Skip to main contentShah's Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre · अहमदाबाद और गांधीनगर
Hepatocellular carcinoma (liver cancer) का इलाज, अहमदाबाद · Gota OPD, अहमदाबाद · Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर
“सालों से hepatitis B की गोली चल रही थी, और अब sonography में लिवर में गाँठ दिखी है। कोई कहता है operation, कोई कहता है transplant — सही रास्ता कौन-सा है?” यह उलझन बहुत परिवारों की होती है। Hepatocellular carcinoma (HCC) लगभग हमेशा पहले से बीमार लिवर में उगता है — hepatitis B या C, शराब या fatty liver से। इसलिए दो बीमारियों का इलाज एक साथ होता है: गाँठ का, और उसके आसपास के लिवर का। गाँठें कितनी और कितनी बड़ी, बाकी लिवर कितना काम करता है, और मरीज़ कितना सक्षम है — ये तीनों मिलकर तय करते हैं कि गाँठ निकालना, लिवर transplant, सुई से जलाना (ablation), नस से chemotherapy (TACE) या दवा — कौन-सा इलाज सही है।
HCC वह gastro cancer है जहाँ अकेले एक specialist का फ़ैसला बहुत नुकसान कर सकता है। Surgeon, लिवर के physician (hepatologist), ablation और TACE करने वाले interventional radiologist, oncologist और transplant team — हर मरीज़ को इलाज शुरू होने से पहले साथ देखते हैं, और जल्दी, जब सारे विकल्प अभी खुले हों।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre. Super-specialty surgical gastroenterology में training, इसी विषय में दो बार योग्यता, और लिवर व gastro cancer की surgery में 18 साल का अनुभव। Multiphase CT और MRI पढ़ना, लिवर की क्षमता की जाँच, open और दूरबीन से लिवर का operation, ablation, TACE और दवा वाले इलाज का तालमेल, transplant के लिए भेजना और जीवन भर की निगरानी — सब एक ही practice में।
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Liver Cancer Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad
Google rating: Gota clinic पर 216 reviews में 4.89, और Apollo, Bhat पर 18 reviews में 4.94।
HCC लिवर की अपनी कोशिकाओं से शुरू होने वाला cancer है। ज़्यादातर यह cirrhosis (लिवर में स्थायी निशान) वाले व्यक्ति में होता है — कारण कोई भी हो — लंबे समय के hepatitis B वाले में बिना cirrhosis के भी, और fatty liver से गंभीर निशान वाले लोगों में; यह आख़िरी कारण भारत में बढ़ता जा रहा है। हर इलाज की सीमा गाँठ नहीं, लिवर की बची हुई ताक़त तय करती है।
हर मरीज़ में, हर चरण पर, लिवर की बीमारी के कारण का इलाज होता है: hepatitis B को दबाने के लिए antiviral गोली, hepatitis C को ख़त्म करने वाली दवा, शराब छोड़ने में मदद, और fatty liver में वज़न, diabetes और चर्बी पर काबू। यह कोई अतिरिक्त बात नहीं — गाँठ से अलग, यह लंबी अवधि का जीवन बदलती है।
इसीलिए hepatitis B की गोली cancer मिलने के बाद बंद नहीं होती, बल्कि और ज़रूरी हो जाती है। Virus का स्तर, गोली की नियमितता और लिवर की जाँच हर मुलाक़ात पर देखी जाती है। Hepatitis B वाले परिवार के बाकी सदस्यों की जाँच और टीकाकरण की बात भी उसी समय की जाती है।
HCC के लक्षण आने से पहले पकड़ा जाए, तो इलाज के लिए वह अनुकूल समय होता है। जोखिम वाले लोग — हर cirrhosis वाला, कुछ hepatitis B वाले, और fatty liver से गंभीर निशान वाले — हर छह महीने लिवर की sonography, AFP ख़ून की जाँच के साथ या बिना, कराएँ। इस तरह पकड़ी गई छोटी गाँठ, उसे पूरी तरह हटाने के इरादे वाले इलाज के लिए ज़्यादा बार उपयुक्त होती है।
