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Dr. Harsh J Shah

पित्त नली सिकुड़ी है: cancer है या नहीं?

Shah's Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre · अहमदाबाद और गांधीनगर

अंतिम अपडेट: 12-Oct-2026

पित्त नली की benign सिकुड़न का इलाज, अहमदाबाद · Gota OPD, Gota, Ahmedabad · Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर

MRCP की रिपोर्ट में “CBD stricture” लिखा देखकर पहला डर cancer का होता है। पित्त नली की हर सिकुड़न cancer नहीं होती, पर यह बात जाँच से साबित होनी चाहिए, अंदाज़े से नहीं।

सिकुड़न के पीछे अक्सर पित्ताशय के operation में लगी चोट, पुराना pancreatitis या नलियों की अपनी सूजन होती है। इसका असली ख़तरा पित्त में बार-बार होने वाला संक्रमण है।

Benign साबित होने के बाद ज़्यादातर सिकुड़न endoscopy से, लगभग एक साल तक stent डालकर खुलती है। कुछ में steroid की गोली और कुछ में नया जोड़ बनाने का operation लगता है।

Benign सिकुड़न क्या है?

Liver में बना पित्त एक नली से आँत में जाता है। इस नली का कोई हिस्सा तंग हो जाए तो उसे stricture कहते हैं। Benign का मतलब है गाँठ नहीं, बल्कि निशान, सूजन या चोट।

Dr Harsh Shah, पित्त नली और पेट के surgeon, अहमदाबाद
Dr Harsh Shah, MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology).

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre. पेट, liver और पित्त नली की surgery में 18 साल का अनुभव। MRCP पढ़ना, नली से नमूना लेने की योजना, steroid का इलाज, endoscopy विभाग के साथ stent का कोर्स और नली जोड़ने का operation, सब एक ही जगह।

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Bile Duct & Gastro Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar · Gota OPD, Ahmedabad

Gota clinic पर 216 Google reviews में 4.89, और Apollo, Bhat पर 18 reviews में 4.94 rating।

नली तंग हो तो पित्त आगे नहीं बढ़ पाता और liver में वापस भर जाता है। त्वचा और आँखें पीली हो जाती हैं, पेशाब गहरा पीला और मल सफ़ेद-सा हो जाता है, और पूरे शरीर में खुजली होती है। रुके हुए पित्त में संक्रमण भी हो सकता है। इस संक्रमण को cholangitis कहते हैं, और इस बीमारी में असली ख़तरा यही है।

Scan पर गाँठ से हुई सिकुड़न और निशान से हुई सिकुड़न अक्सर एक जैसी दिखती हैं। जिन सिकुड़नों को पहले benign माना गया, उनमें से कुछ बाद में cancer निकलती हैं। इसलिए हमारा पहला काम यह साबित करना है कि सिकुड़न असल में क्या है। अंदाज़े के भरोसे एक साल का stent का कोर्स शुरू नहीं किया जाता। यह पेज benign साबित हुई सिकुड़न के बारे में है। नली की पथरी और नली की गाँठ का इलाज अलग है।

सिकुड़न किन कारणों से होती है?

आम कारण हैं पित्ताशय के operation में नली की चोट, पुराने जोड़ का तंग होना, लंबा pancreatitis, और ऐसी बीमारियाँ जिनमें नलियों में ख़ुद सूजन और निशान बनते हैं।

