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Dr. Harsh J Shah

जन्म से उलटी बैठी आँतें (malrotation): ऑपरेशन कब?

Dr. Jivraj Mehta Hospital · वासणा, अहमदाबाद

अंतिम अपडेट: 11-Oct-2026

वयस्कों में malrotation का इलाज, अहमदाबाद · Dr. Jivraj Mehta Hospital, वासणा, अहमदाबाद

किसी और जाँच के लिए CT हुआ, और report में एक अनजाना शब्द आया: malrotation। इसका मतलब है कि जन्म से पहले आँतें जिस तरह घूमकर अपनी जगह बैठनी चाहिए थीं, वैसे नहीं बैठीं। बहुत से लोग सालों तक इसके साथ बिना जाने जीते हैं।

इसमें असली खतरा एक ही है: पूरी छोटी आँत अपनी पतली डंडी पर मरोड़ खा जाए (midgut volvulus)। यह emergency है, और इसमें operation इंतज़ार नहीं कर सकता।

Malrotation से ही लगातार तकलीफ हो तो इलाज Ladd’s procedure नाम का operation है। संयोग से मिले malrotation में operation या निगरानी, यह सोच-समझकर चुना जाता है।

Malrotation क्या है?

गर्भ में आँतें धीरे-धीरे घूमती हैं और फिर पेट की पिछली दीवार से जुड़कर टिक जाती हैं। Malrotation में यह घूमना होता ही नहीं या अधूरा रह जाता है, और छोटी आँत एक पतली डंडी पर लटकी रहती है।

Dr Harsh Shah, आँतों के surgeon, अहमदाबाद
Dr Harsh Shah, MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology).

Dr. Jivraj Mehta Hospital. आँतों और पेट की surgery में 18 साल का अनुभव। CT में malrotation के निशान पढ़ना, मुड़ी हुई आँत का emergency operation, दूरबीन से या खुला planned Ladd’s procedure, और लंबा follow-up, सब एक ही जगह।

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro, Cancer & Laparoscopic Surgeon

18 reviews में 4.94 rating।

छोटी आँत को थामने वाली डंडी को mesentery कहते हैं। इसी में से आँत तक खून पहुँचाने वाली मुख्य रक्त-वाहिकाएँ जाती हैं। सामान्य पेट में इस डंडी की जड़ चौड़ी होती है। Malrotation में यह जड़ बहुत सँकरी हो सकती है, और सँकरी जड़ पर पूरी छोटी आँत लट्टू की तरह घूम सकती है। इस बीमारी में डर इसी एक बात का है।

Malrotation cancer नहीं है। यह जन्म से आँतों की बनावट का फ़र्क है। ज़्यादातर बच्चों में यह बचपन में ही पकड़ में आ जाता है। हमारे पास आने वाले बड़े मरीज़ वे हैं जिनमें यह बचपन में छूट गया। किसी को सालों से धुंधला-सा दर्द और उल्टी रहती है, तो किसी को किसी और वजह से हुए CT में ही पता चलता है।

वयस्कों के malrotation के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय guideline नहीं है। हमारी सलाह छपे हुए मरीज़ों के अनुभवों, उनके संकलन और विशेषज्ञों की राय पर टिकी है। यह बात हम मरीज़ को खुलकर बताते हैं, क्योंकि नीचे के कुछ फ़ैसले नियम नहीं, सोची-समझी राय हैं।

बड़ों में यह कैसे दिखता है?

बड़ों में malrotation चार तरह से सामने आता है: emergency बनकर, छोटी आँत की शुरुआत में रुकावट बनकर, सालों की मरोड़ और उल्टी बनकर, या संयोग से scan में।