Hepatitis B में बिना cirrhosis के भी — बड़ी उम्र के पुरुष और महिलाएँ, परिवार में liver cancer का इतिहास, या virus का ऊँचा स्तर — यह जाँच ज़रूरी है। बहुत कमज़ोर लिवर वालों को यह जाँच तभी, जब transplant का मूल्यांकन चल रहा हो। नई European guideline सबके लिए एक ही अंतराल के बजाय व्यक्ति के जोखिम के हिसाब से अंतराल तय करने की ओर है।
जोखिम वाले लिवर में HCC का निदान आमतौर पर scan से होता है, biopsy से नहीं। एक सेंटीमीटर से बड़ी गाँठ जो contrast के साथ अलग-अलग चरणों में लिए गए CT या MRI में ख़ास पैटर्न दिखाए — arterial चरण में तेज़ चमके और बाद के चरण में “धुल जाए” (washout) — वह HCC है, और biopsy की ज़रूरत नहीं।
Radiologist इन scans को एक तय तरीके (LI-RADS) से report करते हैं, ताकि साफ़ हो कि गाँठ benign, शायद benign, अनिश्चित, शायद HCC या पक्का HCC है। Biopsy तभी: जब scan का पैटर्न सामान्य न हो, लिवर में cirrhosis न हो, या दवा से इलाज होना हो और निदान सच में संदेह में हो। Biopsy में सुई के रास्ते cancer कोशिकाएँ फैलने का छोटा जोखिम है। एक सेंटीमीटर से छोटी गाँठ में biopsy नहीं, तीन-चार महीने बाद फिर scan।
लिवर में दिखने वाली हर गाँठ cancer नहीं। Cirrhosis में दोबारा उगने वाली गाँठें (regenerative nodules), haemangioma, cyst और दूसरी benign गाँठें आम हैं, और multiphase scan का पैटर्न और उसकी तय report उन्हें HCC से अलग करती है। लिवर में दूसरे cancer भी दिख सकते हैं — लिवर के अंदर की पित्त नली का cancer, या आँत या किसी दूसरे अंग से फैला — और हर एक के इलाज का रास्ता अलग है।
किसी भी इलाज से पहले गाँठ का नक्शा, शरीर के बाकी हिस्से की जाँच, और लिवर की ताक़त का माप। यानी लिवर का multiphase CT या MRI और सीने का CT; लिवर का काम, ख़ून जमने की क्षमता और platelets; लिवर की नसों में दबाव बढ़ा है या नहीं; AFP; लिवर की बीमारी का कारण; और मरीज़ की रोज़मर्रा की क्षमता।
| जाँच | उससे क्या तय होता है |
|---|---|
| लिवर का multiphase CT और/या MRI | निदान, गाँठों की संख्या और आकार, बड़ी नसों में गाँठ घुसी है या नहीं |
| सीने का CT | Cancer लिवर के बाहर फैला है या नहीं |
| Child-Pugh score और ALBI grade (bilirubin, albumin, INR, पेट में पानी, भ्रम) | लिवर में कितनी ताक़त बची है — हर इलाज का दरवाज़ा |
| Platelets, तिल्ली का आकार, varices के लिए endoscopy | लिवर की नसों में अहम दबाव (portal hypertension) — बड़े operation में व्यावहारिक रुकावट; कुछ दवाओं से पहले varices का इलाज ज़रूरी |
| AFP | शुरुआती अंक और समय के साथ देखने वाला marker — अकेले निदान नहीं |
| Hepatitis B और C, शराब का इतिहास, metabolic जाँच | लिवर की बीमारी का कारण, जिसका इलाज हर मरीज़ में होता है |
| Performance status (रोज़मर्रा की क्षमता) | मरीज़ हर इलाज सुरक्षित रूप से ले सकता है या नहीं |
| Volumetry (बचने वाले लिवर का माप) | बड़े operation से पहले — काम करने लायक लिवर बचेगा या नहीं |
Child-Pugh वर्ग लिवर को तीन हिस्सों में बाँटता है: अच्छी तरह संभालने वाला (class A), मध्यम रूप से कमज़ोर (class B), और विफल होता हुआ (class C)। Operation (resection) class A लिवर, normal bilirubin और बिना portal hypertension वाले मरीज़ के लिए है। Class B में दवा से फ़ायदा बहुत कम और साइड-इफ़ेक्ट ज़्यादा। Class C लिवर में cancer के लिए operation, TACE या दवा नहीं — सवाल transplant के मूल्यांकन या सहायक देखभाल का बनता है।
दूसरा माप, ALBI grade, bilirubin और albumin से तस्वीर और साफ़ करता है, और दोनों हर मरीज़ के record में लिखे जाते हैं। लिवर की नसों में बढ़ा दबाव — कम platelets और varices से दिखे, या सीधे नापा जाए — वही व्यावहारिक कारण है कि तकनीकी रूप से निकल सकने वाली गाँठ नहीं निकाली जाती: बचा लिवर विफल हो जाता।
