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Gastric volvulus और paraoesophageal hernia का इलाज, अहमदाबाद · Dr. Jivraj Mehta Hospital, वासणा, अहमदाबाद
“महीनों से iron की गोलियाँ ले रहे हैं, फिर भी hemoglobin नहीं बढ़ता — और CT में बताया कि पेट का हिस्सा सीने में चला गया है।” बड़ा paraoesophageal hernia कई बार ऐसे ही, चुपचाप, सामने आता है। ऐसे hernia के तीन रास्ते हैं। अगर कोई तकलीफ़ नहीं, तो आज की guideline के अनुसार operation के बजाय निगरानी सुरक्षित है — बशर्ते परिवार जाने कि पेट मुड़ने पर क्या होता है। अगर ख़ून की कमी, दर्द, उल्टी या साँस फूलना है, तो योजनाबद्ध मरम्मत। और अगर पेट सच में मुड़ जाए (acute gastric volvulus) और उसका ख़ून रुकने लगे, तो यह घंटों की emergency है — उसी दिन operation।
मुड़े हुए पेट को घंटों के भीतर surgeon, anaesthetist, CT, endoscopy और ICU का बिस्तर चाहिए; शांत पड़े बड़े hernia को धैर्य वाली OPD चर्चा चाहिए, और कई बार उससे ज़्यादा कुछ नहीं। Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad में emergency एक ही सेवा है, और वही surgeon OPD में योजनाबद्ध मरीज़ों को देखते हैं — इसलिए operation, पेट को बाँधना या निगरानी, यह फ़ैसला वही करता है जो उसे अंजाम देगा।
Dr. Jivraj Mehta Hospital. Super-specialty surgical gastroenterology में training, इसी विषय में दो बार योग्यता, और पेट व खाने की नली की surgery में 18 साल का अनुभव। Emergency CT और endoscopy, ICU, दूरबीन से और open पेट की surgery, endoscopy से gastropexy, dietitian की मदद और follow-up — सब एक ही practice में।
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach Surgeon · Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad
Google rating: Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad पर 18 reviews में 4.94।
सीने और पेट को अलग करने वाले पर्दे (diaphragm) में एक प्राकृतिक छेद है, जिससे खाने की नली पेट में उतरती है। आम sliding hiatus hernia में नली और पेट का जोड़ इस छेद से ऊपर खिसकता है — यह मुख्य रूप से reflux की तकलीफ़ है। Paraoesophageal hernia में पेट का ऊपरी हिस्सा नली के बगल से सीने में लुढ़क जाता है; मिले-जुले प्रकार में दोनों होते हैं, और बड़े hernia में ज़्यादातर यही मिला-जुला प्रकार देखने को मिलता है। कभी-कभी बड़ी आँत, तिल्ली या छोटी आँत भी पेट के पीछे थैली में चली जाती है। सीने में पड़ा पेट अपनी धुरी पर घूम सकता है — लंबी धुरी पर (ऊपरी सिरे से निचले सिरे तक) या छोटी धुरी पर — और यही घूमना gastric volvulus है।
पर्दे के तंग छेद में पेट बार-बार ऊपर-नीचे रगड़ता है, तो उसकी सिलवटों पर लंबी, उथली खरोंचें (Cameron lesions) बन जाती हैं जिनसे धीरे-धीरे ख़ून रिसता है। थकान, साँस फूलना और कम hemoglobin — बिना किसी साफ़ ख़ून बहने के — कई बार बड़े hernia का अकेला संकेत होता है।
ऐसे मरीज़ में पहले acid घटाने वाली गोली से खरोंचें भरने दी जाती हैं और iron पूरा किया जाता है, फिर hemoglobin दोबारा जाँचा जाता है। अगर इलाज के बाद भी कमी लौट आए, तो मरम्मत का कारण मज़बूत हो जाता है। पर ख़ून की कमी का दोष Cameron lesions पर तभी डाला जाता है जब endoscopy में बाकी पेट और नली की परत देख ली गई हो।
