Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 4 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
GI & Proctology Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
श्रोणि में मलाशय को थामने वाले सहारे जब ढीले पड़ते हैं, तब वह बाहर खिसकता है। लंबे समय तक ज़ोर लगाना, प्रसव, उम्र और कमज़ोर तंत्रिकाएं इन सहारों पर बोझ बढ़ाती हैं।
डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि पूरी दीवार छल्लों की तरह नीचे आई है, या सिर्फ़ अंदर की परत तहों की तरह। इसी एक बात से तय होता है कि यह रेक्टल प्रोलैप्स है या बवासीर।
प्रोलैप्स शरीर के अंदर भी छिपा रह सकता है। उसका ग्रेड एक ख़ास एक्स-रे या MRI से तय होता है, और इलाज आपकी तकलीफ़ देखकर चुना जाता है, तस्वीर देखकर नहीं।
रेक्टल प्रोलैप्स और उसके इलाज की पूरी जानकारी हमारे रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी पेज पर है। यह लेख बताता है कि यह क्यों होता है और इसके प्रकार कैसे बाँटे जाते हैं।
मलाशय आँत का आख़िरी हिस्सा है। प्रोलैप्स में वह मोज़े की तरह अपने ऊपर उलट जाता है, फिर नीचे फिसलकर गुदा से बाहर आ जाता है।
इसकी कोई एक वजह नहीं होती। मलाशय के आसपास के कई सहारे साथ-साथ ढीले पड़ते हैं, और फिर ज़ोर लगाने से ढीली आँत नीचे धकेली जाती है।
| क्या कमज़ोर पड़ता है | सामान्य रूप से यह क्या करता है | कमज़ोर पड़ने पर क्या होता है |
|---|---|---|
| मलाशय के सामने की थैली | उथली रहती है | गहरी थैली में आँत मलाशय पर दबाव डालती है |
| ढीला, लंबा मलाशय और सिग्मॉयड आँत | श्रोणि के पीछे की हड्डी से बँधी रहती है | आँत मुड़कर दूरबीन की तरह अंदर धँस सकती है |
| पीछे और बग़ल के सहारे | मलाशय को अपनी जगह थामते हैं | मलाशय नीचे गिरता और मुड़ जाता है |
| श्रोणि तल की मांसपेशी का झूला | श्रोणि का खुला हिस्सा बंद रखता है और आँत को कोण पर रखता है | खुला हिस्सा चौड़ा हो जाता है और आँत उससे निकल सकती है |
| गुदा की मांसपेशी और उसकी तंत्रिकाएं | गुदा को बंद रखती हैं | मल या गैस रिसती है और मलाशय पर पकड़ घटती है |
प्रोलैप्स का हर ऑपरेशन इनमें से एक या अधिक कमज़ोरियों को निशाना बनाता है। इसीलिए मरम्मत का तरीक़ा हर व्यक्ति के हिसाब से चुना जाता है।
रेक्टल प्रोलैप्स महिलाओं और बड़ी उम्र के लोगों में कहीं ज़्यादा मिलता है। फिर भी जो सालों ज़ोर लगाता है, या जिसे तंत्रिका या ऊतक की कुछ दिक्कतें हैं, उसे भी हो सकता है।
डॉक्टर तहों का ढंग देखते हैं। जो छल्ले चारों ओर पूरे घूमते हैं, वे बताते हैं कि मलाशय की पूरी दीवार बाहर आई है। पहियों की तीलियों जैसी तहें अंदर की परत या बवासीर की ओर इशारा करती हैं।
| पहचान | पूरा रेक्टल प्रोलैप्स | परत का प्रोलैप्स या बवासीर |
|---|---|---|
| तहें | चारों ओर पूरे घूमते छल्ले | पहिये की तीलियों जैसी तहें |
| कौन-सी परतें बाहर आती हैं | मलाशय की दीवार की सारी परतें | सिर्फ़ अंदर की परत |
| गाँठ के चारों ओर खाँचा | गाँठ और गुदा के बीच खाँचा होता है | गहरा खाँचा नहीं होता |
| क्या चाहिए | मलाशय को अपनी जगह जमाने वाली मरम्मत | बवासीर या परत की देखभाल, मलाशय की मरम्मत नहीं |