पित्त नली की benign सिकुड़न: मुख्य प्रकार
प्रकारपीछे क्या होता है
पित्ताशय निकालते समय चोटOperation में मुख्य नली कट जाए, clip लग जाए, जल जाए या फट जाए। पित्त रिसता है, या बाद में निशान से नली तंग हो जाती है।
पुराने जोड़ की सिकुड़नLiver transplant या पहले के नली के operation में बना जोड़ समय के साथ तंग हो जाता है।
Chronic pancreatitisPancreas का सिर निशान से कड़ा होकर उसमें से गुज़रती नली को दबा देता है।
PSC (primary sclerosing cholangitis)Liver के अंदर और बाहर की नलियों में कई जगह निशान बनते हैं। अक्सर आँत की सूजन के साथ होता है।
IgG4 की बीमारीरोग-प्रतिरोधक तंत्र से नलियों में सूजन। अक्सर pancreas, kidney या लार ग्रंथियाँ भी प्रभावित होती हैं।
बार-बार होने वाला pyogenic cholangitisLiver की अंदरूनी नलियों में पथरी के साथ बार-बार संक्रमण। Liver का एक हिस्सा सिकुड़ सकता है।
ख़ून की कमी से नली को नुक़सानज़्यादातर liver transplant के बाद या धमनी की चोट के बाद।

कौन-से लक्षण दिखते हैं?

ज़्यादातर लोगों को पीली आँखें, खुजली, गहरा पेशाब या सफ़ेद मल दिखता है। कुछ को कोई तकलीफ़ नहीं होती, बस liver की रिपोर्ट गड़बड़ आती है।

  • पीलिया, साथ में खुजली, गहरा पेशाब और सफ़ेद मल।
  • कँपकँपी के साथ बुख़ार और पीलिया, बार-बार। यह cholangitis है।
  • पेट में दाहिनी ओर ऊपर दर्द।
  • सामान्य जाँच में liver की रिपोर्ट में रुकावट का पैटर्न।
  • पित्ताशय के operation के बाद के दिनों में drain में पित्त, पेट में पित्त का पानी, या धीमी रिकवरी।

इन दो हालात में OPD की तारीख़ का इंतज़ार न करें।

  1. कँपकँपी वाला बुख़ार और पीली आँखें। सिकुड़न के पीछे रुके पित्त में संक्रमण emergency है। उसी दिन antibiotic और drainage चाहिए।
  2. “सीधे-सादे” पित्ताशय के operation के बाद तबीयत न सुधरे। पहले हफ़्ते में दर्द, पेट फूलना, बुख़ार, drain में पित्त या पीलिया हो, तो जब तक कुछ और साबित न हो, इसे नली की चोट मानें। तुरंत CT और MRCP चाहिए।

कौन-सी जाँच पहले?

पहले ख़ून की जाँच और MRCP, फिर गाँठ खोजने के लिए CT, फिर सिकुड़न से नमूना। हर जाँच का नतीजा अगला क़दम तय करता है, इसलिए क्रम ज़रूरी है।

सिकुड़न के शक में जाँचें और हर एक क्या तय करती है
जाँचक्या दिखाती या तय करती है
Liver की रिपोर्ट, CBC, CRP, ख़ून जमने की जाँच और albuminपित्त रुका है या नहीं, संक्रमण है या नहीं, और liver कितना सक्षम है।
MRCP (पित्त नलियों का MRI)मुख्य scan। सिकुड़न कहाँ है, कितनी लंबी है, कितनी जगह है, और ऊपर की नली कितनी फूली है।
Contrast के साथ CTगाँठ, बढ़ी हुई lymph nodes, ख़ून की नलियों का जुड़ाव या liver का सिकुड़ा हिस्सा खोजता है।
CA 19-9 ख़ून की जाँचपित्त रुकने या संक्रमण में भी बढ़ जाता है। इसलिए drainage के बाद, और दूसरी रिपोर्टों के साथ ही पढ़ा जाता है।
ERCP और brushingमुँह के रास्ते camera नली तक पहुँचता है। सिकुड़न से कोशिकाएँ रगड़कर ली जाती हैं, और उसी समय stent डाला जा सकता है।
Cholangioscopy से biopsy, या EUS से नमूनानली के अंदर छोटा camera, या आमाशय से ultrasound, शक या गाँठ वाली जगह से सीधा नमूना लेता है।
IgG4 और रोग-प्रतिरोधक जाँचेंबिना साफ़ कारण की लंबी या ऊपरी सिकुड़न में की जाती हैं। IgG4 बढ़ा हो तो steroid से सुधरने वाली बीमारी की ओर इशारा।
Liver biopsyजब पूरे नली-तंत्र की बीमारी का शक हो।

Benign है या नहीं, कैसे पता चले?