वयस्कों में malrotation के चार रूप
कैसे सामने आता हैमरीज़ को क्या महसूस होता है
पूरी छोटी आँत मुड़ जाए (midgut volvulus)अचानक बहुत तेज़ पेट दर्द, जो डॉक्टर के पेट छूकर देखने से कहीं ज़्यादा लगता है। हरी या पीली उल्टी। हालत तेज़ी से बिगड़ती है, कभी बेहोशी जैसी। यह emergency है।
Ladd’s bands से रुकावटऊतक की पट्टियाँ छोटी आँत के पहले हिस्से के ऊपर से गुज़रकर उसे दबाती हैं। हरी उल्टी और ऊपर का पेट फूलना।
सालों से आती-जाती तकलीफआती-जाती मरोड़, उल्टी, पेट फूलना, थोड़ा खाते ही पेट भर जाना, वज़न घटना। अक्सर सालों तक “गैस” या “IBS” मान लिया जाता है।
संयोग से मिलनाकोई तकलीफ नहीं। CT किसी और कारण से हुआ था।

आँत मुड़ जाए तो?

पेट छूने पर जितना लगे उससे कहीं ज़्यादा दर्द, और CT में “whirlpool” जैसा मरोड़, यानी सीधे operation theatre।

  1. दूसरे scan या contrast जाँच का इंतज़ार नहीं।
  2. Lactate की report का इंतज़ार नहीं। Lactate normal हो तब भी आँत मर रही हो सकती है।
  3. पूरी रात ward में देखते रहने का इंतज़ार नहीं।
  4. Drip, antibiotic, नाक से पेट में नली और खून की तैयारी theatre जाते-जाते ही होती है, उसके बदले नहीं।

लगभग पूरी छोटी आँत का खून इसी डंडी से होकर जाता है। डंडी मुड़ते ही कुछ ही घंटों में आँत मरने लगती है।

शक होने से लेकर मरोड़ खोलने तक का समय ही इस बीमारी में असली फ़र्क डालता है। समय पर मरोड़ खुले तो आँत ज़्यादातर फिर ठीक हो जाती है। देर हो जाए तो लंबी आँत निकालनी पड़ सकती है, और short bowel syndrome हो सकता है, जिसमें लंबे समय तक नस से खाना देना पड़ता है। आपको पता हो कि आपको malrotation है, तो किसी भी emergency में पहला वाक्य यही बोलिए। वह एक वाक्य घंटों बचाता है।

पहले कौन-सी जाँच?

मुख्य जाँच नस में contrast देकर किया गया CT scan है। इसके निशान बारीक होते हैं, इसलिए radiologist से खास तौर पर इन्हें देखने को कहना पड़ता है।

Malrotation का शक: जाँच और हर एक क्या तय करती है
जाँचक्या दिखता या तय होता है
नस में contrast के साथ CT“Whirlpool sign”: नस और डंडी मुख्य धमनी के चारों ओर भँवर की तरह लिपटी हों। जब तक उलटा साबित न हो, इसे मरोड़ ही माना जाता है।
उसी CT में धमनी और नसआँत की मुख्य शिरा (SMV) मुख्य धमनी (SMA) के बाईं ओर है या नहीं। सामान्यतः वह दाईं ओर होती है।
उसी CT में आँतों की बनावटछोटी आँत का पहला हिस्सा बीच की रेखा पार करता है या नहीं, और बड़ी आँत की शुरुआत (caecum) कहाँ है।
उसी CT में आँत की दीवारखून कम पहुँचने के निशान: दीवार बहुत पतली या मोटी, contrast कम पकड़ना, या दीवार में अथवा लिवर की नसों में हवा।
Upper GI contrast studyमरीज़ स्थिर हो तभी। आँतें कहाँ मुड़ती हैं, यह दिखाने वाली मूल जाँच, और मरोड़ में पेंच जैसा आकार।
Contrast enemaबनावट अब भी साफ़ न हो तो caecum ढूँढने के लिए।
खून की जाँच: lactate, blood gas, CBC, किडनीमरीज़ कितना बीमार है। मरोड़ के शक में ये operation को कभी देर नहीं कराते।

तकलीफ की कहानी मेल खाती हो, तो हम radiologist से धमनी और नस की स्थिति के बारे में सीधे पूछते हैं। कोई जानबूझकर न देखे तो CT के ये निशान छूट जाते हैं, और देर से निदान होने का यह एक बड़ा कारण है।

Malrotation या कुछ और?