दोनों को एक समझ लेना आम ग़लती है। जिसे सिर्फ़ बवासीर है और जिसे प्रोलैप्स की मरम्मत के लिए भेज दिया जाए, उसे ग़लत ऑपरेशन मिलता है। उलटा भी उतना ही ग़लत है।
अंदरूनी प्रोलैप्स मलाशय की वह तह है जो शरीर के अंदर ही रहती है। ज़ोर लगाते समय लिया गया एक्स-रे या MRI दिखाता है कि तह कितनी दूर तक जाती है, और डॉक्टर उसे एक से पाँच तक का ग्रेड देते हैं।
ग्रेड हमें राह दिखाता है, पर फ़ैसला आपकी तकलीफ़ करती है। ऊँचा ग्रेड हो और कोई शिकायत न हो, तो अक्सर कुछ नहीं किया जाता। कम ग्रेड में सचमुच रुकावट हो, तो इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।
कई दूसरी दिक्कतें भी नीचे उतरती चीज़ जैसी दिख सकती हैं, इसलिए ठीक से जाँच ज़रूरी है। गाँठ के सिरे पर कोई उभार, या पुराना घाव, कभी सीधे-सादे प्रोलैप्स की तरह नहीं मान लेना चाहिए।
बच्चों में वजह आमतौर पर अलग होती है, और अक्सर बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाती है। कुपोषण, दस्त के लंबे दौर और कीड़े इसके पीछे हो सकते हैं। फेफड़े और आँत की बीमारी सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस भी हो सकती है। डॉक्टर को इनकी जाँच करनी चाहिए।
वयस्कों में रेक्टल प्रोलैप्स शायद ही अपने आप जाता है। वह बढ़ता जाता है। जितना लंबा चले, गुदा की मांसपेशी उतनी खिंचती है, और रिसाव उतना बढ़ सकता है।
नहीं। बवासीर गुदा नली के नरम गद्दे हैं। रेक्टल प्रोलैप्स में मलाशय की दीवार ख़ुद, अक्सर छल्लों में, बाहर खिसकती है। जाँच से दोनों का फ़र्क़ पता चलता है, और इलाज अलग होता है।
श्रोणि के कमज़ोर सहारे, लंबे समय का ज़ोर, पहले का प्रसव या श्रोणि का ऑपरेशन, और उम्र, सब भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका की बीमारी भी जुड़ सकती है। ज़्यादातर लोगों में एक से अधिक वजह होती हैं।
प्रसव से श्रोणि तल और उसकी तंत्रिकाएं खिंच सकती हैं, और गर्भाशय निकालने से सामने का सहारा बदल सकता है। महिलाओं में यह कहीं ज़्यादा मिलता है, पर पुरुषों को भी हो सकता है।
हाँ। जो युवा बहुत ज़ोर लगाता है, या जिसकी श्रोणि तल की मांसपेशियां ढीली होने की जगह कस जाती हैं, उसे हो सकता है। बच्चों को भी होता है, पर उनकी वजह अलग होती है और अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।
मलाशय शरीर के अंदर ही अपने ऊपर मुड़ जाता है और बाहर नहीं आता। इससे रुकावट का एहसास और पेट पूरा साफ़ न होना हो सकता है। ज़ोर लगाते समय लिया गया ख़ास एक्स-रे या MRI इसे दिखाता है।
नहीं। बहुत-से संयोग से मिलते हैं और कोई तकलीफ़ नहीं देते। इलाज आपकी तकलीफ़ देखकर तय होता है, सिर्फ़ तस्वीर देखकर नहीं।
जब कोई ऊतक बाहर आता दिखे, मल रिसे, ख़ून आए या रुकावट लगे, तब दिखाइए। जो ऊतक बाहर ही रहे, काला पड़ जाए और वापस न जाए, उसे उसी दिन इलाज चाहिए।
प्रोलैप्स की पूरी जानकारी के लिए रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी पेज से शुरू कीजिए। आने से पहले सवाल हों तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
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