एक जाँच से फ़ैसला नहीं होता। Brushing की रिपोर्ट साफ़ आए, तब भी cancer से इनकार नहीं होता। शक रहे तो दोबारा नमूना, camera से biopsy, या सिकुड़न को निकालना।

Brushing से ली गई कोशिकाओं में बीमारी होते हुए भी अक्सर पकड़ में नहीं आती। इसलिए साफ़ brushing रिपोर्ट जाँच का अंत नहीं है। सारी रिपोर्टें साथ पढ़ी जाती हैं, और शक वाली हर सिकुड़न liver और पित्त नली के विशेषज्ञों की बैठक में रखी जाती है। कुछ नतीजे एक ओर इशारा करते हैं, कुछ दूसरी ओर:

कौन-सा नतीजा किस ओर इशारा करता है
नतीजाइशारा, और आगे क्या
हाल के पित्ताशय operation में साफ़ चोट, कोई गाँठ नहींचोट से बना निशान। इलाज चोट के प्रकार के हिसाब से।
IgG4 बढ़ा, साथ में pancreas, kidney या लार ग्रंथि भी प्रभावितIgG4 की बीमारी। Operation नहीं, steroid का आज़माइशी कोर्स।
Liver में कई जगह छोटी सिकुड़नें, साथ में आँत की सूजनPSC। मुख्य तंग जगह को चौड़ा करना, और नलियों पर नज़र रखना।
CT पर गाँठ, बढ़ी lymph nodes या ख़ून की नलियों का जुड़ावगाँठ की संभावना। पहले नमूना, गाँठ पक्की हो तो cancer का इलाज।
Stent के बाद भी न खुलने वाली सिकुड़नगाँठ के लिए दोबारा जाँच। फिर नमूना, या सिकुड़न निकालना।
PSC में नई तंग जगह, वज़न घटना, CA 19-9 बढ़नाCamera से biopsy और scan। Cancer विशेषज्ञ की राय ज़रूरी।

पित्ताशय के operation में नली की चोट

चोट के A से E तक प्रकार हैं। छोटी नली से रिसाव अक्सर endoscopy से stent डालकर बंद हो जाता है। मुख्य नली कटी या बंद हो तो योजनाबद्ध operation लगता है।

नली की चोट के प्रकार, सरल भाषा में
प्रकारक्या हुआसामान्य इलाज
Aपित्ताशय की नली के कटे सिरे से, या liver की सतह की छोटी नली से रिसाव।ERCP में नली के मुँह पर छोटा चीरा, अक्सर stent के साथ। अच्छा असर करता है।
Bदाहिने liver के एक हिस्से की बगल वाली नली बंद हो गई।अक्सर निगरानी। कभी-कभी बाद में operation।
Cवही बगल वाली नली कटकर रिसती है।Drainage। Liver का बड़ा हिस्सा उसी से ख़ाली होता हो तो जोड़।
Dमुख्य नली में बगल से छेद।छोटे छेद में stent। बड़े में operation।
Eमुख्य नली पूरी कटी या बंद। कितनी ऊँचाई पर, यह अहम है।विशेषज्ञ टीम द्वारा योजनाबद्ध operation, hepaticojejunostomy।

आम नियम: A से C ज़्यादातर endoscopy से, और D और E ज़्यादातर operation से सँभलते हैं। चोट liver के जितनी पास, जोड़ उतना कठिन, और उसे उतना ही विशेषज्ञ के हाथ में होना चाहिए।

नली में चोट लगे तो क्या करें?