बड़ा paraoesophageal hernia अक्सर खाने के बाद सीने या ऊपरी पेट में दर्द या दबाव, जल्दी पेट भर जाना, पेट फूलना, निगलने में दिक्कत, reflux और — पेट का बड़ा हिस्सा सीने में हो तो — साँस फूलना देता है। बहुत से hernia कोई तकलीफ़ नहीं देते और किसी और कारण से कराए गए X-ray या CT में अचानक दिख जाते हैं।
तीनों संकेत साथ हों तो, जब तक उल्टा साबित न हो, पेट मुड़ा हुआ माना जाता है: पेट के ऊपरी हिस्से या सीने के निचले हिस्से में अचानक तेज़ दर्द; उल्टी का ज़ोरदार प्रयास पर कुछ बाहर न आना; और नाक से डाली गई नली का पेट में न उतर पाना। Hiatus hernia के जाने-पहचाने मरीज़ में यह surgical emergency है।
जाँच में जितना दिखे उससे कहीं ज़्यादा बेचैनी, तेज़ धड़कन और लगातार बिगड़ती हालत — ये अतिरिक्त चेतावनी हैं। ख़तरा यह है कि मरोड़ ख़ून रोक दे तो पेट की दीवार घंटों में मर सकती है और फट सकती है, और उसके बाद जान का ख़तरा तेज़ी से बढ़ जाता है। इसलिए मुड़े हुए पेट को कभी “रात भर देखते हैं” कहकर नहीं रखा जाता। छोटी धुरी का मरोड़ कई बार आता-जाता है — खाने के बाद ऊपरी पेट में दर्द, भारीपन और उबकाई का ज़ोर, जो अपने आप शांत हो जाए; ऐसे दौरे निगरानी के बजाय योजनाबद्ध operation का कारण हैं।
मुख्य जाँच सीने और पेट का contrast वाला CT है: hernia का प्रकार, अंदर क्या गया है, पेट मुड़ा है या नहीं और कैसे, और पेट की दीवार का ख़ून घटने के संकेत — सब दिखाता है। सीने का X-ray पहला संकेत दे सकता है; स्थिर मरीज़ में contrast जाँच बनावट दिखाती है; और endoscopy परत देखती है — पर अस्थिर मरीज़ में कभी operation में देर नहीं कराती।
| जाँच | कब | उससे क्या तय होता है |
|---|---|---|
| सीने और पेट का contrast CT | पहली — emergency और योजनाबद्ध दोनों में | Hernia का प्रकार और अंदर के अंग, मरोड़ की धुरी, और दीवार मरने के संकेत — पतली दीवार, कम contrast, दीवार में हवा या पेट में खुली हवा |
| सीने का X-ray | अक्सर पहली ली जाने वाली film | दिल के पीछे हवा-पानी की परत, जो शक जगाए |
| Upper GI contrast जाँच | स्थिर मरीज़ | Hernia का आकार और पेट का मरोड़ |
| Upper GI endoscopy | योजनाबद्ध मरीज़; emergency में सिर्फ़ तब जब operation में देर न हो | परत की हालत, Cameron lesions, गाँठ को ख़ारिज करना; मुड़े पेट में कठिन या असंभव हो सकती है |
| Hemoglobin, iron, नमक (electrolytes), lactate | हर मरीज़ | ख़ून की कमी और उसका कारण; पानी की कमी; बढ़ता lactate — पेट तकलीफ़ में है, इसका संकेत |
| Manometry (खाने की नली की pressure जाँच) | योजनाबद्ध मरम्मत से पहले, जब wrap करना हो और motility की दिक्कत की संभावना हो | पूरा या आधा wrap सुरक्षित है, और achalasia है या नहीं |
Paraoesophageal hernia और gastric volvulus यांत्रिक, benign तकलीफ़ें हैं। फिर भी endoscopy ज़रूरी है, क्योंकि पेट में या नली के जोड़ पर गाँठ भी दर्द, उल्टी, ख़ून की कमी और वज़न घटना — ठीक यही लक्षण — दे सकती है, और वह पूरा इलाज बदल देती है।