Barcelona (BCLC) प्रणाली गाँठ का आकार और संख्या, लिवर की ताक़त और क्षमता को पहले इलाज से जोड़ती है। बहुत शुरुआती और शुरुआती HCC — एक छोटी गाँठ, या तीन तक छोटी — operation, ablation या transplant। बीच का HCC — लिवर में कई गाँठें — TACE, और कुछ में गाँठ छोटी होने के बाद transplant। आगे बढ़ा HCC, मुख्य नस में या लिवर के बाहर फैला — दवा। विफल लिवर वाली अंतिम अवस्था — सहायक देखभाल।
| चरण | गाँठ | लिवर और क्षमता | आम पहला इलाज |
|---|---|---|---|
| बहुत शुरुआती | दो सेंटीमीटर तक की एक गाँठ | Child-Pugh A, पूरी तरह सक्रिय | Operation या ablation |
| शुरुआती | एक गाँठ, या तीन तक — हर एक तीन सेंटीमीटर तक | Child-Pugh A या B, पूरी तरह सक्रिय | Operation, ablation या transplant |
| बीच का | कई गाँठें, transplant की सीमा से ज़्यादा | Child-Pugh A या B, पूरी तरह सक्रिय | TACE; कुछ मरीज़ों में गाँठ छोटी होने के बाद transplant; TACE उपयुक्त न हो या विफल हो तो दवा |
| आगे बढ़ा | Portal vein में गाँठ, या लिवर के बाहर फैलाव | Child-Pugh A या B, थोड़े सीमित | दवा (पहले immunotherapy की जोड़ी) |
| अंतिम | कोई भी | Child-Pugh C, या दिन का ज़्यादातर समय बिस्तर पर | सहायक देखभाल; बाकी तरह से योग्य हो तभी transplant का मूल्यांकन |
चरण शुरुआत का बिंदु देता है, आख़िरी जवाब नहीं। Team मरीज़ को नक्शे पर ऊपर-नीचे कर सकती है — जैसे मज़बूत लिवर और एक बड़ी गाँठ वाले सक्षम मरीज़ को operation, या TACE के काम न करने के आसार हों तो जल्दी दवा। ये फ़ैसले मिलकर, हर मरीज़ के लिए अलग होते हैं।
लिवर transplant cancer और उसे जन्म देने वाले बीमार लिवर — दोनों को हटा देता है। यह Milan सीमा वाले HCC के लिए सोचा जाता है — पाँच सेंटीमीटर तक की एक गाँठ, या तीन तक गाँठें जिनमें कोई तीन सेंटीमीटर से बड़ी न हो, बड़ी नस में घुसपैठ नहीं और फैलाव नहीं — या इलाज से इस सीमा में लाई गई गाँठों के लिए।
भारत में ज़्यादातर transplant जीवित दाता — आमतौर पर परिवार के सदस्य — से होते हैं, क्योंकि मृत दाता के लिवर का इंतज़ार लंबा और अनिश्चित है। मरीज़ transplant से चूक जाए, इसका आम कारण अयोग्यता नहीं, देर से भेजना है — इसलिए हर संभावित मरीज़ से transplant की बात पहली ही मुलाक़ात में होती है, बाकी इलाज ख़त्म होने के बाद नहीं। इंतज़ार के दौरान ablation या TACE से गाँठ को रोका जाता है। Guideline के अनुसार transplant सही हो पर संभव न हो — जैसे उपयुक्त दाता न मिले — तो कारण ईमानदारी से बताया और लिखा जाता है, और operation या ablation खुलकर चुना जाता है, चुपचाप नहीं।
मज़बूत लिवर (Child-Pugh A, normal bilirubin, अहम portal hypertension नहीं) में एक गाँठ — यह operation के लिए उपयुक्त है। गाँठ वाला लिवर का हिस्सा, जहाँ संभव हो उसकी ख़ून की नसों की रेखा के अनुसार, साफ़ किनारे के साथ निकाला जाता है — और काम करने लायक स्वस्थ लिवर छोड़ा जाता है; cirrhosis वाले लिवर में सामान्य लिवर से ज़्यादा छोड़ना पड़ता है।
किसी भी बड़े operation से पहले बचने वाला लिवर scan पर नापा जाता है। कम हो तो गाँठ वाली तरफ़ की ख़ून की नस पहले से बंद की जाती है (portal vein embolisation), ताकि दूसरी तरफ़ बढ़े। कम लिवर छोड़ने के बजाय पतला किनारा स्वीकार किया जाता है। हर operation में पेट के अंदर ultrasound होता है, क्योंकि यह अक्सर योजना बदल देता है। दूरबीन (laparoscopic या robotic) लिवर operation को मौजूदा European guideline का समर्थन है, और लिवर की सतह की या बाईं बाहरी गाँठ के लिए यही पसंद है — पेट में कम पानी और घाव की कम दिक्कत, जो cirrhosis में मददगार है। Operation के बाद किसी दवा का फ़ायदा अभी साबित नहीं, इसलिए operation के बाद अतिरिक्त इलाज नहीं, सावधान निगरानी।