मुख्य नली में चोट हो तो drain डालकर विशेषज्ञ के पास भेजें, वहीं जल्दबाज़ी में न जोड़ें। जल्दबाज़ी का जोड़ अक्सर फिर से तंग हो जाता है।

Operation के दौरान ही चोट दिख जाए तो सही क्रम यह है:

  1. वहीं रुक जाएँ। “बनावट देखने” के लिए और खोलने से चोट बढ़ती है।
  2. पित्त नली के विशेषज्ञ मौजूद न हों तो तुरंत जोड़ने की कोशिश न करें।
  3. Drain डालें, जो दिखा उसे ठीक-ठीक दर्ज करें, और हो सके तो फ़ोटो लें।
  4. मरीज़ को विशेषज्ञ के पास भेजें, या विशेषज्ञ को तुरंत बुलाएँ।

चोट कुछ दिन बाद पकड़ में आए, तो पहले संक्रमण काबू किया जाता है। पेट में भरा पित्त त्वचा के रास्ते drain से निकाला जाता है और antibiotic दिए जाते हैं। फिर CT, MRCP और ज़रूरत हो तो ERCP से बनावट समझी जाती है। जोड़ अक्सर कुछ हफ़्तों बाद बनाया जाता है, जब सूजन उतर जाए। संक्रमण और सूजन वाली जगह पर जोड़ी गई नली अक्सर टिकती नहीं।

अगर यह आपके या आपके परिजन के साथ हुआ है, तो क्या मिला और क्या किया जा रहा है, यह हम सीधी और ईमानदार भाषा में बताएँगे।

गोली से operation तक, किसे क्या?

इलाज कम से कम दख़ल वाले असरदार तरीक़े से शुरू होता है। कुछ को steroid, ज़्यादातर को endoscopy से stent, और कुछ को नया जोड़ या liver का हिस्सा निकालने का operation।

किस हालत में कौन-सा इलाज
हालतसामान्य इलाज
IgG4 की बीमारीSteroid की गोली। नली अक्सर फिर खुल जाती है। Operation टल जाता है।
PSCबीमारी की दिशा बदलने वाली दवा नहीं है। Endoscopy से तंग जगह चौड़ी की जाती है, संक्रमण का इलाज, खुजली और vitamin की देखभाल।
ज़्यादातर benign सिकुड़न, और A से D की चोटलगभग एक साल तक endoscopy से stent।
ERCP न पहुँच सके, या सिकुड़न पुराने जोड़ के ऊपर होत्वचा के रास्ते liver में drain और stent।
E प्रकार की चोट, या stent से न खुलने वाली सिकुड़नHepaticojejunostomy: ऊपर की स्वस्थ नली को छोटी आँत के एक हिस्से से जोड़ना।
Pancreatitis की सिकुड़न, जो stent से न खुलेपित्त नली का bypass, अक्सर pancreas के drainage operation के साथ।
Liver का सिकुड़ा, पथरी से भरा हिस्साLiver का वह हिस्सा निकालना।
ऐसी सिकुड़न जिसमें cancer से इनकार न हो सकेसालों तक stent के बजाय सिकुड़न निकाल देना।
अंतिम चरण का PSCLiver transplant के लिए मूल्यांकन।

Operation कब ज़रूरी नहीं?

ज़्यादातर benign सिकुड़न में operation कभी नहीं लगता। IgG4 में steroid, छोटे रिसाव में stent, और ज़्यादातर सिकुड़न एक साल के stent से खुल जाती है।

IgG4 की बीमारी में operation करना गंभीर ग़लती है। यह नली के ऊपरी हिस्से की गाँठ जैसी दिख सकती है, पर steroid की गोली से सुधरती है। इसलिए किसी भी बड़े फ़ैसले से पहले IgG4 की जाँच होती है। A से C की कई चोटें सिर्फ़ endoscopy से सँभल जाती हैं। PSC में नली निकालने के बजाय endoscopy और नियमित जाँच चलती है, जब तक गाँठ का शक न हो। लंबे pancreatitis की सिकुड़न अक्सर लंबे stent से खुल जाती है। Pancreas की ओर की बात हमारे chronic pancreatitis के इलाज वाले पेज पर है।

