Skip to main contentआख़िरी बार सुधारा गया: 5 नवंबर 2026

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Intestine Cancer Surgeon
Dr. Jivraj Mehta Hospital, Vasna, Ahmedabad · 18 साल का अनुभव
संक्षेप में
जब छोटी आँत का कैंसर फैला न हो, तब ऑपरेशन ही मुख्य इलाज है। ऑपरेशन में क्या किया जाए और उसके बाद क्या चले, यह गाँठ के प्रकार पर निर्भर है।
एडेनोकार्सिनोमा में आँत और उसके लिम्फ नोड का चौड़ा हिस्सा निकाला जाता है, और कभी-कभी बाद में कीमोथेरेपी चलती है। GIST को फटने दिए बिना साफ़ निकालना होता है, और कभी-कभी तीन साल तक रोज़ एक गोली लेनी पड़ती है।
लिम्फोमा का इलाज ज़्यादातर दवाओं से होता है, ऑपरेशन से नहीं। इसलिए कोई भी योजना बनाने से पहले गाँठ का प्रकार पता होना ज़रूरी है।
इन कैंसरों का इलाज यहाँ कैसे होता है, इसकी पूरी तस्वीर के लिए हमारा छोटी आँत के कैंसर का इलाज पन्ना पढ़ें। इस लेख में समझाया है कि गाँठ अभी निकाली जा सकती हो, तब योजना क्या होती है।
छोटी आँत में चार बिलकुल अलग तरह की गाँठें बनती हैं। उनमें जगह के सिवा बहुत कम समानता है, इसलिए हर एक का अपना ऑपरेशन और अपनी आगे की देखभाल होती है।
| गाँठ का प्रकार | ऑपरेशन | लिम्फ नोड | ऑपरेशन के बाद |
|---|---|---|---|
| एडेनोकार्सिनोमा | आँत के हिस्से का चौड़ा भाग निकालना | आँत के साथ निकाले जाते हैं | नोड में कैंसर हो या जोखिम ज़्यादा हो तो कीमोथेरेपी |
| न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर | हिस्सा और मेसेंट्री के नोड निकालना | निकाले जाते हैं | ज़्यादातर सिर्फ़ निगरानी; तकलीफ़ हो या गाँठ बच गई हो तभी इंजेक्शन |
| GIST | ऊपरी परत बिना फटे, एक टुकड़े में निकालना | नहीं निकाले जाते | जोखिम ज़्यादा हो तो तीन साल तक रोज़ एक गोली, imatinib |
| लिम्फोमा | ऑपरेशन सिर्फ़ बायोप्सी या किसी जटिलता के लिए | लक्ष्य नहीं | ख़ून के कैंसर की टीम की अगुवाई में दवाओं का इलाज |
इसीलिए पहले बायोप्सी और स्कैन कराए जाते हैं। स्टेज कैसे तय होती है, यह छोटी आँत के कैंसर की स्टेज वाले लेख में समझाया है।
लक्ष्य यह है कि गाँठ के चारों ओर स्वस्थ आँत का साफ़ किनारा छोड़कर उसे निकाला जाए, और साथ में वह मेसेंट्री भी जिसमें उसके लिम्फ नोड रहते हैं।
| जगह | आम ऑपरेशन | क्यों |
|---|---|---|
| ड्यूओडेनम का पहला और दूसरा भाग, पित्त नली के खुलने के पास | व्हिपल ऑपरेशन (पैंक्रियाटिको-ड्यूओडेनेक्टॉमी) | अग्न्याशय और पित्त नली का रक्त-प्रवाह साझा है |
| ड्यूओडेनम का निचला भाग | उतना हिस्सा निकालकर जेजुनम से नया जोड़ | नली का मुँह साफ़ हो तो अग्न्याशय बच जाता है |
| जेजुनम या इलियम | हिस्सा निकालना, साथ में मेसेंट्री की तिकोनी पट्टी | निकासी वाले लिम्फ नोड साथ आ जाते हैं |
| इलियम का आख़िरी हिस्सा | राइट हेमिकोलेक्टॉमी | छोटा हिस्सा निकालने पर नोड पीछे रह जाते हैं |
