Skip to main contentअहमदाबाद और गांधीनगर · Dr Harsh Shah, Rectal Cancer Surgeon
नीचे के मलाशय (rectum) के कैंसर के लिए Dr Harsh Shah के पास आने वाले मरीज़ लगभग हमेशा एक ही सवाल पहले पूछते हैं — सर, हमेशा के लिए थैली लगेगी? बहुत मामलों में जवाब नहीं है। Sphincter — यानी मल को रोककर रखने वाली मांसपेशी — बचाकर आँत को दोबारा जोड़ा जा सकता है। आपके मामले में यह मुमकिन है या नहीं, यह एक ही बात तय करती है: गाँठ गुदा के सिरे से कितनी दूर है, और वह sphincter के अंदर घुस चुकी है या नहीं। इसका जवाब pelvic MRI देती है — और वह जवाब आने से पहले कुछ भी तय नहीं किया जाता।

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Rectal Cancer Surgeon
· Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर · Gota OPD, अहमदाबाद
Surgical gastroenterology में उच्च स्तर की training, इसी speciality में दो बार qualified, और इतने वर्षों की practice कि इन फ़ैसलों का नतीजा हफ़्तों में नहीं, वर्षों में देखा हो। Gota clinic पर Google rating 4.89, 216 reviews; Apollo, Bhat listing पर 4.94, 17 reviews।
नीचे का मलाशय कैंसर यानी मलाशय के सबसे निचले हिस्से में — गुदा के सिरे से लगभग छह सेंटीमीटर के भीतर — बैठी गाँठ। यह शब्द मायने रखता है क्योंकि उस रेखा के नीचे जो कुछ है वह sphincter से सटा हुआ है। इसलिए वही बीमारी, कुछ सेंटीमीटर ऊपर हो, तो अलग operation और अलग नतीजा।
Surgeon मलाशय को तीन हिस्सों में बाँटते हैं — किताबी बात नहीं, काम की बात है। ऊपरी हिस्से की गाँठ निकालकर आँत जोड़ दी जाती है, मल रोकने वाली मांसपेशी के पास जाए बिना। निचले हिस्से की गाँठ को उसी तरह नहीं निकाला जा सकता — गाँठ के नीचे जितना स्वस्थ हिस्सा निकालना पड़ता है वह सेंटीमीटर में नापा जाता है, और उतनी जगह कई बार होती ही नहीं।
इसलिए Dr Harsh Shah इस दूरी को ठीक से नापने पर ज़ोर देते हैं — digital rectal examination में, और फिर rigid sigmoidoscopy में। Flexible scope गाँठ को हमेशा असल से ऊँची दिखाता है। जो गाँठ ग़लती से “mid-rectal” लिख दी जाए, उसके लिए बना plan शरीर की बनावट से मेल नहीं खाता।
एक surgeon के तौर पर कहूँ — शौच में खून सबसे ज़्यादा मरीज़ों को डॉक्टर तक लाने वाला लक्षण है, और सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाने वाला भी वही है। मल के साथ मिला काला खून, खून के साथ चिपचिपा पदार्थ, शौच की आदत बदलना, जाने के बाद भी “अभी बाक़ी है” लगना, वज़न घटना या anaemia — इन सब में मलाशय की जाँच करानी ही चाहिए। Dr Harsh Shah पाइल्स, फ़िशर या फ़िस्टुला का इलाज नहीं करते — लेकिन मलाशय की जाँच किए बिना खून को “पाइल्स” कह देने का नतीजा वे रोज़ देखते हैं।
मलाशय के कैंसर में pelvic MRI बुनियादी जाँच है, और MRI आने से पहले इलाज का कोई फ़ैसला नहीं लिया जाता। यह बीमारी MRI और team पर चलती है: chemotherapy पहले दी जाए या नहीं, radiotherapy जोड़ी जाए या नहीं, sphincter बचाया जा सकेगा या नहीं — यह सब scan तय करता है, जाँच के वक़्त का अंदाज़ा नहीं।
Dr Harsh Shah radiologist से बँधा हुआ report माँगते हैं, खुला पैराग्राफ़ नहीं: गाँठ आँत की दीवार में कितनी गहरी गई है, गाँठ से mesorectal fascia — वह परत जिस पर surgeon काटता है — तक की दूरी, नसों में गाँठ घुसी है या नहीं, lymph nodes की हालत, गुदा के सिरे से ऊँचाई, और निचली गाँठ के लिए ख़ासकर — sphincter या levator मांसपेशी में गाँठ है या नहीं। जिस report में sphincter के बारे में लिखा न हो वह वापस भेजा जाता है। पूरा plan उसी एक वाक्य पर घूमता है।
| जाँच | क्या तय करती है | कब |
|---|---|---|
