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Dr. Harsh J Shah

बिना लक्षण किसकी जाँच ज़रूरी है, और कितनी बार?

अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah, आमाशय के कैंसर के सर्जन, अहमदाबाद

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 वर्ष का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89, 216 reviews (Gota clinic) · 4.94, 18 reviews (Apollo, Bhat)

संक्षेप में

भारत में पेट के कैंसर के लिए सबकी जाँच का कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है। जाँच उन्हीं को दी जाती है जिनके पास कोई पक्का कारण हो।

कोरिया और जापान में पूरी आबादी की endoscopy होती है, क्योंकि वहाँ यह रोग बहुत आम है। भारत के आँकड़े वैसा कार्यक्रम नहीं माँगते।

H. pylori का इलाज इकलौता कदम है जो जोखिम को खुद घटाता है। बाकी जाँचें कैंसर जल्दी पकड़ती हैं, रोकती नहीं।

जाँच का मतलब है endoscopy, जिसमें पेट की तय जगहों से biopsy ली जाती है — सिर्फ़ ख़राब दिखने वाले हिस्से से नहीं।

साफ़ रिपोर्ट राहत है, पूरी छूट नहीं। वज़न घटे, उल्टी हो या निवाला अटके तो दोबारा जाँच चाहिए।

जाँच पेट के कैंसर के इलाज का पहला कदम है। जाँच में कैंसर मिले तो staging से ऑपरेशन तक क्या होता है, इसकी पूरी जानकारी पेट के कैंसर का इलाज, अहमदाबाद (English) वाले पेज पर है।

भारत में सबका जाँच कार्यक्रम क्यों नहीं

Screening का मतलब है पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले लोगों की जाँच। यह तभी सार्थक है जब उस आबादी में रोग इतना आम हो कि बड़े पैमाने पर ढूँढना सस्ता पड़े।

दुनिया में दो ही देश ऐसा करते हैं। कोरिया में चालीस साल की उम्र से हर दूसरे साल endoscopy या barium की जाँच दी जाती है। जापान में वही बात पचास साल से शुरू होती है। दोनों जगह अब ज़्यादातर कैंसर शुरुआती अवस्था में ही पकड़ में आ जाते हैं।

पूरी आबादी की जाँच कहाँ होती है और कहाँ नहीं
देशक्या दिया जाता है
कोरिया1999 से राष्ट्रीय कार्यक्रम। चालीस साल से हर दूसरे साल endoscopy या barium की जाँच।
जापान2016 से राष्ट्रीय कार्यक्रम। पचास साल से हर दूसरे साल endoscopy या barium।
अमेरिका और यूरोपपूरी आबादी की जाँच नहीं। सिर्फ़ ज़्यादा जोखिम वाले समूहों को जाँच दी जाती है।
भारतराष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं। यहाँ ज़्यादातर पेट का कैंसर लक्षण शुरू होने के बाद ही पकड़ में आता है।

वे दोनों कार्यक्रम तीन बातों पर टिके हैं। वहाँ रोग आम है, पूरी आबादी की endoscopy हो सके इतने केंद्र हैं, और दफ़्तर में जाँच करवाने की पुरानी आदत है। भारत में इन तीनों में से एक भी बात नहीं बैठती।

उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में, मिज़ोरम और मणिपुर में, पेट का कैंसर पूर्वी एशिया जितना ही है। वहाँ छोटे पैमाने पर कार्यक्रम चले हैं, पर अब तक बड़े पैमाने पर नहीं फैले।

लक्षण न हों तब किसकी जाँच होती है

सबकी जाँच करने के बजाय, जिनके पास पक्का कारण हो उन्हें जाँच दी जाती है। ऐसे लगभग सारे लोग इन छह समूहों में आ जाते हैं।

  1. H. pylori की रिपोर्ट positive हो, ख़ासकर उनमें जिनके माता-पिता या भाई-बहन को पेट का कैंसर हुआ हो।
  2. नज़दीकी रिश्तेदार को पेट का कैंसर हुआ हो और परिवार में जीन की ख़राबी का शक हो, भले साबित न हुई हो।
  3. परिवार में जीन की ख़राबी पता हो, जैसे CDH1 और दूसरे ख़ानदानी सिंड्रोम।
  4. पुरानी biopsy में पेट की परत बड़े हिस्से में पतली या बदली हुई लिखी हो।
  5. खून की वह खास कमी, जिसमें हर मरीज़ में पेट की परत पतली मिलती ही है।
  6. बरसों पहले ulcer के लिए पेट का निचला हिस्सा निकलवाया हो।