ड्यूओडेनम का ऑपरेशन बड़ा होता है, और यह ऐसे केंद्र में बेहतर होता है जहाँ ऐसे ऑपरेशन बहुत होते हैं। जेजुनम और इलियम में दूरबीन का ऑपरेशन तब ठीक रहता है जब गाँठ बहुत बड़ी न हो और मेसेंट्री उतनी ही पूरी साफ़ की जा सके जितनी खुले ऑपरेशन में। आँत अटकी हो या गाँठ बड़ी हो, तो खुले ऑपरेशन में ज़्यादा नियंत्रण मिलता है। तरीक़ा कोई भी हो, लक्ष्य वही रहते हैं: साफ़ किनारा, लिम्फ नोड, और गाँठ एक टुकड़े में निकलना।
कितने नोड निकाले और जाँचे गए, इसी से असली स्टेज पता चलती है। नोड कम हों तो फैलाव छूट सकता है और कीमोथेरेपी का फ़ैसला ग़लत हो सकता है।
नोड में कैंसर वाले एडेनोकार्सिनोमा में ऑपरेशन के बाद आम तौर पर कीमोथेरेपी सुझाई जाती है। नोड में कैंसर न हो तो उस पर तभी विचार होता है जब जोखिम ज़्यादा हो।
कोई बड़ा ट्रायल छोटी आँत के कैंसर में इसे परख नहीं पाया है, क्योंकि यह कैंसर दुर्लभ है। सलाह बड़ी आँत के कैंसर की देखभाल से ली गई है और पुराने मरीज़ों के अध्ययनों से समर्थित है, इसलिए हर योजना पर टीम चर्चा करती है और उसे आपके हिसाब से बदलती है।
कभी-कभी ड्यूओडेनम की बड़ी गाँठ को पहले कीमोथेरेपी से छोटा किया जाता है, ताकि उसे साफ़ निकाला जा सके। यह टीम का फ़ैसला होता है और आम बात नहीं है।
ऑपरेशन में गाँठ और मेसेंट्री के लिम्फ नोड निकाले जाते हैं। सर्जन पूरी आँत को हाथ से टटोलकर दूसरी गाँठ भी ढूँढते हैं।
जो गाँठ चेहरे पर लाली और दस्त पैदा करती है, उसमें अतिरिक्त सावधानी चाहिए। बेहोशी के डॉक्टर ऑपरेशन से पहले एक सुरक्षा देने वाली दवा देते हैं, ताकि गाँठ को छूने से अचानक प्रतिक्रिया न हो।
GIST को पूरा निकाला जाता है और उसकी पतली बाहरी परत साबुत रहनी चाहिए। उसका फट जाना ऐसी इकलौती ग़लती है जिसे पलटना मुश्किल है।
छोटी आँत के लिम्फोमा का इलाज मुख्यतः ख़ून के कैंसर के विशेषज्ञ दवाओं से करते हैं। ऑपरेशन बायोप्सी या जटिलता के लिए होता है।
आँत अटक जाए, उसमें से ख़ून बहे या छेद हो जाए, तब ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। तब भी ऑपरेशन के बाद की योजना लिम्फोमा के उपप्रकार पर निर्भर करती है। जो गाँठ दवाओं पर अच्छा असर दिखाती है वह तेज़ी से सिकुड़ सकती है, और तब कमज़ोर हुई आँत की दीवार फट सकती है। इसलिए दवाओं का इलाज चलते समय सर्जन साथ जुड़े रहते हैं।
कई लोग कमज़ोर, ख़ून की कमी और प्रोटीन की कमी के साथ आते हैं। इन्हें पहले सुधार लेने से ऑपरेशन ज़्यादा सुरक्षित होता है और घाव जल्दी भरते हैं।
| तैयारी | क्या किया जाता है | क्यों |
|---|---|---|
| पोषण और ख़ून | ख़ून की कमी का इलाज, प्रोटीन बढ़ाना, आधी रुकावट को राहत देना | कमज़ोर शरीर में घाव ख़राब भरते हैं और जोड़ से रिसाव ज़्यादा होता है |
| पूरे स्कैन | छाती, पेट और कूल्हे का CT, और गाँठ के प्रकार के हिसाब से दूसरे स्कैन | छूटे हुए फैलाव पर ऑपरेशन करने से बचाव |
| टीबी की जाँच | घाव इलियम में हो तो ऊतक पर टीबी की जाँचें | भारत में आँत की टीबी कैंसर जैसी दिख सकती है |
| पारिवारिक बीमारियाँ | लक्षण इशारा करें तो जेनेटिक समीक्षा | आपकी और आपके रिश्तेदारों की योजना बदल सकती है |