Operation तब आता है जब stent काम न करे, मुख्य नली पूरी कटी हो, liver का कोई हिस्सा नष्ट हो चुका हो, या cancer से इनकार न हो सके।

Stent का लगभग एक साल का कोर्स

Stent एक बार का procedure नहीं, इलाज का कोर्स है। हर कुछ महीनों में stent बदले जाते हैं और हर बार संख्या बढ़ाई जाती है, ताकि सिकुड़न धीरे-धीरे चौड़ी हो।

  1. पहला ERCP। Balloon से सिकुड़न चौड़ी की जाती है और एक या ज़्यादा plastic stent डाले जाते हैं। ज़रूरत हो तो नमूना लिया जाता है।
  2. दूसरा विकल्प ढका हुआ metal stent। पूरा ढका हो तो निकाला जा सकता है। खुला metal stent benign सिकुड़न में कभी नहीं डाला जाता, क्योंकि वह निकलता नहीं।
  3. लगभग हर तीन महीने में बदलाव। Stent बदले जाते हैं और संख्या धीरे-धीरे बढ़ती है।
  4. हर stent की तारीख़। हर stent register में उसे निकालने या बदलने की तारीख़ के साथ दर्ज होता है। भूला हुआ stent बंद हो जाता है, और उससे होने वाला संक्रमण जानलेवा हो सकता है।
  5. लगभग एक साल पर समीक्षा। सिकुड़न खुल गई हो तो stent निकलते हैं। न खुली हो तो गाँठ के लिए दोबारा जाँच, और operation पर बात।

मरीज़ क्या कहते हैं

★★★★★

“Dr. Harsh performed my wife’s gallbladder surgery and has been a thorough professional. He truly assuaged our concerns and treated us with great care. I have never met a surgeon who is consistently upbeat, and that makes a real difference to families whose loved ones are undergoing a surgical procedure. — Gaurav Roy, Google review, Gota clinic listing”

★★★★★

“Dr. Harsh Shah performed gallbladder surgery for my father, and our experience was excellent. He is very humble and highly knowledgeable. He patiently answered all our queries and took great care in explaining every detail. He was always supportive and addressed each of my father’s concerns with patience and clarity, which gave us a lot of confidence and comfort throughout the treatment. We are truly grateful for his care and would highly recommend him. — Sunny Shah, Google review, Gota clinic listing”

★★★★★

“I am very thankful to Dr. Harsh Shah for treating me for gallstone disease and performing my laparoscopic cholecystectomy. The entire treatment and surgery were handled very professionally. Dr. Harsh Shah explained everything clearly and made me feel comfortable throughout the process. My recovery has been very good, and I am extremely satisfied with the care I received. Highly recommended for laparoscopic and gastrointestinal surgery. — Akshaya Shaw, Google review, Apollo Bhat listing”

नीचे के reviews Dr Harsh Shah की दो Google listings से, जैसे लिखे गए वैसे ही रखे गए हैं। किसी में पित्त नली की सिकुड़न का नाम नहीं है। ये पित्ताशय की बीमारी में उनके इलाज के बारे में हैं।

Hepaticojejunostomy में क्या होता है?