चेतावनी के लक्षण बिलकुल अलग बात हैं, और वे जाँच का कार्यक्रम नहीं हैं। वज़न घटना, खून कम रहना, निवाला अटकना, या पैंतालीस साल के बाद नई बदहज़मी — इन सबमें endoscopy अभी करवानी चाहिए। कुछ ख़राब दिखने के बाद कौन-सी जाँच किस क्रम में होती है, यह endoscopy के बाद की जाँच वाले पन्ने पर है।

H. pylori: जोखिम घटाने वाला इकलौता कदम

यह जीवाणु भारत की बड़ी आबादी के पेट की परत में बसा रहता है। लंबे समय का संक्रमण परत में सूजन लाता है, उसे पतला करता है, और दशकों बाद कैंसर में बदल सकता है। इसे हटाने से वह जोखिम घटता है।

लंबे समय से बदहज़मी रहती हो तो एक बार जाँच करवा लेनी चाहिए। पेट के कैंसर के मरीज़ के माता-पिता, भाई-बहन या संतान को लक्षण हों या न हों, जाँच करवानी चाहिए।

H. pylori ढूँढने वाली जाँचें
जाँचक्या करना होता है
मल की जाँचमल का नमूना देना होता है। Endoscopy की ज़रूरत नहीं।
साँस की जाँचएक घोल पीने से पहले और बाद में नली में साँस छोड़नी होती है।
Endoscopy के समय biopsyपरत का छोटा टुकड़ा उसी कमरे में जाँच लिया जाता है।
खून की antibody जाँचइलाज तय करने के लिए नहीं चलती। जीवाणु जाने के बाद भी लंबे समय तक positive रहती है।

इलाज में दो antibiotic और acid घटाने वाली एक दवा, तीनों साथ में दो हफ़्ते। भारत में उनमें से एक antibiotic के विरुद्ध जीवाणु की प्रतिरोधक क्षमता आम है, इसलिए कई केंद्र शुरू से ही चार दवाओं का कोर्स देते हैं, जिसमें bismuth जुड़ता है। कोर्स जैसा लिखा है वैसा पूरा करना चाहिए। अधूरा कोर्स और ज़िद्दी जीवाणु छोड़ जाता है।

उसके बाद जीवाणु गया या नहीं, इसकी पुष्टि की जाती है, आम तौर पर महीने भर बाद, और उससे पहले दो हफ़्ते acid घटाने वाली दवा बंद रखनी पड़ती है। बिना पुष्टि वाले इलाज को इलाज नहीं माना जाता।

इस वीडियो में H. pylori का संक्रमण कैसे फैलता है और पेट के कैंसर से उसका क्या रिश्ता है, यह समझाया गया है।

पुरानी biopsy की रिपोर्ट क्या बदल देती है

पेट की परत का पतला होना या बदल जाना कैंसर नहीं है। यह कैंसर की ओर जाने वाली धीमी राह पर बैठी हालत है, और यही कारण एक स्वस्थ व्यक्ति को नियमित endoscopy के क्रम में डाल देता है।

दोबारा जाँच कब हो, यह दो बातें तय करती हैं: पेट का कितना हिस्सा बदला है, और नज़दीकी रिश्तेदार को पेट का कैंसर हुआ है या नहीं।

पतली या बदली हुई परत के लिए endoscopy दोबारा कब
Biopsy में क्या मिलाआगे क्या
पेट के एक ही हिस्से में थोड़ा बदलावदोबारा जाँच की ज़रूरत नहीं।
निचले और ऊपरी, दोनों हिस्सों में फैला बदलावलगभग हर तीन साल में endoscopy।
फैला बदलाव, साथ में नज़दीकी रिश्तेदार को पेट का कैंसरहर एक से दो साल में endoscopy।
सपाट इलाक़े में हल्के दर्जे का बदलावदोबारा जाँच, और उस जगह की तस्वीर तथा पक्की नोंध।
दिखने वाली गाँठ या ऊँचे दर्जे का बदलावEndoscopy से निकाल देना, या संभव न हो तो ऑपरेशन।

Biopsy की रिपोर्ट में इस बदलाव को दर्जों में बाँटा जाता है। सिर्फ़ ऊपर के दो दर्जों को नियमित जाँच का क्रम चाहिए; नीचे के दर्जों को नहीं।

