Skip to main contentआख़िरी बार अपडेट: 7 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gallbladder Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
पित्ताशय के पॉलिप के लिए ऑपरेशन का मतलब है दूरबीन से पूरा पित्ताशय निकालना। इसे लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी कहते हैं।
पॉलिप को अकेला नहीं निकाला जाता। पूरा पित्ताशय प्रयोगशाला में जाता है, ताकि पॉलिप और दीवार की पूरी जाँच हो सके।
ज़्यादातर मरीज़ ऑपरेशन की शाम को चलते हैं और अगले दिन घर जाते हैं। पित्ताशय के बिना भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
ऑपरेशन चाहिए या नहीं, यह तय नहीं है? कब नज़र रखनी है और कब ऑपरेशन करना है, यह हमारे पित्ताशय के पॉलिप पेज पर समझाया है। यह लेख ऑपरेशन के बारे में है।
पॉलिप पित्ताशय की दीवार पर बैठा होता है और अकेले सुरक्षित रूप से काटा नहीं जा सकता। पित्ताशय ऐसा अंग भी नहीं है जिसे बचाना ज़रूरी हो।
कुछ पॉलिप चर्बी के बेअसर दाने होते हैं। कुछ असली गाँठ होते हैं और धीरे-धीरे कैंसर बन सकते हैं। स्कैन से हमेशा पता नहीं चलता कि कौन-सा है। यह सिर्फ़ प्रयोगशाला बता सकती है, और उसे पॉलिप अपने नीचे की दीवार समेत पूरा चाहिए।
पॉलिप बड़ा हो, बढ़ रहा हो या संदेहजनक लगे, या दर्द अथवा पथरी के साथ हो, तब ऑपरेशन सुझाया जाता है।
फ़ैसला कुछ बातों पर टिका है। पॉलिप का साइज़, दोबारा किए स्कैन में उसकी बढ़त, आकार, दीवार की मोटाई और आपकी उम्र। अकेला छोटा पॉलिप, जिससे कोई तकलीफ़ नहीं है, उस पर अक्सर सिर्फ़ नज़र रखी जाती है। पूरी जानकारी पित्ताशय के पॉलिप पेज पर है।
आप जनरल एनेस्थीसिया में सोए होते हैं। सर्जन कुछ छोटे चीरे लगाकर कैमरे से काम करते हैं, और पित्ताशय को थैली में रखकर बाहर निकालते हैं।
| चरण | सर्जन क्या करते हैं | यह क्यों मायने रखता है |
|---|---|---|
| 1. प्रवेश | कुछ छोटे चीरे लगाते हैं और पेट में गैस भरते हैं | देखने और काम करने की जगह मिलती है |
| 2. पहले जाँच | पित्ताशय, लिवर और आसपास के अंग देखते हैं | plan पक्का होता है और कोई अनपेक्षित बात पकड़ में आती है |
| 3. नलियाँ पहचानना | पित्ताशय की नली और धमनी साफ़ दिखने तक ऊतक हटाते हैं | मुख्य पित्त नली सुरक्षित रहती है |
| 4. बंद करके काटना | नली और धमनी पर क्लिप लगाकर फिर काटते हैं | पित्ताशय का ख़ून और पित्त का रास्ता अलग हो जाता है |
| 5. अलग करना | पित्ताशय को लिवर से उठाते हैं | अंग बिना खुले पूरा निकलता है |
| 6. थैली में रखकर निकालना | थैली में रखकर एक चीरे से बाहर खींचते हैं | पॉलिप पेट की दीवार को छूता नहीं |
| 7. जाँचकर बंद करना | ख़ून या पित्त का रिसाव देखते हैं और चीरे बंद करते हैं | जगह सूखी और सुरक्षित रहती है |
पथरी के मुक़ाबले पॉलिप में थैली ज़्यादा अहम है। पित्ताशय फटे या रिसे, यह हमें मंज़ूर नहीं, क्योंकि कभी-कभार मिलने वाली गाँठ से कोशिकाएँ फैल सकती हैं। इसलिए पित्ताशय की गाँठें बार-बार संभालने वाले सर्जन को चुनना ठीक है।
तैयारी सीधी है: सेहत की जाँच, ख़ून के टेस्ट, ख़ाली पेट, और अपनी दवाइयों की सूची सर्जन को देना।
आम तौर पर ख़ून के टेस्ट होते हैं, उम्र ज़्यादा हो तो दिल की जाँच होती है, और आपके स्कैन दोबारा देखे जाते हैं। ख़ून पतला करने की दवा और डायबिटीज़ की कुछ गोलियाँ कुछ दिन बंद करनी पड़ सकती हैं। सर्जन के कहे बिना कोई दवा न बदलें।
ज़्यादातर मरीज़ ऑपरेशन की शाम को चलते हैं और अगले दिन घर जाते हैं। पूरी तरह स्वस्थ होने में कुछ हफ़्ते लगते हैं।
