Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 4 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
GI & Proctology Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
पेट से की गई मरम्मत फिसले हुए मलाशय को ऊपर खींचकर श्रोणि में ऊँचाई पर जमा देती है। यह ज़्यादातर दूरबीन से होती है और उन लोगों के लिए है जो बेहोशी झेलने लायक़ स्वस्थ हैं।
वेंट्रल मेश रेक्टोपेक्सी में मलाशय के सामने एक पतली पट्टी मेश की लगती है। टांकों वाली और आँत का हिस्सा निकालने वाली विधियों में मेश नहीं लगता, और वे हमेशा एक विकल्प रहती हैं।
चुनाव आपकी मल की आदत, सेहत और मेश पर आपकी राय से तय होता है। ऑपरेशन से पहले की बातचीत उतनी ही मायने रखती है जितना ऑपरेशन।
प्रोलैप्स और उसके इलाज की पूरी जानकारी हमारे रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी पेज पर है। यह लेख सिर्फ़ पेट के रास्ते वाले ऑपरेशन समझाता है।
मलाशय इसलिए नीचे खिसकता है कि उसे थामने वाले सहारे ढीले पड़ गए हैं। पेट का ऑपरेशन उसे वापस ऊपर खींचकर श्रोणि के पीछे की हड्डी से जोड़ देता है, ताकि वह अपनी जगह रहे।
मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं। एक में मेश लगता है और दो में नहीं। हर एक थोड़ी अलग दिक्कत सुलझाता है, इसलिए सही चुनाव आप पर निर्भर है।
| ऑपरेशन | मेश? | क्या करता है | आमतौर पर किसे जमता है |
|---|---|---|---|
| वेंट्रल मेश रेक्टोपेक्सी | हाँ, पतली पट्टी | मलाशय को सामने से ऊपर खींचकर ऊँचाई पर जमाता है; पीछे और बग़ल के जोड़ों को नहीं छेड़ता | स्वस्थ लोग, ख़ासकर जिन्हें सामने की दीवार में उभार हो या मल निकालने में दिक्कत हो |
| टांकों वाली रेक्टोपेक्सी | नहीं | छोड़े गए मलाशय को टांकों से त्रिकास्थि से जोड़ती है | जो मेश नहीं चाहते |
| रिसेक्शन रेक्टोपेक्सी | नहीं | लंबी, ढीली सिग्मॉयड आँत का हिस्सा निकालकर मलाशय को जमाती है | जिन्हें बहुत कब्ज़ रहती है और सिग्मॉयड आँत लंबी है |
मलाशय के पीछे या सामने मेश का झूला लपेटने वाले पुराने ऑपरेशन अब कम होते हैं, क्योंकि उनसे कब्ज़ या रुकावट होने लगती थी।
इसमें सिर्फ़ मलाशय के सामने के हिस्से पर काम होता है। तंत्रिकाएं पीछे और बग़ल में होती हैं, इसलिए उन्हें न छेड़ने से पुराने ऑपरेशनों की तुलना में नई कब्ज़ कम होती है।
सर्जन पूरी बेहोशी में छोटे चीरों से काम करता है। चरण तय क्रम में चलते हैं, और पूरे समय तंत्रिकाओं तथा मूत्र नली पर नज़र रखी जाती है।
ज़्यादातर लोग उसी दिन बिस्तर से उठकर बैठ जाते हैं। अस्पताल में कुछ दिन रुकना आम है, और मरम्मत जमने तक मल नरम रखने के लिए जुलाब दिए जाते हैं।
मेश घिसकर मलाशय या योनि में जा सकता है। ऐसा कम होता है, पर महीनों या सालों बाद दिख सकता है, इसलिए ऑपरेशन से पहले की बातचीत में इसका ज़िक्र ज़रूर होता है।
मेश और सहमति पर हमारी बातचीत का ब्योरा रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी पेज पर विस्तार से दिया है।
तीन बातें तय करती हैं: आप कितने स्वस्थ हैं, मुख्य दिक्कत कब्ज़ या रुकावट है या नहीं, और मेश पर आपकी राय क्या है। इससे पहले श्रोणि तल की जाँच और परीक्षण होते हैं।
जोखिम असली हैं, पर कम होते हैं। मुख्य हैं प्रोलैप्स का लौटना, नई या बढ़ी कब्ज़, मेश की दिक्कतें, और आँत का हिस्सा निकालने पर जोड़ से रिसाव।
पेट से किया ऑपरेशन आमतौर पर ज़्यादा टिकता है, पर इसमें पूरी बेहोशी चाहिए। बुज़ुर्ग या कमज़ोर लोगों को नीचे से छोटा ऑपरेशन बेहतर बैठ सकता है। चुनाव आपकी सेहत देखकर होता है।
पुराने ऑपरेशनों के मुक़ाबले नई कब्ज़ कम होती है, क्योंकि पीछे और बग़ल की तंत्रिकाओं को छुआ नहीं जाता। कुछ लोगों को फिर भी कुछ समय जुलाब लेना पड़ता है।
नहीं। टांकों वाली और रिसेक्शन रेक्टोपेक्सी में मेश नहीं लगता। मेश एक विकल्प है, और हामी भरने से पहले बाक़ी विकल्प भी सुनने चाहिए।
कभी-कभार मेश घिसकर मलाशय या योनि में चला जाता है। स्राव, ख़ून या पेड़ू में दर्द हो तो ऑपरेशन के बहुत बाद भी जाँच कराइए।
ज़्यादातर दूरबीन से, छोटे चीरों से होता है, जिसमें दर्द कम और अस्पताल में रुकना छोटा रहता है। पेट में घने निशान हों तो खुला चीरा लगाया जाता है।
ज़्यादातर लोग कुछ दिन में घर चले जाते हैं। लगभग छह हफ़्ते तक भारी सामान उठाना और ज़ोर लगाना मना रहता है, ताकि मरम्मत जम जाए।
जैसे ही कुछ बाहर निकलता दिखे, मल रिसे या मल निकलने में रुकावट लगे, तुरंत दिखाइए। देर करने से प्रोलैप्स बढ़ सकता है और आँत कमज़ोर पड़ सकती है।
प्रोलैप्स की पूरी जानकारी के लिए रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी पेज से शुरू कीजिए। आने से पहले सवाल हों तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
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क्या किसी डॉक्टर ने कहा है कि आपके मलाशय प्रोलैप्स का ऑपरेशन पेट के रास्ते से होगा, और मेश की बात भी की है? चिंता होना स्वाभाविक है। अपनी रिपोर्ट और अपने सवाल साथ लाइए। Dr Harsh Shah सारे विकल्प समझाएंगे, उनमें वे भी जिनमें मेश नहीं लगता। फ़ोन करें या WhatsApp पर संदेश भेजें। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर पूछें
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