खून की वह खास कमी और पुराना ऑपरेशन

खून की उस खास कमी में शरीर अपनी ही पेट की परत के विरुद्ध लड़ता है। उसमें हर मरीज़ की परत पतली होती है, इसलिए लगभग हर तीन साल में endoscopy ठीक रहती है।

दशकों पहले ulcer के लिए जिनके पेट का निचला हिस्सा निकला हो, वह अलग हालत है। बचे हुए पेट पर छोटी आँत का पित्त गिरता रहता है, और परत धीरे-धीरे बदलती जाती है।

ऑपरेशन करवाए हुए पेट की जाँच उस ऑपरेशन के दस से पंद्रह साल बाद शुरू होती है, और फिर बची परत कैसी दिखती है उसके हिसाब से हर एक से दो साल में।

परिवार में जीन की ख़राबी हो तब

कुछ ही परिवारों में ऐसी जीन की ख़राबी होती है जो पेट के कैंसर का जोखिम आम से कहीं ऊँचा कर देती है। इनमें ज़्यादा मिलने वाली ख़राबी CDH1 है, जो ख़ानदानी diffuse किस्म का पेट का कैंसर बनाती है। कुछ दूसरी ख़राबियाँ आँत के सिंड्रोम के साथ आती हैं।

ख़ानदानी सिंड्रोम: जाँच कब से और कितनी बार
जीन या सिंड्रोमजाँच कब सेकितनी बार
CDH1अठारह से बीस साल की उम्रहर साल, कई biopsy के साथ, जब तक ऑपरेशन का फ़ैसला न हो जाए।
CTNNA1बीस से तीस साल की उम्रहर एक से दो साल में।
Lynch सिंड्रोमतीस से पैंतीस साल की उम्रहर तीन से पाँच साल में, colonoscopy के साथ।
आँत के polyp का ख़ानदानी सिंड्रोमपच्चीस से तीस साल की उम्रहर एक से तीन साल में, छोटी आँत की शुरुआत भी देखी जाती है।
Peutz-Jeghersआठ से दस साल की उम्रहर दो से तीन साल में।
Juvenile polyposisपंद्रह साल की उम्रहर एक से तीन साल में, colonoscopy के साथ।

किसकी जीन जाँच करवानी चाहिए, परिवार के साथ बातचीत कैसे होती है और जोखिम घटाने वाला ऑपरेशन कब चर्चा में आता है — यह सब ख़ानदानी आंत और पेट के कैंसर वाले पन्ने पर है। यह पन्ना जाँच के बारे में ही है।

जाँच में असल में होता क्या है

  1. Endoscopy धीरे-धीरे की जाती है, पेट को धोकर साफ़ करके और ठीक से फुलाकर।
  2. पूरी परत को ध्यान से देखा जाता है, अक्सर रंग या ख़ास रोशनी की मदद से, ताकि बदले हुए हिस्से उभर आएँ।
  3. तय जगहों से biopsy — निचला और ऊपरी पेट, दोनों दीवारों से — सिर्फ़ ख़राब दिखने वाले हिस्से से नहीं।
  4. जो कुछ अलग दिखे वहाँ से अतिरिक्त biopsy, और हर एक पर किस जगह की है यह लिखा हुआ।
  5. रिपोर्ट में किन-किन जगहों से नमूने लिए गए यह दर्ज होता है, ताकि अगली endoscopy उसी ज़मीन से मिलान कर सके।

यह जाँच हल्की नींद की दवा के साथ होती है और बदहज़मी की सामान्य endoscopy से ज़्यादा समय लेती है। वही अतिरिक्त समय इस जाँच का असली मतलब है।

Endoscopy साफ़ आए तो भी पूरी छूट नहीं

यह बात CDH1 वाले परिवारों पर ज़्यादा असर डालती है। उनका कैंसर बिलकुल सामान्य दिखने वाली परत के नीचे बिखरी हुई कोशिकाओं के छोटे-छोटे गुच्छों की तरह उगता है, इसलिए कहीं से भी ली गई biopsy शुरुआती रोग का बड़ा हिस्सा चूक जाती है। साफ़ रिपोर्ट उस मुलाक़ात भर की राहत है। वह यह नहीं कहती कि पेट रोग से मुक्त है।