| Digital rectal examination | गुदा के सिरे से दूरी, किस तरफ़, गाँठ चिपकी है या नहीं, sphincter को छूती है या नहीं | पहली visit में, हमेशा |
| Rigid या flexible sigmoidoscopy के साथ biopsy | निदान पक्का करती है; rigid scope पर सही ऊँचाई दर्ज करती है | पहली visit या उसके तुरंत बाद |
| Pelvic MRI | बुनियादी जाँच — risk tier, margin का ख़तरा, sphincter, nodes | इलाज का फ़ैसला होने से पहले |
| पूरी colonoscopy | बड़ी आँत में ऊपर दूसरा कैंसर नहीं है, यह पक्का करती है | Operation से पहले, या आँत बंद हो तो कुछ महीनों बाद |
| छाती, पेट और pelvis का CT scan | बीमारी pelvis के बाहर फैली है या नहीं | MRI के साथ |
| CEA blood test | बाद में तुलना के लिए baseline | निदान के समय |
| Biopsy पर MMR / MSI testing | वह समूह पहचानती है जिसमें immunotherapy काम करती है | हर गाँठ पर, हमेशा |
इनमें दो बातें समय पर करनी होती हैं और नियमित रूप से भूली जाती हैं। पहली — संतान की उम्र वाले मरीज़ के साथ fertility और sperm या egg preservation की बात, क्योंकि pelvic radiotherapy शुरू होने के बाद वह बात करने का समय नहीं बचता। दूसरी — stoma nurse से पेट पर थैली की जगह निशान कराना, हर उस operation से पहले जिसमें थैली आ सकती है। ग़लत जगह लगी थैली उम्र भर की परेशानी है, और वह पूरी तरह टाली जा सकती थी।
हर मलाशय कैंसर में operation से पहले इलाज ज़रूरी नहीं, और जिनमें ज़रूरी है उन सब में radiotherapy ज़रूरी नहीं। MRI मरीज़ों को तीन समूहों में बाँटती है। सच यह है कि आज की practice पहले से कम radiotherapy देती है, क्योंकि pelvic radiotherapy आँतों, bladder, यौन क्षमता और संतान-प्राप्ति पर लंबे समय की क़ीमत वसूलती है।
गाँठ शुरुआती हो और MRI पर margin आराम से छूटे हों, तो Dr Harsh Shah सीधे operation पर जाते हैं — chemotherapy नहीं, radiotherapy नहीं। गाँठ कुछ आगे बढ़ी हो पर MRI पर ज़रूरी margin को ख़तरा न हो, तो operation से पहले सिर्फ़ chemotherapy आज एक मान्य रास्ता है, और radiotherapy उन मरीज़ों के लिए रखी जाती है जिनमें गाँठ जवाब न दे। इससे radiotherapy की लंबे समय की तकलीफ़ें टलती हैं और बीमारी पर पकड़ छोड़नी नहीं पड़ती। आपके मामले में यह लागू होता है या नहीं, यह पूछने लायक़ है।
गाँठ बड़ी हो, mesorectal fascia को ख़तरा हो या छू गई हो, नसों में घुसी हो, या एकदम नीचे बैठी हो — तो सब कुछ operation से पहले खिसकता है: पूरी chemotherapy और पूरी radiotherapy पहले, फिर operation। यह जानबूझकर किया जाता है। बड़े operation से पहले मरीज़ chemotherapy बेहतर सहन करता है, और गाँठ का sphincter से दूर सिकुड़ना ही sphincter बचाने का दरवाज़ा खोलता है।
Radiotherapy ख़त्म होने के लगभग दो-तीन महीने का अंतराल रखकर operation होता है। ताज़ा radiotherapy ली हुई pelvis में operation करने से जोड़ से leak होने और perineal घाव न भरने का ख़तरा बढ़ता है। यह इंतज़ार इलाज का हिस्सा है, इलाज में देरी नहीं।
मलाशय कैंसर का operation यानी total mesorectal excision: मलाशय को उसकी चर्बी की पूरी परत के साथ, प्राकृतिक plane पर धारदार काटकर, चारों ओर छूटे margin के साथ निकाला जाता है। गाँठ ऊँची हो या नीची, कैंसर का मानक नहीं बदलता। बदलता है सिर्फ़ इतना — बाद में आँत को गुदा से जोड़ा जा सकता है, या sphincter भी साथ निकालना पड़ता है।
Dr Harsh Shah के लिए पैमाना निकाले हुए हिस्से की गुणवत्ता है, चीरे की लंबाई नहीं। Pathologist दर्ज करता है कि mesorectal परत पूरी निकली या नहीं और margin छूटा है या नहीं — और वही दर्ज बताता है कि कैंसर pelvis में वापस आएगा या नहीं। वे इसे फ़ाइल करने वाली report नहीं, अपने काम का हिसाब मानते हैं।