Malrotation जन्म से मौजूद, बिना cancer वाली बीमारी है। लंबे दर्द के लिए operation से पहले दूसरे कारण जाँचे जाते हैं, क्योंकि गलत कारण के लिए किया operation काम नहीं आता।

पुरानी तकलीफ को malrotation से जोड़ने से पहले जाँचे जाने वाले कारण
बीमारीकैसे जाँची या अलग की जाती है
IBS या functional dyspepsiaGastroenterologist की जाँच। दर्द functional हो तो operation से आराम नहीं मिलेगा।
Coeliac diseaseखून की जाँच, और endoscopy में छोटी आँत की biopsy।
छोटी आँत में बैक्टीरिया का बढ़ना (SIBO)साँस की जाँच, और इलाज से फ़र्क पड़ता है या नहीं।
SMA syndromeछोटी आँत की शुरुआत में रुकावट का दूसरा कारण, CT में दिखता है। इसका इलाज अलग है।
पेट का छाला और बंद हुआ मुँहEndoscopy। इसका इलाज अलग है।

प्रकार, और खतरा किससे?

मरोड़ का खतरा डंडी की जड़ की चौड़ाई तय करती है। जड़ सँकरी हो तो पूरी छोटी आँत घूम सकती है; चौड़ी जड़ ज़्यादा टिकाऊ रहती है।

बनावट के प्रकार, ज़्यादा से कम खतरे तक
प्रकारमतलब
Non-rotationछोटी आँत दाईं ओर, बड़ी आँत बाईं ओर। डंडी की जड़ सँकरी। मरोड़ का खतरा इसी बनावट में ज़्यादा।
Incomplete rotationघूमना अधूरा रुक गया। Ladd’s bands अक्सर छोटी आँत के पहले हिस्से पर होते हैं।
Reverse rotationबहुत कम। मुख्य धमनी बड़ी आँत के आगे होती है।
दूसरी बनावटेंHeterotaxy में, जिसमें अंग असामान्य तरफ़ होते हैं, और जन्म के दूसरे फ़र्कों के साथ। दिल और तिल्ली भी जाँचे जाते हैं।

Heterotaxy हो तो operation से पहले इसका खास ध्यान रखा जाता है। किसी में तिल्ली होती ही नहीं, या कई छोटी-छोटी होती हैं, जिससे गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसलिए टीके और operation के आसपास का plan बदलता है।

किसे कौन-सा इलाज?

इलाज इस पर निर्भर है कि मरीज़ किस रूप में आया। मरोड़ हो तो तुरंत theatre। तकलीफ पक्के तौर पर malrotation से हो तो Ladd’s procedure। संयोग से मिला हो तो साथ बैठकर फ़ैसला।

निगरानी से emergency operation तक, किसे क्या
स्थितिआम plan
संयोग से मिला, कोई तकलीफ नहींTeam meeting में चर्चा। या तो लिखे हुए खतरे के लक्षणों के साथ निगरानी, या planned Ladd’s procedure।
सालों से दर्द और उल्टीपहले दूसरे कारण हटाए जाते हैं। तकलीफ malrotation से ही हो तो planned Ladd’s procedure।
Ladd’s bands से रुकावटLadd’s procedure.
छोटी आँत मुड़ गईEmergency operation: मरोड़ खोलना, आँत जाँचना, Ladd’s procedure।
मरोड़ के साथ मरी हुई आँतEmergency operation, सिर्फ़ साफ़ तौर पर मरा हिस्सा निकालना, और दोबारा देखने का operation पहले से तय।

ऑपरेशन कब नहीं चाहिए?

Malrotation वाले हर बड़े मरीज़ को operation नहीं चाहिए। बिना तकलीफ वाले बड़ी उम्र के मरीज़ में, अगर डंडी की जड़ चौड़ी है, तो निगरानी रखना उचित है।

कोई guideline इसे तय नहीं करती, और अनुभवी surgeons में भी मतभेद है। Operation के पक्ष में तर्क यह है कि मरोड़ अचानक और गंभीर होता है। विरोध में तर्क यह है कि जो व्यक्ति बिना मरोड़ के अधेड़ उम्र तक पहुँच गया, उसकी बनावट कुछ हद तक स्थिर साबित हुई है। Operation के अपने जोखिम हैं, और बाद में चिपकाव (adhesions) से आँत की रुकावट आम है। निगरानी की ओर झुकाने वाली बातें:

  • बड़ी उम्र, कोई तकलीफ नहीं, और दशकों से कोई दौरा नहीं।
  • CT में डंडी की जड़ चौड़ी।
  • दूसरी बीमारियाँ, जिनसे operation का जोखिम बढ़ता है।
  • पूरी बात समझने के बाद मरीज़ खुद निगरानी चुने।

निगरानी का मतलब कुछ न करना नहीं है। बनावट और फ़ैसले के कारण कागज़ पर लिखे जाते हैं। मरोड़ के खतरे के लक्षण लिखकर दिए जाते हैं, और तेज़ दर्द और उल्टी हो तो तुरंत आने को कहा जाता है। Emergency में जो मरीज़ कह सके “मुझे malrotation है”, उसके पास असली सुरक्षा है।

ऑपरेशन कब सही रहता है?

Malrotation से चलती तकलीफ, रुकावट या मरोड़ हो तो Ladd’s procedure चाहिए। संयोग से मिले malrotation में कुछ बातें operation की ओर झुकाती हैं।

  1. कम उम्र। आगे ज़्यादा साल, यानी मरोड़ के खतरे के ज़्यादा साल।
  2. Non-rotation और CT में साफ़ सँकरी जड़।
  3. पहले तेज़ दर्द और उल्टी के दौरे, जो अपने आप शांत हो गए। वे छोटे मरोड़ हो सकते हैं।
  4. Emergency surgery से दूर रहना या बहुत यात्रा। मरोड़ का इलाज दिनों में नहीं, घंटों में गिना जाता है।
  5. पूरी बात समझने के बाद पक्के इलाज की आपकी अपनी इच्छा।

मरीज़ क्या कहते हैं

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“I had my appendix surgery done by Dr. Harsh Shah, and I am very satisfied with the care I received. Dr. Harsh Shah explained the procedure clearly, performed the surgery smoothly, and ensured I was comfortable throughout my treatment. The recovery has been excellent, and the entire experience was reassuring. I highly recommend Dr. Harsh Shah for his professionalism, expertise, and compassionate care. — Sakina Magar, Google review”

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“I done my stoma closer operation with harsh sir such a nice and kind person never doing miss guide always give right advice polite nature. — Jigar Jadav, Google review”

नीचे के reviews Dr Harsh Shah की दो Google listings से, जैसे लिखे गए वैसे ही रखे गए हैं। किसी में malrotation का नाम नहीं है; ये आँतों की बीमारियों के इलाज के बारे में हैं।

Ladd's procedure में क्या होता है?

Ladd’s procedure आँतों को सामान्य जगह पर नहीं लौटाता। यह उन्हें सुरक्षित स्थिति में जमाता है और डंडी को चौड़ा करता है, ताकि वे फिर न मुड़ सकें।

  1. पहला काम, मरोड़ खोलना। आम तौर पर घड़ी की सुई की उलटी दिशा में, और अक्सर एक से ज़्यादा चक्कर।
  2. आँत को समय देना। मरोड़ खुलते ही काली दिखने वाली आँत थोड़ी देर में अक्सर फिर गुलाबी हो जाती है।
  3. Ladd’s bands काटना। Caecum से छोटी आँत के पहले हिस्से के ऊपर से जाने वाली पट्टियाँ।
  4. डंडी की जड़ चौड़ी करना। मरोड़ फिर न हो, इसके लिए यही कदम है, और अक्सर यही कम किया जाता है, इसलिए इस पर पूरा ध्यान दिया जाता है।
  5. छोटी आँत का पहला हिस्सा सीधा करना, पेट की दाईं ओर नीचे की तरफ़।
  6. Appendix निकालना। Caecum बाईं ओर रहता है, वहाँ बाद में appendicitis हो तो पहचानना मुश्किल।
  7. आँतें जमाना: छोटी आँत दाईं ओर, बड़ी आँत बाईं ओर।