इसीलिए CDH1 वाहक के लिए endoscopy को पेट निकलवाने का विकल्प नहीं, पुल माना जाता है। जब तक फ़ैसला हो रहा हो, या किसी ने ऑपरेशन न करवाने का तय किया हो, तब तक यही चलती है।

बाक़ी सभी समूहों में, दो जाँचों के बीच नया लक्षण आ जाए तो वह तय तारीख़ से ऊपर है। वज़न घटे, उल्टी हो या निवाला अटके तो endoscopy अभी।

चिंता से पक्के कार्यक्रम तक, पाँच कदम

पेट के कैंसर की चिंता हो तो क्या करें, क्रम से
कदमक्यों ज़रूरी
H. pylori की जाँच करवाएँजोखिम को खुद घटाने वाला इकलौता कदम यही है; बाक़ी जाँचें कैंसर जल्दी पकड़ती हैं।
परिवार का इतिहास लिखकर रखेंदो पीढ़ियाँ, किसे कौन-सा कैंसर, किस उम्र में। इसी से जीन जाँच की चर्चा तय होती है।
पुरानी biopsy रिपोर्ट ढूँढ निकालेंउसमें परत पतली या बदली हुई लिखा हो तो पूरा कार्यक्रम बदल जाता है।
पूछें कि जाँच की ज़रूरत है भी या नहींचिंता करने वाले ज़्यादातर लोगों को नियमित जाँच की ज़रूरत नहीं होती।
तारीख़ लिखवा लेंफ़ाइल में लिखी तारीख़ ही जाँच सचमुच करवाती है। ज़ुबानी कही बात तीन साल नहीं टिकती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्षण नहीं हैं। फिर भी endoscopy करवाएँ?

सिर्फ़ चिंता के आधार पर नहीं। जाँच तब दी जाती है जब कोई पक्का कारण हो: H. pylori की positive रिपोर्ट, नज़दीकी रिश्तेदार में पेट का कैंसर, परिवार में जीन की ख़राबी, पुरानी biopsy में बदली हुई परत, खून की वह खास कमी, या बरसों पहले निकला पेट का हिस्सा।

पिता को पेट का कैंसर था। पहले क्या करें?

पहले H. pylori की जाँच करवाएँ, और positive आए तो इलाज लें। फिर परिवार का इतिहास विस्तार से लिखकर साथ लाएँ। कितने रिश्तेदारों को और किस उम्र में हुआ था, इसी से endoscopy की ज़रूरत तय होती है।

हर साल endoscopy से बचाव हो जाएगा?

इससे देर से पकड़ में आने की संभावना घटती है, जोखिम हटता नहीं। दो जाँचों के बीच नया लक्षण आ जाए तो endoscopy उसी समय करवानी चाहिए, तय तारीख़ पर नहीं।

पेट के कैंसर के लिए खून की जाँच?

पेट का कैंसर जल्दी पकड़ने वाली कोई खून की जाँच नहीं है। H. pylori की antibody जाँच सिर्फ़ पुराना संपर्क बताती है, और जीवाणु हट जाने के बाद भी लंबे समय तक positive रहती है।

जापान सबकी जाँच करता है, भारत क्यों नहीं?

जापान और कोरिया में पेट का कैंसर कहीं ज़्यादा है, और वहाँ पूरी आबादी की endoscopy हो सके इतने केंद्र हैं। उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों को छोड़कर, भारत के आँकड़े वैसा कार्यक्रम नहीं माँगते।

Dr Harsh Shah कहाँ मिलते हैं

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad

Consultation, पुरानी endoscopy और biopsy की रिपोर्ट देखना, परिवार के इतिहास पर बात, दूसरी राय और नियमित जाँच।

+91-63555-64601 · गोता clinic का रास्ता

Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar

Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. तय जगहों से biopsy के साथ endoscopy, endoscopy से गाँठ निकालना और भर्ती मरीज़ की देखभाल।

WhatsApp +91-63555-64601 · Apollo, भाट का रास्ता

H. pylori की रिपोर्ट positive आई है, या माता-पिता अथवा भाई-बहन को पेट का कैंसर हुआ था? पुरानी endoscopy और biopsy की रिपोर्ट तथा जीन जाँच का नतीजा WhatsApp पर पहले भेजा जा सकता है, ताकि consultation के समय वे पढ़े जा चुके हों। जाँच की ज़रूरत है या नहीं, यह consultation में जाँच के बाद तय होता है। फ़ोन करें +91-63555-64601 मुलाक़ात से पहले रिपोर्ट भेजें

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