चीरे छोटे होते हैं और कुछ दिन दुखते हैं। गैस की वजह से कंधे के सिरे पर दर्द आम है, और एक-दो दिन में कम हो जाता है। दवा से आराम रहता है, और होश आने के बाद हल्का खाना खाया जा सकता है।
पहले दिन से रोज़ चलें। बैठकर किया जाने वाला काम अक्सर एक से दो हफ़्ते में संभव होता है। भारी वज़न और कड़ी कसरत लगभग एक महीने तक, या सलाह के अनुसार, टालें। कुछ हफ़्ते पतले दस्त हो सकते हैं। छोटा, हल्का भोजन मदद करता है, और ज़्यादातर मरीज़ों में यह अपने आप थम जाता है।
अनुभवी हाथों में दूरबीन से पित्ताशय निकालना रोज़मर्रा का और सुरक्षित ऑपरेशन है, पर हर ऑपरेशन में थोड़ा जोखिम रहता है।
रिपोर्ट बताती है कि पॉलिप असल में क्या था। ज़्यादातर मरीज़ों में वह हानिरहित पॉलिप निकलता है और आगे इलाज की ज़रूरत नहीं होती।
रिपोर्ट लगभग एक हफ़्ते में आती है। कोलेस्ट्रॉल पॉलिप या सूजी दीवार में आगे कुछ करना नहीं है। रिपोर्ट में शुरुआती गाँठ दिखे तो उसका मतलब हम समझाते हैं, और बताते हैं कि वह पूरी निकल गई है या और ऑपरेशन चाहिए।
रिपोर्ट में कैंसर निकले तो लिवर की परत और आसपास की ग्रंथियों पर दूसरे ऑपरेशन की योजना बनती है, और हर चरण विस्तार से समझाया जाता है। यह कैसे होता है, यह जानने के लिए पित्ताशय के कैंसर का इलाज पढ़ें।
पॉलिप को अकेला निकाला नहीं जा सकता, और छोटे टुकड़े से पता नहीं चलता कि वह सुरक्षित है या नहीं। पूरा पित्ताशय निकालने पर प्रयोगशाला को पॉलिप और दीवार की पूरी जाँच करने को मिलती है।
अक्सर लगभग एक घंटा लगता है। पित्ताशय में सूजन हो या वह आसपास के अंग से चिपका हो तो ज़्यादा समय लग सकता है। आपके स्कैन देखकर सर्जन बताएँगे।
ज़्यादातर मरीज़ अगले दिन घर जाते हैं। ऑपरेशन की शाम से ही चलना और तरल पीना शुरू हो जाता है। छुट्टी का दिन सर्जन आपकी हालत देखकर तय करते हैं।
हाँ। पित्त लिवर बनाता है, और पित्ताशय के बिना भी वह सीधे आँत में पहुँचता है। कुछ लोगों को कुछ हफ़्ते पतले दस्त होते हैं, जो आम तौर पर थम जाते हैं। ज़्यादातर लोग सामान्य खाना खाते हैं।
छोटे पॉलिप में ऐसा कम ही होता है, पर प्रयोगशाला की जाँच इसीलिए ज़रूरी है। कैंसर निकले तो हम चरण समझाते हैं, और लिवर व ग्रंथियों पर आगे ऑपरेशन करना हो तो उसका plan पूरी चर्चा के बाद ही बनाते हैं।
हाँ। आम तौर पर दूरबीन से किया जाता है। पित्ताशय बहुत चिपका हो, ख़ून बहना क़ाबू में न आए, या संदेहजनक गाँठ के लिए बड़ा ऑपरेशन चाहिए, तो सर्जन बड़ा चीरा लगाते हैं। यह सुरक्षा के लिए उठाया क़दम है, नाकामी नहीं।
बैठकर किया जाने वाला काम अक्सर एक से दो हफ़्ते में शुरू हो जाता है। भारी वज़न उठाना और कसरत लगभग एक महीने बाद। आपके काम के अनुसार सर्जन तारीख़ें देंगे।
पॉलिप के इलाज की पूरी जानकारी के लिए पित्ताशय के पॉलिप पेज से शुरू करें। आने से पहले सवाल हों तो +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, डॉ. जीवराज मेहता मार्ग, वासणा, अहमदाबाद 380007.
परामर्श, रिपोर्ट और स्कैन की समीक्षा, ऑपरेशन और फॉलो-अप। OPD सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे।
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पॉलिप की वजह से पित्ताशय निकालने को कहा गया है? Dr Harsh Shah आपके स्कैन आपके साथ देखते हैं, समझाते हैं कि ऑपरेशन क्यों सुझाया गया, और फ़ैसला लेने से पहले दूरबीन के ऑपरेशन का हर चरण दिखाते हैं। स्कैन और रिपोर्टें परामर्श में साथ लाएँ। फ़ोन कर सकते हैं, या WhatsApp पर संदेश भेज सकते हैं। Call +91-63555-64601 WhatsApp पर पूछें
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