सालों की तकलीफ के लिए planned Ladd’s procedure अनुभवी हाथों में अक्सर दूरबीन से हो सकता है। Emergency में, जब आँत में खून कम पहुँच रहा हो, खुला operation आम तौर पर ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि पूरी छोटी आँत हाथ में लेकर जाँचनी पड़ती है और ज़रूरत हो तो निकालनी पड़ती है। Appendix क्यों मायने रखता है, यह appendicitis का इलाज वाले पेज पर है।

Emergency operation और दोबारा जाँच

मरोड़ में हम सिर्फ़ साफ़ तौर पर मरी हुई आँत निकालते हैं। शक वाला हिस्सा छोड़ दिया जाता है, और एक-दो दिन बाद दूसरे operation में फिर देखा जाता है।

बच सकने वाली आँत निकाल देना ही वह रास्ता है जिससे कोई जवान व्यक्ति पूरी ज़िंदगी कम आँत के साथ रह जाता है। इसलिए शक वाले हिस्से को ठीक होने का मौका दिया जाता है। मरीज़ shock में हो तो उसी समय सिरे नहीं जोड़े जाते; stoma (पेट पर थैली) या दूसरे operation में जोड़ना ज़्यादा सुरक्षित है। कितनी आँत निकली और कितनी बची, यह नापकर लिखा जाता है, क्योंकि सालों तक का खाना-पीना और follow-up इसी से तय होता है।

पहला operation शुरू होने से पहले ही दोनों operation की बात परिवार को बताई जाती है। दोबारा देखने वाला operation इलाज का हिस्सा है, कुछ गलत होने का निशान नहीं।

चिपकी छोटी आँत के operation के बाद एक मरीज़ की बात

इस मरीज़ की चिपकाव से बंद छोटी आँत operation से खोली गई थी (adhesiolysis)। Ladd’s procedure के बाद लंबे समय में ज़्यादातर दिखने वाली तकलीफ भी चिपकाव ही है, इसलिए operation से पहले हम इसकी बात करते हैं।

Planned operation की तैयारी

Planned Ladd’s procedure से पहले घटा वज़न और पोषण सुधारा जाता है, और operation लिखित और चित्रों वाली जानकारी के साथ समझाया जाता है।

  1. सालों की तकलीफ से वज़न घटा हो तो पोषण की जाँच और सुधार।
  2. Operation से पहले carbohydrate वाला पेय, जल्दी recovery वाले plan के हिस्से के रूप में।
  3. खून के थक्के रोकने के उपाय, और operation की शुरुआत में antibiotic।
  4. Heterotaxy हो तो दिल और तिल्ली की जाँच, और तिल्ली न हो या कमज़ोर हो तो टीके।

Emergency में इनमें से कुछ भी operation को देर नहीं कराता। मरीज़ को सँभालना theatre जाते-जाते ही होता है।

ऑपरेशन के बाद क्या होता है?

Planned operation के बाद ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन बैठ जाते हैं, अगले दिन खाने लगते हैं, और तीन से पाँच दिन में घर जाते हैं।

Planned Ladd’s procedure के बाद आम तौर पर दिन-ब-दिन क्या होता है
दिनक्या होता है
Operation का दिनबिस्तर से उठकर बैठना, पतला तरल, कम opioid वाली दर्द की दवा।
अगला दिनजितना पचे उतना खाना, दिन में चार बार चलना, पेशाब की नली और drip हटाना।
दूसरा-तीसरा दिनपूरा खाना, खुलकर चलना-फिरना, मुँह से दर्द की गोली, गैस पास होना।
तीसरे से पाँचवाँ दिनखाते, चलते और गोली से आराम हो तो घर।

मरने लगी आँत वाले emergency के बाद रास्ता अलग है। इलाज ICU से शुरू होता है, एक-दो दिन में दोबारा देखने का operation होता है, और खाने का plan जल्दी बनता है। लंबी आँत निकली हो तो नस से खाना जल्दी शुरू होता है। Recovery दिनों में नहीं, हफ़्तों में गिनी जाती है।

छुट्टी के समय आपको लिखकर दिया जाता है: निदान, कौन-सा operation हुआ, appendix निकला या नहीं, और आँत निकली हो तो कितनी बची है। ये कागज़ सँभालकर रखें। आगे किसी भी डॉक्टर को ये चारों बातें चाहिए होंगी।