Radiofrequency या microwave ablation में scan की मदद से सुई गाँठ में डालकर गर्मी से उसे नष्ट किया जाता है। बहुत शुरुआती और शुरुआती, लगभग तीन सेंटीमीटर तक के HCC में यह गाँठ पूरी तरह हटाने के इरादे वाला इलाज है — ख़ास तौर पर जहाँ लिवर की कमज़ोरी operation रोकती हो; दो सेंटीमीटर तक की गाँठ में इसके नतीजे operation के क़रीब हैं।
ज़्यादातर मरीज़ों में कोई चीरा नहीं और लिवर बचता है — cirrhosis में यह अहम है। सीमा गाँठ का आकार और जगह है — बड़ी नस, आँत या पर्दे के पास हो तो दूसरा तरीका ज़्यादा सुरक्षित। Ablation और TACE दोनों उपयुक्त न हों तो कुछ मरीज़ों में केंद्रित radiotherapy (SBRT) विकल्प है।
TACE में जाँघ या कलाई से पतली नली डालकर chemotherapy सीधे गाँठ की नस में दी जाती है और फिर वह नस बंद की जाती है। बीच के HCC का यह मानक इलाज है। हर बार के बाद असर जाँचा जाता है, और दो बार काम न करे तो TACE बंद — क्योंकि बेकार दोहराना लिवर को नुकसान पहुँचाता है और बाद में दवा का मौका छीन सकता है।
Radioembolisation (TARE, Y-90) में chemotherapy की जगह छोटे radioactive मनके गाँठ की नस में रखे जाते हैं। कुछ मरीज़ों में यह विकल्प है — portal vein में गाँठ वाले कुछ मरीज़ों में भी — और गाँठ छोटी करने या operation से पहले लिवर की दूसरी तरफ़ बढ़ाने में काम आ सकता है। TACE के बाद कुछ दिन बुख़ार, दर्द और मतली अपेक्षित है; लंबा बुख़ार या दर्द, या आँखें पीली हों तो जाँच ज़रूरी।
आगे बढ़े HCC में, या TACE के बाद बढ़े या TACE न ले सकने वाले बीच के HCC में, दवा पहला इलाज है। पहली पसंद immunotherapy और गाँठ की ख़ून की नसें रोकने वाली दवा की जोड़ी (atezolizumab के साथ bevacizumab); ख़ून बहने का जोखिम ज़्यादा हो तो दूसरी immunotherapy जोड़ी (durvalumab के साथ tremelimumab); immunotherapy उपयुक्त न हो तो lenvatinib या sorafenib जैसी गोली।
Bevacizumab और बिना इलाज वाली varices का मेल ख़तरनाक है, इसलिए पहले endoscopy और varices का इलाज। पहली दवा काम करना बंद करे तो दूसरी दवाएँ उपलब्ध हैं। मध्यम रूप से कमज़ोर लिवर वालों को दवा सोच-समझकर, और विफल लिवर वाले मरीज़ को cancer की दवा नहीं दी जाती।
HCC के बहुत से मरीज़ों का इलाज बिना operation होता है: छोटी गाँठ सुई से जलाई जा सकती है, बीच का HCC नस के रास्ते, और आगे बढ़ा HCC दवा से। गाँठ निकल सकती हो पर लिवर उसे सह न सके — विफल होता cirrhosis, अहम portal hypertension, या बहुत कम बचने वाला लिवर — तब भी operation नहीं।
HCC फटकर पेट में ख़ून बहे तो यह emergency है, पर तब भी पहला कदम आमतौर पर तुरंत open operation नहीं, बल्कि नली से ख़ून बहने वाली नस बंद करना (angioembolisation) है; मरीज़ स्थिर हो जाए तो बाद में योजनाबद्ध operation हो सकता है। और विफल लिवर व कमज़ोर क्षमता वाले मरीज़ के लिए सहायक देखभाल और — योग्य हो तो — transplant का मूल्यांकन सही है, उम्र घटाने वाला इलाज नहीं।
Dr Harsh Shah का video देखें: Liver Cancer क्या है — कारण, लक्षण, जाँच और इलाज (YouTube, हिंदी)।
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“Met with Dr. Harsh Shah for the consultation of one of my relative. Dr. Harsh Shah is an exceptional surgical oncologist in Ahmedabad. His expertise in treating complex GI cancers like liver, pancreas, and colon cancers is truly remarkable. He explains everything clearly and gives patients full confidence in their treatment. Highly recommended for anyone looking for a skilled and compassionate cancer specialist. — Nagesh Patidar, Google review, Gota clinic listing”