इसलिए योजनाबद्ध मरीज़ में मरम्मत से पहले endoscopy, और कुछ असामान्य दिखे तो biopsy। Emergency में operation ख़ुद पेट को सीधे दिखाता है, और जो हिस्सा स्वस्थ न लगे उसकी laboratory में जाँच होती है।
मुड़े पेट के शक में कदम: तरल, नमक की कमी पूरी करना और दर्द की दवा; नाक से नली डालकर पेट ख़ाली करने का सावधान प्रयास — कभी ज़बरदस्ती नहीं; पेट का ख़ून रुकने (strangulation) का शक हो तो antibiotics; और बिना इंतज़ार तुरंत operation।
नली उतर जाए और पेट ख़ाली हो जाए तो दबाव घटता है, और emergency कुछ बेहतर हालात वाले urgent operation में बदल सकती है — पर यह operation की जगह नहीं लेता। Operation में पेट वापस नीचे लाकर सीधा किया जाता है, फिर समय दिया जाता है — थोड़ा रुककर उसका रंग और ख़ून का बहाव फिर देखा जाता है, जैसे किसी भी मुड़ी आँत में — और उसके बाद ही कुछ निकालने का फ़ैसला।
| क्या मिला | क्या किया जाता है |
|---|---|
| सीधा करने के बाद पेट स्वस्थ, मरीज़ स्थिर | पेट में वापस, hernia की थैली निकालना, पर्दे का छेद बंद, पेट को बाँधना (gastropexy), wrap के साथ या बिना |
| पेट स्वस्थ, पर मरीज़ बुज़ुर्ग या अस्थिर | जानबूझकर छोटा operation: सिर्फ़ सीधा करके बाँध देना — विस्तृत मरम्मत से ज़्यादा समझदारी |
| पेट का हिस्सा या पूरा पेट मर चुका | मरा हुआ हिस्सा निकालना (partial या total gastrectomy) और जोड़ — बड़ा और ज़्यादा जोखिम वाला operation |
| पेट फट चुका | नुकसान वाला हिस्सा निकालना, धुलाई, और अभी जोड़ना या चरणों में — इसका फ़ैसला |
कमज़ोर मरीज़, जो तुरंत बड़ा operation नहीं सह सकता, उसमें पेट को endoscopy से सीधा करके त्वचा से डाली गई दो feeding-tube की खूँटियों से पेट की सामने की दीवार से बाँधा जा सकता है (endoscopic reduction with double PEG gastropexy)। यह स्थापित, कम चीर-फाड़ वाला विकल्प है जो पेट को जगह पर रखता है और फिर मुड़ने से रोकता है — सही मरीज़ के लिए यह सोच-समझकर लिया गया फ़ैसला है, समझौता नहीं।
कोई तकलीफ़ न देने वाला बड़ा paraoesophageal hernia अपने-आप operation नहीं माँगता। अमेरिका की surgical society (SAGES) की 2024 की guideline इसे निगरानी में रखने का समर्थन करती है — “हर बड़े hernia की मरम्मत करो ताकि मरोड़ न हो” वाली पुरानी सीख के उलट। अचानक emergency का ख़तरा पहले माने गए से कम है, और योजनाबद्ध मरम्मत के अपने जोखिम हैं, साथ ही बाद के X-ray में hernia फिर दिखने की असली संभावना।
निगरानी एक सक्रिय योजना है, टाल देना नहीं। मरीज़ और परिवार को लिखकर दिया जाता है कि मरोड़ कैसा लगता है — अचानक तेज़ दर्द, उल्टी का ज़ोर पर कुछ न निकलना, कुछ भी पेट में न टिकना — और ऐसा हो तो OPD का इंतज़ार नहीं, सीधे emergency। खाना थोड़ा-थोड़ा और बार-बार, भारी खाने के बाद तुरंत न लेटना, reflux और Cameron lesions के लिए acid घटाने वाली गोली, iron की पूर्ति, और इलाज के बाद hemoglobin दोबारा। तकलीफ़ शुरू हो या iron के बावजूद कमी लौटे, तो फ़ैसला फिर खोला जाता है।