ऑपरेशन के जोखिम

Ladd’s procedure का लंबे समय का मुख्य जोखिम बाद में चिपकाव से आँत की रुकावट है। बाकी जोखिम सहमति से पहले, आप पर लागू होने वाले आँकड़ों के साथ, समझाए जाते हैं।

Planned operation: bleeding, घाव या दूरबीन के छेद में infection, पैर या फेफड़े में खून का थक्का, anaesthesia से जुड़ी तकलीफ, दूरबीन से खुले operation में बदलना, आँत या उसकी नसों में चोट, मरोड़ फिर होना (कम ही), और सालों बाद चिपकाव से रुकावट। Operation में appendix निकाल दिया जाता है। सालों की तकलीफ में ज़्यादातर को आराम मिलता है, पर कुछ में दर्द बना रह सकता है, खास कर जब तकलीफ बहुत पुरानी हो या साथ में कोई और कारण भी हो। Planned operation में जान का जोखिम कम है।

मरोड़ के लिए emergency operation: यह जानलेवा emergency है। दूसरा operation अक्सर शुरू से ही तय होता है। बहुत सी आँत मर चुकी हो तो निकालनी पड़ती है, और short bowel syndrome हो सकता है, जिसमें लंबे समय तक नस या नली से खाना देना पड़ता है। Stoma की ज़रूरत पड़ सकती है। जान का जोखिम इस पर निर्भर है कि कितनी आँत बची: बचे तो कम, बहुत आँत मर चुकी हो तो काफ़ी ज़्यादा। Dr Harsh Shah सहमति से पहले हर बात खुद समझाते हैं।

Follow-up और ज़रूरी कागज़

Follow-up में घाव, तकलीफ और वज़न देखे जाते हैं। बहुत आँत निकली हो तो पोषण की देखभाल पूरी ज़िंदगी चलती है।

Malrotation के इलाज या निगरानी के फ़ैसले के बाद follow-up
कबक्या जाँचा जाता है
2 से 6 हफ़्तेघाव, तकलीफ, खाना और वज़न।
3 से 6 महीनेपुरानी तकलीफ शांत हुई या नहीं, और पोषण।
बहुत आँत निकलने के बादIntestinal failure team के साथ पूरी ज़िंदगी: vitamin B12, चर्बी में घुलने वाले vitamins, trace elements, लिवर और खाने की नली।
आपके कागज़निदान, operation, appendix निकला या नहीं, और बची हुई आँत की लंबाई।
निगरानी में malrotationमरोड़ के खतरे के लक्षण लिखकर, तुरंत आने की साफ़ हिदायत, और फ़ैसला कागज़ पर।

एक बात कई लोगों को चौंकाती है। Ladd’s procedure में appendix निकल चुका हो, तो दाईं ओर का नया दर्द appendicitis नहीं है। डॉक्टर को यह पता होना चाहिए, इसलिए operation का कागज़ दिखाएँ। महीनों या सालों बाद उल्टी के साथ मरोड़ हो तो वह चिपकाव से रुकावट हो सकती है। इसमें scan चाहिए, और अक्सर drip और आँत को आराम देने से शांत हो जाती है। आँत का खून खतरे में हो तभी operation चाहिए।

पहली मुलाकात से follow-up तक

  1. Consultation लें। हर CT की CD, contrast जाँच की report, पुराने discharge के कागज़ और दवाओं की सूची लाएँ। अचानक तेज़ दर्द और उल्टी हो तो सीधे Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad की emergency में।
  2. Scan साथ बैठकर पढ़ना। बनावट, डंडी की जड़, rotation का प्रकार और मरोड़ का कोई निशान दर्ज किया जाता है।
  3. दूसरे कारण हटाना। पुरानी तकलीफ में पहले gastroenterologist की जाँच और दूसरे कारणों की जाँच।
  4. मिलकर फ़ैसला। Operation, या लिखे हुए खतरे के लक्षणों के साथ निगरानी। दोनों में कारण कागज़ पर।
  5. इलाज। दूरबीन से या खुला planned Ladd’s procedure, या मरोड़ के शक में emergency operation।
  6. Follow-up. 2 से 6 हफ़्ते और 3 से 6 महीने पर, कागज़ों के साथ।