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“Dr harsh sir is a good doctor for Liver, Gastro & Cancer Surgeon in Ahmedabad thanks sir. — Milan Pareek, Google review, Gota clinic listing”
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“We are very thankful to Dr. Harsh Shah for treating and operating on my father for gastric (stomach) cancer. From the first consultation to the surgery and follow-up, he guided us with great care and explained everything clearly. My father is doing well now, and we are extremely grateful for the treatment and support provided by Dr. Harsh Shah and his team. He is a highly experienced and compassionate doctor. We would definitely recommend Dr. Harsh Shah to anyone looking for an experienced doctor for stomach cancer treatment. Thank you, Doctor, for everything! — Moh. Ahsan, Google review, Apollo, Bhat listing”
Dr Harsh Shah की दो listings से असली Google reviews, जैसे लिखे गए वैसे ही।
ज़्यादातर मरीज़ operation के दिन ही बैठते हैं और तरल लेते हैं, अगले दिन खाते और चलते हैं, और छोटे या दूरबीन operation के बाद कुछ दिनों में घर जाते हैं — cirrhosis में बड़े operation के बाद ज़्यादा समय। लिवर की ख़ून की जाँच और INR रोज़ देखे जाते हैं, क्योंकि पहले पाँच दिनों का उनका रुझान बताता है कि बचा लिवर संभाल पा रहा है या नहीं।
साधारण operation के बाद आमतौर पर drain नहीं लगता। Cirrhosis में paracetamol की dose सावधानी से। पेट में पानी भरना, भ्रम या नींद-सी, बढ़ता पीलिया, drain में पित्त, बुख़ार या तेज़ धड़कन — तुरंत जाँच। मरीज़ घर तब जाता है जब खाए, चले, बुख़ार न हो और लिवर की जाँच सुधर रही हो — और hepatitis, शराब या metabolic इलाज की लिखित योजना के साथ, जो जारी रहनी ही चाहिए।
HCC के हर इलाज का जोखिम गाँठ के आसपास के लिवर पर बहुत निर्भर है। Operation के बाद जिस तकलीफ़ को ख़ास तौर पर गंभीर माना जाता है, वह है बचे हुए लिवर का विफल होना। Cancer का सालों में लिवर में कहीं और फिर दिखना भी आम है, क्योंकि पूरा लिवर जोखिम में रहता है। हर मरीज़ के अपने लिवर पर लागू आँकड़े — सब कुछ आसान मानकर नहीं, बल्कि उसी मरीज़ के — Dr Harsh Shah consent की चर्चा में देते हैं।
Operation के बाद: ख़ून बहना और ख़ून चढ़ाना, घाव में संक्रमण, पैर या फेफड़े में clot, दिल या साँस की तकलीफ़, दूरबीन से open में बदलना, बचे लिवर का विफल होना, bile leak, पेट में पीप या पानी का जमाव, cirrhosis में लंबे समय तक पेट में पानी, फेफड़े के पास पानी, लिवर की नसों में clot, और दोबारा operation। Cirrhosis में लिवर की हालत बिगड़ सकती है — पीलिया, पानी, भ्रम या varices से ख़ून — और पूरी तरह न सुधरे। Ablation या TACE के बाद: दर्द और बुख़ार, लिवर में पीप, और लिवर का काम बिगड़ना। दवा: हर दवा के अपने साइड-इफ़ेक्ट, पहली dose से पहले बताए जाते हैं।
इलाज के बाद दो साल हर तीन महीने — जाँच, AFP, लिवर की reports और multiphase CT या MRI — फिर पाँच साल तक हर छह महीने, और उसके बाद जीवन भर हर छह महीने, क्योंकि cirrhosis वाला लिवर नई गाँठें बनाता रह सकता है। जल्दी पकड़ी गई नई गाँठ का इलाज अब भी संभव हो सकता है — इसलिए यह कार्यक्रम वैकल्पिक नहीं।
