Skip to main contentअंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Stomach Cancer Surgeon
Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
★★★★★ Google: 4.89, 216 reviews (Gota clinic) · 4.94, 18 reviews (Apollo, Bhat)
संक्षेप में
शुरुआती कैंसर में गाँठ आमाशय के अस्तर या उसके नीचे की परत से आगे नहीं गई होती। उसकी गहराई और आकार तय करते हैं कि endoscope चलेगा या ऑपरेशन।
सिर्फ़ अस्तर में सीमित, छोटी और नियम में फ़िट गाँठ ESD से, पेट पर चीरे के बिना, निकल सकती है। गहरी गाँठ में लसीका गाँठों के साथ ऑपरेशन चाहिए।
ऑपरेशन चाहिए तो गाँठ आमाशय के किस हिस्से में है, इससे तय होता है कि कितना निकलेगा। कुछ गाँठों में आमाशय का हिस्सा बचाया जा सकता है।
आमाशय (stomach) की दीवार कई परतों से बनी है। अंदर की पहली परत को अस्तर (mucosa) कहते हैं, और उसके नीचे की परत को submucosa। कैंसर इन दो परतों से आगे न बढ़ा हो, तो उसे शुरुआती कैंसर यानी T1 कहा जाता है।
T1 के भी दो हिस्से हैं। T1a का मतलब है गाँठ सिर्फ़ अस्तर में है। T1b का मतलब है गाँठ नीचे की परत तक पहुँच गई है। इलाज से पहले यह फ़र्क endoscopic ultrasound (EUS) से समझा जाता है।
पूरा फ़ैसला इसी एक फ़र्क पर टिका है। नीचे की परत तक पहुँची गाँठ के लसीका गाँठों तक पहुँचने की आशंका कहीं ज़्यादा होती है।
Biopsy, endoscopy की तस्वीरें और EUS गाँठ के बारे में पाँच बातें बताते हैं। इन्हीं से तय होता है कि गाँठ endoscope से निकल सकती है या ऑपरेशन चाहिए।
| बात | Endoscope से निकालने की ओर | ऑपरेशन की ओर |
|---|---|---|
| गहराई | सिर्फ़ अस्तर में (T1a)। | नीचे की परत तक (T1b)। लगभग हमेशा ऑपरेशन। |
| आकार | छोटी गाँठ। सामान्य सीमा 2 cm। | अपने प्रकार की सीमा से बड़ी। |
| कोशिकाओं का प्रकार | सुगठित कोशिकाएँ (differentiated)। | बेढब कोशिकाएँ, जब तक गाँठ छोटी और छाले के बिना न हो। |
| छाला | गाँठ पर छाला नहीं। | छाला है, जब तक गाँठ छोटी और सुगठित न हो। |
| बारीक नलियाँ | ख़ून या लसीका की बारीक नलियों में कैंसर नहीं। | बारीक नलियों में कैंसर दिखा। |
Endoscope लसीका गाँठें नहीं निकाल सकता। इसलिए जब लसीका गाँठ में कैंसर की आशंका बढ़ती है, तब ऑपरेशन ही सही रास्ता बनता है।
Endoscope से गाँठ निकालने के तरीके को ESD (endoscopic submucosal dissection) कहते हैं। गाँठ को नीचे की परत से अलग करके एक ही टुकड़े में मुँह के रास्ते निकाला जाता है। पेट पर कोई चीरा नहीं लगता, और पूरा आमाशय बचा रहता है।
जापान के मूल नियम के अनुसार ESD तब होता है, जब गाँठ सुगठित कोशिकाओं वाली हो, सिर्फ़ अस्तर में हो, 2 cm या उससे छोटी हो, उस पर छाला न हो, और बारीक नलियों में कैंसर न हो।
अब विस्तृत नियम कुछ और गाँठों में भी ESD की इजाज़त देते हैं:
ESD के लिए कुशल endoscopy टीम चाहिए। भारत में यह ज़्यादातर बड़े विशेषज्ञ endoscopy केंद्रों में होता है।
गाँठ एक टुकड़े में निकली हो, हर किनारा साफ़ हो, बारीक नलियाँ साफ़ हों और आकार नियम में हो, तभी ESD को पूरा माना जाता है।
इनमें से एक भी शर्त पूरी न हो, तो अगला कदम ऑपरेशन है। इसमें आमाशय का हिस्सा या पूरा आमाशय, लसीका गाँठों के साथ, निकाला जाता है। गहरे किनारे पर कैंसर, बारीक नलियों में कैंसर, या नियम से ज़्यादा गहरी गाँठ, ये आम कारण हैं। यह ऑपरेशन इलाज की तय राह का हिस्सा है, नाकामी नहीं।
जब ESD संभव न हो, तब ऑपरेशन ज़्यादातर इस पर निर्भर करता है कि गाँठ आमाशय के किस हिस्से में है।