तंग या चोटिल नली को किनारे छोड़कर, उसके ऊपर की स्वस्थ नली को सीधे छोटी आँत के एक हिस्से से जोड़ा जाता है, ताकि पित्त फिर खुलकर बहे।

  1. स्वस्थ नली ढूँढना। जोड़ चोट के ऊपर, अच्छी ख़ून की आपूर्ति वाली नली से बनता है।
  2. चौड़ा, बिना खिंचाव का जोड़। नली की अंदरूनी परत आँत की अंदरूनी परत से सिली जाती है, ताकि जोड़ भरकर फिर तंग न हो।
  3. आँत का हिस्सा Y आकार में। छोटी आँत का एक हिस्सा ऊपर लाया जाता है, ताकि खाना वापस नली में न जाए।
  4. ज़रूरत हो तो ऊँचाई पर। दोनों liver नलियों के मिलने की जगह के पास की चोट में जोड़ ऊपर, कभी बाईं liver नली पर, बनता है।
  5. धमनी की जाँच। दाहिने liver की धमनी को भी अक्सर चोट लगी होती है। इससे भरने पर असर पड़ता है, और कभी-कभी liver का हिस्सा निकालना पड़ता है।

शांत हो चुकी जगह पर विशेषज्ञ टीम का बनाया यह जोड़ लंबे समय तक अच्छा नतीजा देता है। बार-बार की नाकाम कोशिशों के बाद नतीजे काफ़ी ख़राब होते हैं। जल्दबाज़ी न करने की मुख्य वजह यही है।

Operation से पहले की तैयारी

पहले संक्रमण काबू में लाया जाता है और भरा पानी निकाला जाता है। ख़ून जमना, पोषण और hemoglobin सुधारे जाते हैं, और पित्त का culture भेजा जाता है।

  1. संक्रमण काबू में, और भरा पानी drain से बाहर।
  2. ख़ून जमने की दिक़्क़त, पोषण और ख़ून की कमी में सुधार।
  3. पित्त के संक्रमण को ढकने वाले antibiotic, और पित्त का culture।
  4. पैरों में ख़ून का थक्का न बने, इसके उपाय।
  5. लिखित और चित्र वाली जानकारी के साथ पूरी समझ, जीवन भर के cholangitis के ख़तरे सहित।

Operation के बाद रिकवरी

ज़्यादातर मरीज़ operation के दिन ही कुर्सी पर बैठते हैं, अगले दिन खाना शुरू करते हैं, और कोई दिक़्क़त न हो तो पाँच से आठ दिन में घर जाते हैं।

Hepaticojejunostomy के बाद आम तौर पर दिन-ब-दिन
दिनक्या होता है
Operation का दिनबिस्तर से उठकर बैठना और दर्द की दवा। Liver की रिपोर्ट और drain रोज़ देखे जाते हैं। Drain में पित्त आ रहा है या नहीं, यह ख़ास ध्यान से देखा जाता है।
अगला दिनजितना जमे उतना खाना, चलना, पेशाब की नली निकालना।
दिन 2 से 4खाना बढ़ाना, drain की समीक्षा, liver की रिपोर्ट पर नज़र।
दिन 5 से 8खाते, चलते, बिना बुख़ार, drain में पित्त नहीं और bilirubin घट रहा हो तो घर।

घर जाने से पहले बताया जाता है कि cholangitis कैसा लगता है और तब क्या करना है। शरीर में stent रह गया हो तो उसे निकालने की तारीख़ लिखित में मिलती है।

Operation के जोखिम

लंबे समय में मुख्य जोखिम नए जोड़ का तंग होना और पित्त में बार-बार संक्रमण है। हर जोखिम, आप पर लागू आँकड़ों के साथ, आमने-सामने समझाया जाता है।

Endoscopy से stent: ERCP के बाद pancreatitis, ख़ून बहना, आँत में छेद, stent खिसकना, और stent बंद हो तो संक्रमण। कभी सिकुड़न नहीं खुलती, तब operation चाहिए। Benign मानी गई कुछ सिकुड़नें बाद में cancer निकलती हैं, इसलिए नमूने और follow-up चलते रहते हैं।

