है।
  • आम सेहत और इलाज के दौरान साथ देने वाला कौन है।

ये जवाब तय करने में मदद करते हैं कि गुदा की मांसपेशी बचाई जा सकती है या नहीं। ये यह भी बताते हैं कि पहला क़दम रेडिएशन, कीमोथेरेपी या सर्जरी में से क्या रहेगा।

क्या बिना लक्षण कैंसर पकड़ा जा सकता है?

हाँ, कभी-कभी। मल में ख़ून की जाँच, परिवार के इतिहास के लिए colonoscopy, या नियमित scope में दिखा पॉलिप इसे जल्दी पकड़ सकता है।

  • जिनके नज़दीकी रिश्तेदार को आँत का कैंसर हुआ हो, वे scope जाँच के बारे में पूछें।
  • scope में दिखा पॉलिप निकालकर जाँचा जाता है।
  • किसी और वजह से कराए स्कैन में भी कभी-कभी कैंसर दिखता है।

बिना लक्षण पकड़ा कैंसर आम तौर पर शुरुआती दौर का और इलाज में आसान होता है। भारत में राष्ट्रीय जाँच कार्यक्रम नहीं है, इसलिए ज़्यादातर लक्षणों की वजह से ही पकड़े जाते हैं। इसलिए लक्षणों को अनदेखा न करें।

मुलाक़ात में क्या लाएँ

  • scope, colonoscopy या biopsy की रिपोर्ट, और कोई भी स्कैन।
  • ख़ून की रिपोर्ट, ख़ासकर हीमोग्लोबिन।
  • दवाओं की सूची, मलहम और ख़ून पतला करने वाली दवा समेत।
  • ख़ून कब शुरू हुआ और कैसे बदला, इसका नोट।
  • आँत, बच्चेदानी या दूसरे कैंसर वाले रिश्तेदारों के नाम।

डॉक्टर से पूछने के सवाल

  • उँगली से जाँच और scope हुई है, या सिर्फ़ अंदाज़ा लगाया गया है?
  • क्या मुझे पूरी colonoscopy भी करानी होगी?
  • क्या मेरे ख़ून की कमी धीमे रिसाव से हो सकती है?
  • गाँठ मिली तो आगे कौन से स्कैन होंगे?
  • ख़ून फिर आए तो कितने समय में लौटना है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल में ख़ून हमेशा बवासीर का होता है?

नहीं। बवासीर आम कारण है, पर मलाशय का कैंसर भी इसी तरह ख़ून देता है। हफ़्तों चले तो जाँच और scope ज़रूरी है।

क्या कम उम्र में मलाशय का कैंसर होता है?

हाँ। पचास से कम उम्र में भी दिखता है, और बवासीर मान लेने से देरी ज़्यादा होती है। उम्र scope रोकने की वजह नहीं है।

क्या मलाशय का कैंसर हमेशा दर्द देता है?

नहीं। शुरुआती कैंसर अक्सर दुखता नहीं। दर्द आम तौर पर इस बात का संकेत है कि गाँठ कुछ समय से है।

मल की झूठी इच्छा का मतलब क्या है?

जाने की ज़रूरत लगे, पर थोड़ा या कुछ न निकले। यह बवासीर से ज़्यादा मलाशय की गाँठ में दिखती है।

ख़ून आ रहा हो तो कितना इंतज़ार करें?

लगभग छह हफ़्ते चले तो जाँच कराएँ। दोबारा होने का इंतज़ार न करें। ज़्यादा ख़ून या आँत रुकने पर तुरंत इलाज लें।

छोटी scope के बाद colonoscopy भी करानी पड़ती है?

गाँठ दिखे तब भी बाक़ी आँत देखी जाती है। छोटी scope सामान्य हो तो पूरी colonoscopy ऊपर का हिस्सा देखती है।

Dr Harsh Shah कहाँ मिलते हैं

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad

Consultation, endoscopy, biopsy और scan की रिपोर्ट देखना, दूसरी राय और नियमित जाँच।

+91-63555-64601 · गोता clinic का रास्ता

Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar

Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. Endoscopy, biopsy, CT scan, पेट और ग्रहणी के रोगों के ऑपरेशन, और भर्ती मरीज़ों की देखभाल।

WhatsApp +91-63555-64601 · Apollo, भाट का रास्ता

गुदा से ख़ून आना कुछ हफ़्तों से ज़्यादा चले, तो उसकी ठीक से जाँच ज़रूरी है। अंदाज़े से उसे बवासीर नहीं मान लेना चाहिए। अपनी रिपोर्ट हमें भेजें, या मुलाक़ात बुक करें। Dr Harsh Shah आपकी जाँच करते हैं और अगला क़दम आपके साथ तय करते हैं। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर जाँच के लिए पूछें

Rate this post

Get health updates from Dr Harsh Shah on WhatsApp

Swasth Parivar: every week, practical advice on recovery, diet and warning signs. No advertising. Stop any time.

Your number is used for these updates and for the clinic to reach you. It is never sold or passed on. To stop, reply STOP on WhatsApp.

Dr. Harsh J Shah
Dr Harsh Shah - Surgical Gastroenterologist and GI Robotic Surgeon, Ahmedabad
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.