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Dr. Harsh J Shah

पित्त की पथरी

पित्त की पथरी में कौन सी सब्जी और खाना खाना चाहिए?

Dr Harsh Shah · MS, MCh (GI), DrNB

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पित्त की पथरी में खाने लायक हल्के और रेशेदार भोजन की थाली
संक्षेप में
चर्बी कम और रेशा ज़्यादा वाला खाना सबसे आरामदायक रहता है। लेकिन कोई भी खाना पथरी को गला नहीं सकता — परहेज़ दर्द टालता है, इलाज नहीं करता।
खाने से पथरी पर क्या असर पड़ता है?कौन सी चीज़ें खाना ठीक रहता है?खाने का समय कितना मायने रखता है?क्या घी और तेल पूरी तरह बंद करना पड़ेगा?ऑपरेशन के बाद खाना कैसा रहेगा?डॉक्टर को कब दिखाएं?

खाने से पथरी पर क्या असर पड़ता है?

सही खानपान पित्ताशय को बार-बार ज़ोर से सिकुड़ने से बचाता है, जिससे दर्द के हमले कम होते हैं। लेकिन ये पथरी को घटाता या मिटाता नहीं। खाना दर्द टालने का तरीका है, इलाज का विकल्प नहीं।

समझने का आसान तरीका ये है। पित्ताशय एक थैली है जो पित्त जमा करती है। जैसे ही चिकनाई वाला खाना आंत में पहुंचता है, शरीर संकेत भेजता है और थैली सिकुड़कर पित्त छोड़ती है। अगर पथरी निकास के पास बैठी हो, तो यही सिकुड़न दर्द बन जाती है।

इसलिए खाने का मकसद एक ही है — थैली को अचानक और ज़ोर से सिकुड़ने न देना। जिस पथरी ने एक बार दर्द दिया है, वो परहेज़ के बावजूद दोबारा देगी।

कौन सी चीज़ें खाना ठीक रहता है?

चर्बी कम और रेशा ज़्यादा वाला खाना सबसे आरामदायक रहता है। इससे पित्त धीरे-धीरे छूटता है और थैली पर अचानक दबाव नहीं पड़ता। नीचे रोज़ के खाने में आसानी से शामिल होने वाली चीज़ें दी गई हैं।

क्या खाएं क्यों
हरी सब्ज़ी — पालक, मेथी, लौकी, तोरई, टिंडा fibre ज़्यादा, चर्बी नहीं
दाल, चना, राजमा, मूंग प्रोटीन बिना चिकनाई
ज्वार, बाजरा, ओट्स, दलिया धीमा पचता है
फल — सेब, पपीता, नाशपाती, अमरूद fibre और पानी
छाछ, कम चर्बी वाला दही पचने में हल्का
उबला, भाप में पका या भुना खाना तेल की मात्रा सबसे कम
दिन भर में 8-10 गिलास पानी पित्त गाढ़ा नहीं होने देता

दिन में तीन भारी भोजन के बजाय चार-पांच छोटे हिस्से बेहतर रहते हैं। इससे पित्ताशय पर एक बार में बड़ा दबाव नहीं आता, और थैली नियमित रूप से खाली होती रहती है।

पित्त की पथरी में क्या खाएं और क्या टालें
खाएं और टालें — एक नज़र में

खाने का समय कितना मायने रखता है?

काफी। लंबे समय तक भूखे रहने से पित्त थैली में जमा रहकर गाढ़ा होता है, और यही आगे चलकर नई पथरी बनने का रास्ता खोलता है। नाश्ता छोड़ने की आदत इस मामले में सबसे नुकसानदेह है।

रात का खाना सोने से दो-तीन घंटे पहले रखिए। सोते समय भरी हुई थैली पर दबाव बना रहता है और रात के दर्द की शिकायत अक्सर यहीं से आती है।

क्या घी और तेल पूरी तरह बंद करना पड़ेगा?

नहीं। शरीर को कुछ चर्बी चाहिए ही होती है। बात मात्रा की है, पूरी तरह बंद करने की नहीं। दिन भर में दो-तीन चम्मच तेल या घी ज़्यादातर लोगों के लिए ठीक रहता है।

समस्या तब होती है जब एक ही बार में बहुत ज़्यादा चिकनाई जाए — जैसे तला हुआ नाश्ता, मिठाई, या घी से भरी थाली। ऐसे में थैली ज़ोर से सिकुड़ती है और वहीं दर्द शुरू होता है।

एक चीज़ और ध्यान रखिए। बहुत तेज़ी से वज़न घटाना खुद पथरी बनने का जोखिम बढ़ाता है। अगर वज़न कम करना है तो धीरे-धीरे कीजिए, भूखे रहकर नहीं।

ऑपरेशन के बाद खाना कैसा रहेगा?