Hepaticojejunostomy: ख़ून चढ़ाना पड़े इतना ख़ून बहना, संक्रमण, पैर या फेफड़ों में ख़ून के थक्के, दिल या साँस की तकलीफ़, और बेहोशी से जुड़े जोखिम। ख़ास जोखिमों में नए जोड़ से पित्त का रिसाव, पेट में पीप, और सालों में जोड़ का तंग होना शामिल है, जिसके लिए फिर procedure या operation लग सकता है। जीवन भर cholangitis का ख़तरा रहता है, जिसमें बुख़ार और पीलिया होते ही antibiotic चाहिए। तंग होता जोड़ बिना इलाज रहे तो लंबे समय में liver को नुक़सान होता है। यह बड़ा operation है और इसमें जान का जोखिम भी है। धमनी की चोट, संक्रमण या liver का हिस्सा निकालने पर यह बढ़ता है। Consent से पहले Dr Harsh Shah हर बात आमने-सामने समझाते हैं।

Follow-up जीवन भर क्यों?

जोड़ के बाद इन मरीज़ों को छुट्टी नहीं दी जाती। नया जोड़ कई साल बाद भी तंग हो सकता है, इसलिए हर साल liver की रिपोर्ट जीवन भर चलती है।

Benign सिकुड़न के इलाज के बाद follow-up
कबक्या जाँचा जाता है
Operation के 3 और 6 महीने बादLiver की रिपोर्ट, लक्षण और बुख़ार के दौरे।
हर साल, जीवन भरLiver की रिपोर्ट। कुछ असामान्य हो तो scan।
Stent के कोर्स के दौरानसमय पर बदलाव। सिकुड़न न सुधरे तो गाँठ के लिए दोबारा जाँच।
PSCपित्त नली और पित्ताशय में गाँठ के लिए नियमित जाँच, आँत की सूजन के लिए colonoscopy, vitamin और हड्डियों का घनत्व।
आपके काग़ज़चोट का प्रकार, उसकी ऊँचाई, कौन-सा operation हुआ और धमनी की चोट थी या नहीं। आगे हर डॉक्टर को ये चारों चाहिए।

जोड़ के बाद कभी भी बुख़ार, कँपकँपी और पीलिया हो तो तुरंत आएँ। तंग जोड़ से संक्रमण हो सकता है। इसमें antibiotic और scan होते हैं, और जोड़ को त्वचा के रास्ते चौड़ा किया जाता है या ज़रूरत हो तो दोबारा बनाया जाता है।

पहली मुलाक़ात से follow-up तक

  1. Consultation तय करें। MRCP और CT की रिपोर्ट और CD, ERCP के नोट, नमूनों की रिपोर्ट, पुराने operation के काग़ज़ और दवाओं की सूची लाएँ। पीलिया के साथ बुख़ार हो तो सीधे Apollo Hospital, Bhat के emergency विभाग में जाएँ।
  2. सिकुड़न क्या है, यह साबित करना। जाँचें क्रम से पूरी हों, और गाँठ से इनकार के बाद ही benign का इलाज तय हो।
  3. विशेषज्ञों की बैठक। हर चोट और शक वाली हर सिकुड़न liver और पित्त नली की बैठक में रखी जाती है।
  4. इलाज। Steroid, तारीख़ों वाला stent का कोर्स, या योजनाबद्ध जोड़ का operation।
  5. Follow-up। 3 और 6 महीने पर, फिर हर साल, अपने काग़ज़ों के साथ।

ख़र्च, insurance और भर्ती

ख़र्च इलाज के रास्ते पर निर्भर है। Stent के कोर्स में एक साल में कई बार ERCP होता है। जोड़ के operation में लगभग एक हफ़्ता भर्ती रहना पड़ता है।

त्वचा के रास्ते drainage, ICU और भर्ती के दिन भी अनुमान बदलते हैं। Apollo Hospital, Bhat प्रमुख insurance कंपनियों और cashless योजनाओं के साथ काम करता है। Cholangitis की emergency भर्ती सहित pre-authorisation दफ़्तर सँभालता है। साथ लाएँ: scan की रिपोर्ट और CD, ERCP और नमूनों की रिपोर्ट, discharge के काग़ज़, दवाओं की सूची, insurance card और पहचान-पत्र। क्या लाना है, यह पूछने के लिए +91-63555-64601 पर फ़ोन भी कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पित्त नली की हर सिकुड़न cancer होती है?