| स्थिति | Operation | थैली |
|---|---|---|
| नीचे का मलाशय, sphincter अछूता | Low anterior resection के साथ total mesorectal excision, गुदा से जोड़ | अस्थायी ileostomy, आम तौर पर बाद में बंद |
| निचली गाँठ, पहले से control अच्छा, sphincter में घुसी नहीं | Intersphincteric resection — अंदर का sphincter निकालकर, बाहर का बचाकर | अस्थायी ileostomy |
| एकदम निचली गाँठ sphincter में घुस गई हो, या पहले से control ख़राब | Abdominoperineal excision — मलाशय और गुदा साथ निकालना | स्थायी colostomy |
| छोटी, सतही, अच्छे लक्षणों वाली गाँठ | गुदा के रास्ते local excision | कोई नहीं |
| Pelvis के दूसरे अंग से लगी गाँठ | लगे हुए हिस्से एक ही block में निकालना, team तय करती है | क्या निकाला, उस पर |
इस बातचीत का सच्चा हिस्सा तीसरी पंक्ति है। जहाँ कैंसर मल रोकने वाली मांसपेशी में ही घुस गया हो, वहाँ sphincter निकालना तकनीक या हिम्मत की हार नहीं — वही कैंसर साफ़ करने का तरीक़ा है। जिसमें गाँठ हो उस sphincter को बचाना यानी इलाज के बदले एक ऐसी क्षमता का सौदा करना जो बचाने के बाद भी ठीक काम नहीं करेगी। Dr Harsh Shah यह operation से पहले कहते हैं, बाद में नहीं।
एक बात और खुलकर कही जाती है — बड़ा operation टालने के लिए वे गाँठ को चिपके हिस्से से नहीं छुड़ाते। वह एक block में निकले, वरना plan बदलता है। और operation किसी भी तरीक़े से शुरू हुआ हो, plane हाथ से जाता दिखे तो बिना झिझक बदला जाता है।
नीचे का जोड़ हो, ऐसे लगभग हर operation में अस्थायी ileostomy लगाई जाती है। यह जोड़ को leak होने से नहीं रोकती — यह उस leak को, जो जानलेवा हो सकता था, संभालने लायक़ leak में बदल देती है। आम तौर पर कुछ महीनों बाद, chemotherapy पूरी होने और contrast study में जोड़ पूरा दिखने के बाद, इसे बंद किया जाता है।
“थैली” सुनकर मरीज़ आगे सुनना बंद कर देता है, इसलिए साफ़ कहना ज़रूरी है। छोटी आँत का एक फंदा जोड़ के ऊपर त्वचा पर लाया जाता है, ताकि जोड़ भरने तक मल उसमें से न गुज़रे। आँत की सर्जरी में नीचे का जोड़ सबसे नाज़ुक जोड़ है, और ileostomy उसके ख़िलाफ़ बीमा है — इसीलिए जिस मरीज़ में थैली लगी हो उसका leak आम तौर पर दूसरा बड़ा operation किए बिना संभल जाता है।
थैली बंद करने का operation कुछ महीनों बाद, adjuvant chemotherapy हो तो वह पूरी होने के बाद, और contrast study में जोड़ भरा दिखने के बाद ही तय होता है। कुछ मरीज़ों में वह कभी बंद नहीं होती — सेहत की वजह से, जोड़ न भरने की वजह से, या trial में पता चले कि control अच्छा नहीं रहेगा। यह संख्या छोटी है, पर शून्य नहीं, और Dr Harsh Shah इसे पाद-टिप्पणी नहीं बल्कि असली संभावना मानकर पहले से बता देते हैं।
घर जाने में रुकावट लगभग कभी पेट नहीं होता। रुकावट थैली ख़ुद संभालना सीखना होता है — मरीज़ या घर का कोई सदस्य थैली ख़ुद बदल सके। इसीलिए सिखाना operation के अगले दिन से शुरू होता है।
दो बातचीत operation से पहले होती हैं, बाद में नहीं। पहली — कुछ मरीज़ों में chemotherapy और radiotherapy के बाद गाँठ कहीं मिलती ही नहीं, और तब operation न करना एक मान्य विकल्प बनता है। पर यह सख़्त निगरानी का कार्यक्रम है: हर तीन-चार महीने जाँच, endoscopy और MRI, और गाँठ वापस आए तो operation स्वीकारने की तैयारी। जो मरीज़ इतनी नियमित follow-up में न आ सके, उसे Dr Harsh Shah साफ़ कह देते हैं कि यह विकल्प उसके लिए खुला नहीं है।
Follow-up का क्रम तय है: दो हफ़्ते पर histology की चर्चा के साथ visit, फिर तीन साल तक हर तीन महीने, फिर पाँच साल तक हर छह महीने, साथ में साल में एक CT scan और एक साल पर colonoscopy।
★★★★★