योजनाबद्ध मरम्मत उस hernia के लिए है जो असली तकलीफ़ दे — निगलने में दिक्कत, खाने के बाद दर्द, जल्दी पेट भरना, उल्टी या साँस फूलना — और पेट के निकास में रुकावट, गोली से काबू न होने वाला गंभीर reflux, गंभीर या बार-बार की iron की कमी, आते-जाते मरोड़ जैसे दौरे, और पेट का ख़ून रुकने का कोई भी संकेत — जो इसे urgent बनाता है।
हर मरम्मत पहले मरीज़, परिवार और ज़रूरत हो तो anaesthetist व physician के साथ चर्चा होती है। Operation से पहले पोषण सुधारा जाता है, iron पूरा किया जाता है, बीड़ी-सिगरेट बंद, हो सके तो वज़न घटाया जाता है — ज़्यादा वज़न hernia लौटने की संभावना बढ़ाता है — और साँस बेहतर की जाती है, क्योंकि सीने में पड़ा बड़ा पेट फेफड़ों को दबाता है।
योजनाबद्ध मरम्मत आमतौर पर दूरबीन से होती है। पेट को वापस नीचे लाया जाता है, hernia की थैली सीने से पूरी निकाली जाती है, नली को इतना छुड़ाया जाता है कि अच्छा हिस्सा बिना खिंचाव पेट में रहे, पर्दे का छेद बंद होता है, और wrap व बाँधने वाले टाँके पेट को उसकी जगह रखते हैं।
| कदम | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| सभी अंग पेट में वापस | पेट और दूसरे अंग अपनी जगह |
| Hernia की पूरी थैली सीने से निकालना | अहम कदम जो अक्सर अधूरा रह जाता है; बची थैली hernia को वापस बुलाती है |
| सीने में खाने की नली को छुड़ाना | पर्याप्त नली बिना खिंचाव पेट में — छोटी नली hernia लौटने का आम कारण |
| ज़रूरत हो तभी नली लंबी करना (Collis) | सच में छोटी नली जो पर्याप्त नीचे न आए |
| पर्दे का छेद पीछे से बंद करना | बिना खिंचाव, ज़रूरत हो तो ढील देने वाले चीरे के साथ |
| Wrap (fundoplication) | Reflux काबू करता है और पेट को टिकाने में मदद करता है; नली के दबाव के अनुसार पूरा या आधा |
| Mesh — मरीज़ के अनुसार | 2024 की guideline ने mesh के पक्ष या विपक्ष में कोई सिफ़ारिश नहीं की; लगे तो कारण लिखा जाता है, क्योंकि mesh नली में घिस सकती है या उसे सिकोड़ सकती है |
| Gastropexy (पेट को बाँधना) | उपयोगी जोड़, और कमज़ोर मरीज़ में पूरी मरम्मत का विकल्प |
दूरबीन मरम्मत मानक है। Operation के दौरान endoscopy से wrap जाँचा जा सकता है और पक्का किया जा सकता है कि कोई चोट नहीं।
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“Excellent doctor. I have undergone Surgery for toupet fundoplication with harsh Shah doctor. Sir has given good treatment for early recovery. Treating patients very friendly. — Ravi Bob, Google review”
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“Dr. Harsh Shah is an excellent doctor who handled our case with great diligence and care. He listens attentively and addresses every concern with utmost patience. He's very humble and answers all of your questions in detail which is very assuring. I would highly recommend Dr. Harsh Shah for consultation and treatment. — Srinath Vasudevan, Google review”