नहीं। कई सिकुड़नें निशान, चोट या सूजन से होती हैं। पर benign दिखने वाली कुछ बाद में cancer निकलती हैं, इसलिए पहले जाँच होती है। जाँच पूरी होने के बाद ही benign कहा जाता है।

मेरी brushing रिपोर्ट साफ़ आई, तो cancer नहीं है न?

इतने से तय नहीं होता। Brushing अक्सर मौजूद बीमारी को भी चूक जाती है। शक रहे तो दोबारा नमूना, नली के अंदर camera से biopsy, या सिकुड़न निकालने पर विचार होता है।

Stent कितने समय तक रखना पड़ता है?

आम तौर पर लगभग एक साल। हर कुछ महीनों में stent बदले जाते हैं और संख्या बढ़ाई जाती है, ताकि सिकुड़न चौड़ी हो। हर stent अपनी तारीख़ पर निकालना या बदलना ज़रूरी है।

Stent ज़्यादा समय रह जाए तो क्या होता है?

वह बंद हो जाता है। फिर पित्त में संक्रमण होता है, कँपकँपी के साथ बुख़ार और पीलिया आता है, जो जानलेवा हो सकता है। इसलिए हर stent की तारीख़ लिखी जाती है और register में दर्ज होती है।

पित्ताशय के operation में नली कटी, क्या तुरंत जुड़वानी चाहिए?

आम तौर पर नहीं। पहले संक्रमण काबू किया जाता है और बनावट समझी जाती है। बड़ा जोड़ विशेषज्ञ टीम, अक्सर कुछ हफ़्तों बाद, सूजन उतरने पर बनाती है।

क्या IgG4 की बीमारी बिना operation सँभलती है?

हाँ। पित्त नली की IgG4 बीमारी आम तौर पर steroid की गोली से सुधरती है, और operation टल जाता है। इसलिए बड़े फ़ैसले से पहले IgG4 की जाँच होती है।

जोड़ के बाद follow-up जीवन भर क्यों?

नया जोड़ कई साल बाद भी तंग हो सकता है। हर साल की liver रिपोर्ट इसे जल्दी पकड़ती है, और कभी भी बुख़ार के साथ पीलिया हो तो तुरंत आना है।

डॉक्टर कहाँ मिलते हैं, operation कहाँ होता है?

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, Gota, Ahmedabad
Consultation, MRCP और CT की समीक्षा, stent की तारीख़ें और जीवन भर का follow-up।
Google: Dr Harsh Shah · 216 reviews में 4.89
Gota clinic का रास्ता · +91-63555-64601

Apollo Hospital, Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar.
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 18 reviews में 4.94
Apollo, Bhat का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601

गांधीनगर, मेहसाणा, नडियाद, आणंद, राजकोट और कच्छ समेत पूरे गुजरात से, और दक्षिण राजस्थान से मरीज़ अहमदाबाद आते हैं।

रिपोर्ट में पित्त नली की सिकुड़न लिखी है, या पित्ताशय के operation के बाद तबीयत नहीं सुधर रही? MRCP और CT की रिपोर्ट, ERCP के नोट, पुराने operation के काग़ज़ और ख़ून की रिपोर्ट WhatsApp पर पहले भेज सकते हैं, ताकि consultation शुरू होने तक वे पढ़ ली गई हों। इलाज का फ़ैसला consultation में, जाँच के बाद ही होता है। कँपकँपी वाला बुख़ार और पीली आँखें हों तो आज ही नज़दीकी emergency विभाग जाएँ। फ़ोन करें +91-63555-64601 · रिपोर्ट WhatsApp पर भेजें

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