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इसोफेजियल कैंसर (अन्ननली का कैंसर )

Esophagus specialist in India

इसोफेजियल कैंसर (Esophageal Cancer) तब होता है जब अन्नप्रणाली (food pipe) में सामान्य कोशिकाएं असामान्य कोशिकाओं में बदल जाती हैं, और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। अन्नप्रणाली वह ट्यूब है जो भोजन को मुंह से पेट तक ले जाती है।

शुरूआती चरण में. इस बीमारी में कोई भी लक्षण नज़र नहीं आता। पर जब बीमारी आगे बढाती है, तो निम्नलिखित लक्षण हो शकते है।

– निगलने में परेशानी, विशेष रूप से ठोस, सूखे खाद्य पदार्थ के लिए।
– वजन घटना
– छाती में दर्द या जलन महसूस होना
– आवाज कर्कश हो जाना

ये सभी लक्षण उन स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं जो कदाचित कैंसर नहीं भी हैं। लेकिन अगर आपको ये लक्षण मेह्सूस हो रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं।

हाँ। यदि आपके डॉक्टर को संदेह है कि आपको इसोफेजियल कैंसर है, तो वह निम्नलिखित परीक्षणों में से एक या अधिक करवाने को कह सकते हैं:

ऊपरी एंडोस्कोपी (Upper Endoscopy) – यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर एक प्रकाश वाला कैमरा लगाए हुई पतली ट्यूब (जिसे एंडोस्कोप (Endoscope) कहा जाता है) को आपकी आपके मुंह में और आपके घुटकी में डालते हैं। वह आपके अन्नप्रणाली के पतली परत यानी के लायनिंग (Lining) की जाँच करेंगे।

बेरियम स्वेलो (Barium Swallow) – जिसमे आपको “बेरियम” नामक प्रवाही पिलाया जाता है और ४ से ६ एक्स-रे खींचे जाते है।

बायोप्सी (Biopsy) – इस परीक्षण के लिए, आपके डॉक्टर आपकी अन्नप्रणाली से टिश्यू (Tissue) यानी के ऊतक का एक छोटा सा नमूना लेंगे। माइक्रोस्कोप के तहत इस नमूना की जाँच की जाएँगी । आपके डॉक्टर अपर एंडोस्कोपी के दौरान बायोप्सी करेंगे। आपको इसोफेजियल कैंसर है या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए बायोप्सी ही सबसे एकमात्र तरीका है।

कैंसर स्टेजिंग यानि की कैंसर के चरण का पता लगाना। इसमें डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि जहां से यह कैंसर शुरू हुआ था, वह से कैंसर फैल गया है या नहि, और कितना ज़्यादा फैल गया है। कैंसर का सही उपचार उसके चरण पर ही निर्भर करता है।

अन्ननली के कैंसर का स्टेजिंग करने के लिए ‘पेट-सिटी’ (PET-CT) टेस्ट करने की आवश्यकता होती है।

इसोफेजियल कैंसर वाले अधिकांश लोगों को निम्नलिखित उपचार करवाने की आवश्यकता हो सकती है:

सर्जरी (Surgery) – कैंसर को हटाने के लिए सर्जरी के जरिए इसोफेजियल कैंसर का इलाज किया जा सकता है। यदि आपके डॉक्टर को सर्जरी के दौरान आपके अन्नप्रणाली के हिस्से को हटाने की जरूरत है, तो वह आपके अन्नप्रणाली और पेट को फिर से जोड़ देंगे ताकि आप भोजन को निगल सकें।

रेदिएशन थेरपी यानी के विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy) – विकिरण कैंसर कोशिकाओं को मारता है।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy) – कीमोथेरेपी उन दवाईओं के लिए चिकित्सा शब्द है जो कैंसर कोशिकाओं को मारते हैं या उन्हें बढ़ने से रोकते हैं।

इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy) – यह उन दवाईओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो कैंसर के विकास को रोकने के लिए शरीर के संक्रमण से लड़ने वाली प्रणाली — इम्यून सिस्टम (Immune System यानी के “प्रतिरक्षा प्रणाली”) के साथ काम करती हैं।

इसोफेजियल कैंसर में डॉक्टर ‘स्टेन्ट’ रखने की भी सलाह दे शकते है, जिससे अन्ननली खुली रहे और आपको खाने में तकलीफ न हो।

उपचार के बाद, डॉक्टर आपको हर ३ महीनो में जाँच करवाने की सलाह देंगे । नियमित अनुवर्ती परीक्षणों में आमतौर पर रक्त परीक्षण, इमेजिंग परीक्षण (सिटी स्कैन, पेट स्कैन) और एंडोस्कोपी करवाने होते हैं।

आपको ऊपर सूचीबद्ध लक्षणों के लिए भी निगरानी रखनी चाहिए। इनमें से कोई भी लक्षणों के होने का मतलब हो सकता है कि कैंसर कदाचित वापस आया है। यदि आपको कोई लक्षण महसूस होते हैं,  तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं।

यदि कैंसर वापस आता है या फैलता है, तो आपको दोबारा और पहले से अधिक विकिरण चिकित्सा या कीमोथेरेपी करवानी हो सकती है। यदि पहले ऑपरेशन नहीं हुआ है तो डॉक्टर आपको इसकी भी सलाह दे शकते है।

नियमित जाँच परीक्षणों के बारे में अपने डॉक्टर के सभी निर्देशों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपचार के दौरान किसी भी दुष्प्रभाव या समस्याओं के बारे में अपने डॉक्टर से बात करना भी महत्वपूर्ण है। इसोफेजियल कैंसर के उपचार के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनना अति आवश्यक है।

हमेशा अपने डॉक्टरों को बताएं कि आप उपचार से कैसा महसूस कर रहें हैं। किसी भी समय आपको उपचार का सुझाव दिया जाता है, तभी अवश्य पूछें:

– इस उपचार से मेरा क्या लाभ हैं? क्या इससे मुझे लंबे समय तक जीने में मदद करने की संभावना है? क्या यह लक्षणों को कम करेगा या रोकेगा?
– क्या इस उपचार के कोई भी डाउनसाइड हैं?
– क्या इस उपचार के अलावा कोई अन्य विकल्प हैं?
– अगर मैंने यह इलाज नहीं करवाया है तो भविष्य में क्या होगा?

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Dr. Harsh J Shah