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“He is simple and straight conversation person. Explains the procedure and process to prepare the patient mentally for the surgery which makes patients comfortable during the process. He is also very patient enough to hear all problems of his patients which makes him an approachable doctor. — palak thareja, Google review”
Dr Harsh Shah की दो listings से असली Google reviews, जैसे लिखे गए वैसे ही।
योजनाबद्ध दूरबीन मरम्मत के बाद मरीज़ उसी दिन बिस्तर से उठकर बैठता है, अगले दिन तरल लेता है, और आमतौर पर दूसरे या तीसरे दिन चरणबद्ध खुराक की योजना के साथ घर जाता है — तरल, फिर नरम, फिर सामान्य खाना, कुछ हफ़्तों में, dietitian की मदद से। Emergency operation के बाद रिकवरी इस पर निर्भर है कि कितना पेट बचा, और ICU से शुरू हो सकती है।
उल्टी का ज़ोर नई मरम्मत खोल सकता है, इसलिए उल्टी रोकने की दवा भरपूर दी जाती है और घर पर भी चलती है। शुरू के हफ़्तों में भारी वज़न उठाना और ज़ोर लगाना मना। Operation के बाद contrast जाँच सिर्फ़ कारण हो तो। ख़ून की कमी मरम्मत का कारण थी तो iron जारी। बुख़ार, तेज़ धड़कन, सीने में दर्द, थूक भी न निगल पाना, साँस फूलना या उल्टी का ज़ोर — तो तुरंत team से संपर्क। Emergency में पूरा पेट निकालना पड़ा हो, तो खाने का तरीका जीवन भर बदलता है: थोड़ा-थोड़ा और बार-बार, dietitian की मदद, और नियमित vitamin B12 के injection।
योजनाबद्ध मरम्मत के असली जोखिम हैं, और एक बात हर consent चर्चा में ज़ोर देकर कही जाती है: बाद के X-ray में hernia अक्सर फिर दिखता है, हालाँकि ज़्यादातर छोटा होता है और तकलीफ़ नहीं देता, और कुछ ही को दोबारा operation चाहिए। मरे हुए पेट के emergency operation में जान का जोखिम ऊँचा है। हर मरीज़ पर लागू आँकड़े Dr Harsh Shah consent की चर्चा में देते हैं।
योजनाबद्ध मरम्मत: ख़ून बहना, संक्रमण, पैर या फेफड़े में clot, दिल या साँस की तकलीफ़, दूरबीन से open में बदलना, नली या पेट में चोट, फेफड़े के पास हवा या पानी (आमतौर पर बिना drain संभलता है), शुरू में आम और ज़्यादातर कम होने वाली निगलने की दिक्कत, wrap के बाद पेट फूलना और डकार या उल्टी न आ पाना, पेट का देर से ख़ाली होना, mesh लगे तो उसकी दिक्कतें, और hernia का लौटना। Emergency operation: किसी भी जोड़ से leak, सीने की तकलीफ़, ICU की ज़रूरत, और — पेट मर चुका हो तो — पेट का हिस्सा या पूरा निकालने का असर। कमज़ोर मरीज़ में छोटा, सिर्फ़ सीधा करके बाँधने वाला operation जानबूझकर सुरक्षित रास्ते के रूप में चुना जा सकता है।
Follow-up तकलीफ़ पर आधारित है, नियमित X-ray पर नहीं। जाँच दो से छह हफ़्ते पर (घाव, खुराक का चरण, निगलना, dietitian), तीन महीने पर (तकलीफ़, वज़न, और कमी कारण थी तो iron) और छह से बारह महीने पर। स्वस्थ व्यक्ति में X-ray दोबारा नहीं किया जाता, क्योंकि अचानक दिखा छोटा लौटा hernia शायद ही कुछ बदलता है और अक्सर बेकार की चिंता देता है।
मरम्मत के बाद नई तकलीफ़ — reflux, दर्द, निगलने में दिक्कत या ख़ून की कमी — हो तो contrast जाँच और endoscopy; ज़्यादातर छोटे लौटे hernia में पहले तकलीफ़ का इलाज। दोबारा operation से पहले पूरी चर्चा। Mesh वाले मरीज़ नई निगलने की दिक्कत, ख़ून या दर्द तुरंत बताएँ। निगरानी वाले hernia के मरीज़ चेतावनी-संकेतों की लिखी सूची साथ रखें और OPD में दिखाते रहें।