| गाँठ की जाँचें | GIST के लिए जीन की जाँच, न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के लिए ग्रेड | ऑपरेशन के बाद की दवा तय करती हैं |
ज़्यादातर लोग एक-दो दिन में पीना और खाना शुरू कर देते हैं। पहला हफ़्ता वह होता है जब सर्जन जोड़ से रिसाव पर नज़र रखते हैं।
ऑपरेशन के बाद आगे की जाँच का सिलसिला शुरू होता है। वह आगे की जाँच और ठीक होकर जीने वाले लेख में समझाया है।
आँत के हर ऑपरेशन में जोखिम होता है। कमज़ोर और देर से आने वाले मरीज़ में यह ज़्यादा होता है, इसीलिए तैयारी मायने रखती है।
बहुत कम। छोटी आँत इधर-उधर हिलती है और विकिरण से आसानी से घायल होती है, इसलिए जेजुनम या इलियम की गाँठों में रेडियोथेरेपी की आम जगह नहीं है।
एक अपवाद ड्यूओडेनम है, जो पेट के पीछे जमा हुआ रहता है। वहाँ किनारा पास हो या उसमें कैंसर हो, तो टीम कीमोथेरेपी के साथ रेडियोथेरेपी पर चर्चा कर सकती है। लिम्फोमा का इलाज अलग तरीक़े से होता है, और यह फ़ैसला ख़ून के कैंसर की टीम करती है।
इनमें से हर सवाल सीधे पूछिए। अच्छी टीम सरल शब्दों में जवाब देगी और आपको जल्दबाज़ी नहीं कराएगी।
हाँ। जब गाँठ पूरी निकाली जा सकती हो, तो ऑपरेशन ही मुख्य इलाज है। उसके बाद क्या जोड़ा जाए, यह गाँठ के प्रकार, स्टेज और लिम्फ नोड पर निर्भर है।
इलियम के आख़िरी हिस्से के निकासी वाले नोड दाईं बड़ी आँत की रक्त वाहिकाओं के साथ होते हैं। राइट हेमिकोलेक्टॉमी उन्हें साफ़ कर देती है। छोटा हिस्सा निकालने पर वे पीछे रह सकते हैं।
नोड में कैंसर वाले एडेनोकार्सिनोमा में अक्सर हाँ, आम तौर पर तीन से छह महीने। GIST में कीमोथेरेपी नहीं, गोली चाहिए। कम ग्रेड की न्यूरोएंडोक्राइन गाँठ पूरी निकल जाए तो आम तौर पर दोनों की ज़रूरत नहीं होती।
क्योंकि प्रकार के साथ ऑपरेशन बदल जाता है। एडेनोकार्सिनोमा में नोड निकालने पड़ते हैं, GIST को फटने नहीं देना है और उसमें नोड नहीं निकालने, और लिम्फोमा का इलाज ज़्यादातर दवाओं से होता है।
कभी-कभी। जेजुनम और इलियम में यह तब ठीक रहता है जब गाँठ बड़ी न हो और सर्जन मेसेंट्री पूरी साफ़ कर सकें। आँत अटकी हो या गाँठ बड़ी हो, तो आम तौर पर खुला ऑपरेशन चाहिए।
ज़्यादातर लोग कई दिन से लेकर लगभग एक हफ़्ता रुकते हैं, व्हिपल ऑपरेशन के बाद ज़्यादा। यह इस पर निर्भर है कि आप कितना खा पाते हैं और जोड़ कैसे भरता है।
तब गाँठ निकालने और निदान पाने, दोनों के लिए ऑपरेशन किया जा सकता है। सर्जन उसे कैंसर के ऑपरेशन की तरह ही योजित करते हैं, क्योंकि रिपोर्ट कैंसर पक्का कर सकती है।
छोटी आँत के कैंसर की पूरी देखभाल के लिए छोटी आँत के कैंसर का इलाज पन्ने से शुरू करें। यात्रा से पहले के सवालों के लिए +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, डॉ. जीवराज मेहता मार्ग, वासणा, अहमदाबाद 380007.
परामर्श, रिपोर्ट और स्कैन की समीक्षा, ऑपरेशन और फॉलो-अप। OPD सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे।
अपॉइंटमेंट: +91-63555-64601 · +91-63590-11009 · अस्पताल 079-2663 6363
अस्पताल की दिशा · WhatsApp +91-63555-64601
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