दो हफ़्ते पर histology की चर्चा और hepatitis, शराब या fatty liver की योजना पक्की। Antiviral की नियमितता और virus का स्तर, शराब छोड़ने में मदद, metabolic काबू और varices के लिए endoscopy — अपने-अपने कार्यक्रम के अनुसार। Scan normal हो पर AFP बढ़े तो तीन महीने में फिर scan, और पहले CT हुआ हो तो MRI। Transplant के उम्मीदवार अपना मूल्यांकन ताज़ा रखें और समय पर bridging इलाज लें।
ख़र्च इलाज पर निर्भर है: operation कितना बड़ा और कितने दिन, ablation या TACE कितनी बार, या कौन-सी दवा और कितने समय। इलाज से पहले लिखित अनुमान देकर समझाया जाता है।
Apollo Hospital, Bhat बड़ी insurance कंपनियों और cashless योजनाओं के साथ काम करता है, और pre-authorisation दफ़्तर सीधे संभालता है। कुछ cancer दवाएँ और transplant के कुछ ख़र्च insurance और सरकारी योजनाओं में अलग तरह से आते हैं; योजना तय होने से पहले यह जाँचा जाता है, ताकि ख़र्च चुपचाप इलाज तय न कर दे।
साथ लाएँ: CT और MRI की images (disc या drive पर) और reports, लिवर की reports, AFP, INR और ख़ून की गिनती, hepatitis B और C की reports, endoscopy reports, पहले के इलाज के discharge काग़ज़, दवाओं की सूची, insurance card और पहचान पत्र — और transplant की बात होनी हो तो, लिवर दे सकने वाले परिवार के सदस्य को।
यह गाँठ और लिवर दोनों पर निर्भर है। मज़बूत लिवर में एक गाँठ के लिए operation उपयुक्त है; cirrhosis वाले लिवर में Milan सीमा के भीतर की गाँठ के लिए transplant गाँठ और बीमार लिवर दोनों हटाता है। Transplant की बात पहली मुलाक़ात में ही होती है।
नहीं। Cancer मिलने के बाद hepatitis B का इलाज और ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि यह लिवर को बचाता है और लंबी अवधि का नतीजा बदलता है।
जोखिम वाले लिवर में एक सेंटीमीटर से बड़ी गाँठ multiphase CT या MRI में ख़ास पैटर्न दिखाए तो वह HCC है, biopsy ज़रूरी नहीं। पैटर्न असामान्य हो या संदेह हो, तभी biopsy।
भारत में ज़्यादातर transplant जीवित दाता — आमतौर पर परिवार के सदस्य — से होते हैं। उपयुक्तता की जाँच transplant team करती है।
हर बार के बाद असर जाँचा जाता है। दो बार काम न करे तो TACE बंद किया जाता है, ताकि लिवर को नुकसान न हो और दवा का मौका बना रहे।
हाँ, लिवर में कहीं और नई गाँठ बनना आम है, क्योंकि पूरा लिवर जोखिम में रहता है। इसलिए जीवन भर नियमित scan और AFP ज़रूरी हैं।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, Ahmedabad
Consultation, scan और लिवर reports देखना, इलाज के बाद follow-up और नियमित निगरानी।
Google: Dr Harsh Shah · 216 reviews में 4.89
Gota clinic का रास्ता · +91-63555-64601
Apollo Hospital — Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar.
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 18 reviews में 4.94
Apollo, Bhat का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601
Liver cancer के इलाज के लिए पूरे गुजरात से — Gandhinagar, Mehsana, Banaskantha, Nadiad, Anand, Bhavnagar, Rajkot, Jamnagar और Kutch — और दक्षिण राजस्थान तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।
Sonography या CT में लिवर में गाँठ दिखी है, या liver cancer बताया गया है? Triple-phase CT या MRI की images और report, AFP और लिवर की ख़ून की जाँच, hepatitis की reports और endoscopy report appointment से पहले भेजी जा सकती हैं, ताकि consultation शुरू होने तक वे पढ़ी जा चुकी हों। इलाज consultation में, जाँच के बाद ही तय होता है। Call +91-63555-64601 · Reports पहले WhatsApp पर भेजें
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