योजनाबद्ध मरम्मत का ख़र्च तरीके, mesh लगे या नहीं, और अस्पताल के दिनों पर। Emergency operation का ख़र्च operation में क्या मिला, ICU के दिन और रुकने की अवधि पर। निगरानी में सिर्फ़ OPD और गोलियों का ख़र्च। लिखित अनुमान देकर समझाया जाता है।
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad बड़ी insurance कंपनियों और cashless योजनाओं के साथ काम करता है, और pre-authorisation दफ़्तर सीधे संभालता है; emergency भर्ती की सूचना insurer को उसी समय दी जाती है, और रुकना अनुमान से लंबा हो तो enhancement का अनुरोध तभी — discharge के समय नहीं।
साथ लाएँ: CT की images (disc या drive पर) और report, endoscopy की reports और photo, contrast जाँच की images, ताज़ा hemoglobin और iron की जाँच, सभी दवाओं की सूची (ख़ून पतला करने वाली दवा ख़ास तौर पर), पहले के hernia operation के discharge काग़ज़, insurance card और पहचान पत्र।
हो सकता है। पर्दे के तंग छेद में पेट रगड़ने से उसकी सिलवटों पर उथली खरोंचें बनती हैं जिनसे धीरे-धीरे ख़ून रिसता है। Endoscopy से बाकी कारण ख़ारिज कर, गोली और iron के बाद भी कमी लौटे तो मरम्मत का कारण मज़बूत होता है।
पेट के ऊपरी हिस्से या सीने के निचले हिस्से में अचानक तेज़ दर्द, उल्टी का ज़ोर पर कुछ बाहर न आना, और अक्सर कुछ भी निगल न पाना। Hiatus hernia के मरीज़ में यह तुरंत emergency है।
अपने-आप नहीं। बिना तकलीफ़ वाले बड़े paraoesophageal hernia को निगरानी में रखना आज की guideline के अनुसार सुरक्षित है, और मरोड़ के संकेत लिखकर दिए जाते हैं।
नाक की नली दबाव घटाकर समय दिला सकती है, पर operation की जगह नहीं लेती। कमज़ोर मरीज़ में पेट को endoscopy से सीधा करके त्वचा से डाली दो खूँटियों से बाँधा जा सकता है।
बाद के X-ray में अक्सर फिर दिखता है, पर ज़्यादातर छोटा होता है और तकलीफ़ नहीं देता। इसलिए follow-up तकलीफ़ पर आधारित है, नियमित X-ray पर नहीं।
तरल, फिर नरम, फिर सामान्य खाना — कुछ हफ़्तों में, dietitian की बताई चरणबद्ध योजना से। शुरू के हफ़्तों में भारी वज़न उठाना और ज़ोर लगाना मना है, और उल्टी रोकने की दवा समय पर लें।
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Dr Jivraj Mehta Marg, Vasna, Ahmedabad 380007.
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पेट के ऊपरी हिस्से या सीने के निचले हिस्से में अचानक तेज़ दर्द, और उल्टी का ज़ोर लगाने पर भी कुछ बाहर न आए? तुरंत नज़दीकी emergency विभाग जाएँ — यह जवाब का इंतज़ार नहीं कर सकता। Scan में बड़ा hiatus hernia दिखा हो या ख़ून की कमी बार-बार हो, तो CT, endoscopy और contrast जाँच की reports, hemoglobin और iron की जाँच appointment से पहले भेजी जा सकती है, ताकि consultation शुरू होने तक वे पढ़ी जा चुकी हों। इलाज consultation में, जाँच के बाद ही तय होता है। Call +91-63555-64601 · Reports पहले WhatsApp पर भेजें
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