| गाँठ कहाँ है | आम ऑपरेशन |
|---|---|
| निचला हिस्सा (antrum) | आमाशय का निचला हिस्सा निकालना (distal या subtotal gastrectomy)। बचा आमाशय आंत से जोड़ा जाता है। |
| बीच का हिस्सा (body) | हिस्सा या पूरा आमाशय निकालना। सुरक्षित किनारे और बचने वाले स्वस्थ आमाशय पर निर्भर। |
| ऊपरी हिस्सा (cardia) | ऊपरी हिस्सा निकालकर double-tract जोड़, या बड़ी गाँठ में पूरा आमाशय निकालना। |
| कई जगह, या दीवार में फैलती गाँठ | पूरा आमाशय निकालना। शुरुआती कैंसर में ऐसा कभी-कभार होता है। |
हर ऑपरेशन की और जानकारी निचले हिस्से, बीच के हिस्से और ऊपरी हिस्से के पेज पर है।
जिस शुरुआती कैंसर में कोई संदिग्ध लसीका गाँठ न हो, उसमें D1 या D1+ जितनी कम गाँठें निकालना काफ़ी है। बड़ा D2 संदिग्ध गाँठों के लिए रखा जाता है।
लसीका गाँठों में फैलाव न हो, ऐसी ध्यान से चुनी गाँठों में दो ऑपरेशन आमाशय का ज़्यादा हिस्सा बचाते हैं:
छोटा कटोरीनुमा टुकड़ा निकालना (wedge) इस कैंसर का मानक ऑपरेशन नहीं है। यह GIST जैसी दूसरी गाँठों में होता है। एक sentinel लसीका गाँठ देखकर छोटा ऑपरेशन करने का तरीका अभी अध्ययन में है।
शुरुआती कैंसर में दूरबीन (laparoscopic) ऑपरेशन मानक है। चुने हुए मरीज़ों में robotic ऑपरेशन होता है।
निकाले गए आमाशय की अंतिम रिपोर्ट यह तय करती है। कैंसर पहली परतों में ही रहा हो, किनारे साफ़ हों और किसी लसीका गाँठ में कैंसर न हो, तो आमतौर पर गाँठ को पूरी तरह निकालना ही पूरा इलाज होता है। Chemotherapy की ज़रूरत नहीं पड़ती।
लसीका गाँठ में कैंसर मिले, या stage ज़्यादा निकले, तो ऑपरेशन के बाद chemotherapy पर विचार होता है। आगे के stage में chemotherapy और ऑपरेशन का क्रम इस पेज पर है।
नियमित मुलाक़ात में endoscopy, scan और ख़ून की जाँच होती है। ख़ून के कण, vitamin B12 और लौह तत्व देखे जाते हैं, क्योंकि आमाशय के ऑपरेशन के बाद पोषण का सोखना बदल सकता है। शुरुआती सालों में मुलाक़ात जल्दी-जल्दी, फिर साल में एक बार।
सालों बाद आमाशय के किसी दूसरे हिस्से में नया शुरुआती कैंसर हो सकता है। इसलिए ESD के बाद endoscopy जीवन भर चलती है। हिस्सा निकाला गया हो, तो बचा हुआ आमाशय भी जाँचा जाता है।
कभी-कभी। गाँठ सिर्फ़ अस्तर में, छोटी और बाकी शर्तों में फ़िट होनी चाहिए। EUS और biopsy से यह तय होता है।
रिपोर्ट में चार में से कोई शर्त पूरी नहीं हुई। अक्सर किनारा साफ़ नहीं होता, या बारीक नलियों में कैंसर दिखता है। ऑपरेशन में लसीका गाँठें भी निकलती हैं।
हमेशा नहीं। निचले या बीच के हिस्से की गाँठ में अक्सर हिस्सा ही निकलता है। कुछ गाँठों में वाल्व या निचला आमाशय बचाने वाले ऑपरेशन हो सकते हैं।
आमतौर पर नहीं, अगर अंतिम रिपोर्ट में कैंसर पहली परतों में ही हो और लसीका गाँठें साफ़ हों। Stage बढ़े तो विचार होता है।
शुरुआती सालों में ज़्यादा बार, फिर साल में एक बार। ESD के बाद endoscopy जीवन भर, क्योंकि आमाशय में कहीं और नया कैंसर हो सकता है।
पेट के कैंसर का पूरा इलाज stomach cancer treatment पेज पर है (English में)। यात्रा से पहले कोई सवाल हो तो +91-63555-64601 पर कॉल करें।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
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Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar. Endoscopy, staging laparoscopy, ऑपरेशन और भर्ती मरीज़ों की देखभाल।
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