खर्च, insurance और भर्ती

Planned Ladd’s procedure और emergency operation के खर्च में बड़ा फ़र्क होता है। Emergency में ICU, दोबारा देखने का operation और लंबी पोषण देखभाल लग सकती है।

अंदाज़ा दूरबीन या खुले operation, अस्पताल में रहने के दिनों, और ICU या नस से खाने की ज़रूरत पर निर्भर करता है। Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad मुख्य insurance कंपनियों और cashless सुविधा के साथ काम करता है, और pre-authorisation, emergency भर्ती समेत, office सँभालता है। साथ लाएँ: CT की report और CD, contrast जाँच, discharge के कागज़, दवाओं की सूची, insurance card और पहचान पत्र।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Report में malrotation लिखा है, पर कोई तकलीफ नहीं। क्या operation ज़रूरी है?

हर बार नहीं। इसके लिए कोई guideline नहीं है। कम उम्र, CT में सँकरी डंडी, पहले तेज़ दर्द और उल्टी के दौरे, या emergency surgery से दूर रहना, ये बातें operation की ओर झुकाती हैं। बिना तकलीफ वाले बड़ी उम्र के मरीज़ में चौड़ी डंडी हो तो लिखे हुए खतरे के लक्षणों के साथ निगरानी रखी जा सकती है।

आँत मुड़ने पर घर में कैसे पहचानें?

अचानक बहुत तेज़ पेट दर्द, हरी या पीली उल्टी, पेट का फूलते जाना या चक्कर आना। तुरंत नज़दीकी emergency में जाएँ और पहले ही बताएँ कि आपको malrotation है।

क्या operation से आँतें सामान्य जगह आ जाएँगी?

नहीं। Ladd's procedure आँतों को सुरक्षित स्थिति में जमाता है, डंडी की जड़ चौड़ी करता है ताकि मरोड़ न हो, और appendix निकालता है। आँतें जानबूझकर बिना घूमी पर सुरक्षित बनावट में रखी जाती हैं।

स्वस्थ appendix भी क्यों निकालते हैं?

Operation के बाद बड़ी आँत की शुरुआत बाईं ओर रहती है। वहाँ बाद में appendicitis हो तो पहचानना मुश्किल होगा, इसलिए उसी operation में appendix निकाल दिया जाता है।

क्या दूरबीन से operation हो सकता है?

सालों की तकलीफ के लिए planned operation अनुभवी हाथों में अक्सर दूरबीन से हो सकता है। Emergency मरोड़ में, जब आँत में खून कम पहुँच रहा हो, खुला operation आम तौर पर ज़्यादा सुरक्षित है।

क्या पुराना दर्द operation के बाद कम होगा?

सालों की तकलीफ वाले ज़्यादातर मरीज़ों को आराम मिलता है। कुछ में दर्द बना रह सकता है, खास कर जब तकलीफ बहुत पुरानी हो या कोई और कारण भी साथ हो। इसीलिए पहले दूसरे कारण जाँचे जाते हैं।

डॉक्टर कहाँ मिलते हैं?

Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Dr Jivraj Mehta Marg, Vasna, Ahmedabad 380007.
Google: Dr Harsh Shah · 18 reviews में 4.94
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601

गांधीनगर, मेहसाणा, नडियाद, आणंद, राजकोट और कच्छ समेत पूरे गुजरात से, और दक्षिण राजस्थान से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।

CT report में malrotation लिखा है, या सालों से बिना वजह पेट दर्द और उल्टी है? CT की report और CD, contrast जाँच की report और पुराने discharge के कागज़ consultation में साथ लाइए। इलाज का फ़ैसला consultation में, जाँच के बाद ही होता है। अचानक तेज़ पेट दर्द और उल्टी हो तो message नहीं, तुरंत नज़दीकी emergency में जाएँ। फ़ोन करें +91-63555-64601 · Reports साथ लाएं

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