पित्ताशय निकलने के बाद पाचन स्थायी रूप से नहीं बिगड़ता। पित्त लीवर बनाता है, थैली सिर्फ जमा करती है। शुरुआती दो-तीन हफ्ते हल्का और कम तेल वाला खाइए, फिर धीरे-धीरे सामान्य खाना लौट आता है।

पहले हफ्ते में दाल, खिचड़ी, दही-चावल, उबली सब्ज़ी जैसा हल्का खाना सबसे आरामदेह रहता है। दूसरे-तीसरे हफ्ते से रोटी, सब्ज़ी और सामान्य घर का खाना जोड़ते जाइए। एक महीने बाद ज़्यादातर लोग वही खाते हैं जो पहले खाते थे।

कुछ लोगों को शुरू में ज़्यादा चिकनाई से ढीला मल होता है। ये आमतौर पर कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है, और तब तक तेल थोड़ा कम रखने से आराम रहता है।

ऑपरेशन की प्रक्रिया की जानकारी पित्त की पथरी के ऑपरेशन की पूरी जानकारी पर मिलेगी।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

खानपान से दर्द टलता रहे, तब भी ये संकेत दिखें तो देर न करें:

तुरंत मिलें
खाने के बाद दाहिनी तरफ बार-बार दर्द
आंख या त्वचा में पीलापन
बुखार के साथ दर्द
लगातार उल्टी
गहरे रंग का पेशाब, सफेद रंग का मल
बिना वजह वजन घटना

पहला दर्द ही संकेत है कि पथरी अब रास्ता रोक रही है। दर्द का इंतज़ार परहेज़ से नहीं टलता।

दर्द किस तरह का होता है, ये biliary colic पर विस्तार से समझाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कोई जूस या सब्ज़ी पथरी गला सकती है?

नहीं। सेब का रस, नींबू, जैतून का तेल — इनमें से कोई पथरी नहीं गलाता। ये आराम दे सकते हैं, इलाज नहीं करते। ultrasound दोहराने पर पथरी वहीं मिलती है।

क्या दूध और दही बंद करने पड़ेंगे?

नहीं। कम चर्बी वाला दूध, दही और छाछ ज़्यादातर लोगों को ठीक लगते हैं। पूरी मलाई वाला दूध शुरू में कम रखिए।

क्या अंडा या मांस खा सकते हैं?

हां, लेकिन तला हुआ नहीं। उबला अंडा या भुना हुआ चिकन ठीक रहता है। कलेजी और ज़्यादा चर्बी वाला मांस टालिए।

क्या चाय-कॉफी से फर्क पड़ता है?

सादी चाय या कॉफी ज़्यादातर लोगों को परेशान नहीं करती। दिक्कत तब होती है जब साथ में तला हुआ नाश्ता हो।

क्या उपवास करना ठीक है?

लंबे उपवास से पित्त गाढ़ा होता है, जो ठीक नहीं। अगर उपवास रखते हैं तो बीच-बीच में फल, छाछ या हल्का कुछ लेते रहिए।

बाहर खाना पड़े तो क्या चुनें?

तंदूरी या भुनी चीज़ें, दाल, रोटी, दही — ये सुरक्षित रहते हैं। तली हुई और मलाई-ग्रेवी वाली चीज़ें टालिए।

परहेज़ कब तक करना है?

अगर ऑपरेशन नहीं कराया, तो तब तक जब तक पथरी है। ये उसका इलाज नहीं, सिर्फ दर्द टालने का तरीका है।

क्या परहेज़ से पथरी छोटी हो जाएगी?

नहीं। पथरी बन जाने के बाद खाने से न घटती है, न निकलती है। परहेज़ सिर्फ अगला हमला टालता है।

खाना संभालना अच्छी बात है, और इससे रोज़मर्रा आसान भी होता है। लेकिन अगर दर्द एक बार हो चुका है, तो परहेज़ उसे टालता भर है, रोकता नहीं। जिस पथरी ने एक बार दर्द दिया है, वो दोबारा देगी।

संदर्भ: Cholelithiasis — StatPearls, NCBI

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परहेज़ से दर्द टलता है, पथरी नहीं जाती।

+91 63555 64601

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Dr Harsh Shah - Surgical Gastroenterologist and GI Robotic Surgeon, Ahmedabad
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