“We came from Udaipur, Rajasthan for my husband's rectal cancer surgery. Dr. Harsh Shah performed the operation with great expertise and care. He explained everything clearly and supported us throughout the treatment. The surgery was successful, and we are very grateful for the excellent care we received. Dr. Harsh Shah is one of the best rectal cancer surgeons. Highly recommended!" — Bhupendar Dave, 5 stars, Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon, Apollo, Bhat”
★★★★★
“I underwent surgery for rectal cancer by Dr. Harsh Shah, and I am very satisfied with the entire experience. He is truly one of the best doctors for rectal cancer surgery. His expertise, care, and guidance made a big difference in my recovery. The surgery went smoothly, and I felt confident throughout the treatment process. Highly recommended for anyone looking for the best care in rectal cancer treatment." — Mamta Somar, 5 stars, Dr Harsh Shah, Gota, अहमदाबाद”
★★★★★
“I would like thanks Dr harsh shah operated my wife for rectal cancer . We discharged today. And she is good now. Thank u so much sir for everything. Best GI and Rectal cancer surgeon in ahmedabad." — Bajrang Singh, 5 stars, Dr Harsh Shah, Gota, अहमदाबाद”
ये Dr Harsh Shah के listings से लिए गए, मलाशय कैंसर का इलाज करा चुके मरीज़ों के Google reviews हैं — जैसे लिखे गए हैं वैसे ही, शब्द बदले बिना।
पहली consultation से पूरी recovery तक पाँच चरण हैं, और हर चरण पर आपको बताया जाता है कि आगे क्या और कब।
मलाशय कैंसर का operation ज़्यादातर health insurance policy में आता है, और Apollo Hospital, Bhat पर cashless सुविधा है। अनुमान इस पर तय होता है कि कौन-सा operation सोचा गया है, कौन-सा room category, कितने दिन रुकना है, और इलाज में chemotherapy या radiotherapy है या नहीं। इसलिए अनुमान आपके case के लिए बनाया जाता है, किसी सूची से बोला नहीं जाता।
अनुमान क्या बदलता है: कौन-सा operation और किस तरीक़े से हुआ; थैली लगी और बाद में बंद करनी है या नहीं, क्योंकि वह दूसरा admission है; आपका चुना room category; रुकने के दिन, जो recovery में दिक़्क़त हो तो बढ़ते हैं; इलाज में chemotherapy या radiotherapy साथ है या नहीं; और plan तथा follow-up के लिए ज़रूरी pathology और imaging।
Insurance के लिए office pre-authorisation के काग़ज़ clinical कारण के साथ तैयार करता है, और policy में मुमकिन हो तो admission से पहले cashless मंज़ूरी ली जाती है। अपनी policy, ID, पहले के hospital के काग़ज़, सभी imaging — film और disc दोनों — और biopsy report लेकर आइए। Policy कुछ नामंज़ूर करे तो उसका कारण आपको समझाया जाता है, और आधार हो तो appeal लिखकर दी जाती है।
ज़रूरी नहीं। स्थायी थैली तभी चाहिए जब कैंसर sphincter मांसपेशी में ही घुस गया हो, या कैंसर से पहले ही मल पर control ख़राब हो। नीचे की बहुत गाँठों में sphincter बचाकर आँत जोड़ दी जाती है, और अस्थायी ileostomy बाद में बंद कर दी जाती है। यह आपकी pelvic MRI तय करती है।
नहीं, बवासीर कैंसर में नहीं बदलती — ये दो अलग बीमारियाँ हैं। दिक़्क़त यह है कि दोनों में शौच से खून आता है, इसलिए कैंसर महीनों तक बवासीर समझा जाता रहता है। इसलिए नियम एक ही है: मलाशय की जाँच किए बिना खून को बवासीर मत मानिए। Dr Harsh Shah बवासीर, फ़िशर या फ़िस्टुला का इलाज नहीं करते, पर जाँच पर वे यही पहले देखते हैं।
कभी-कभी हाँ। MRI दिखाए कि ज़रूरी margin को ख़तरा नहीं, तो operation से पहले सिर्फ़ chemotherapy एक मान्य रास्ता है, और radiotherapy उन मरीज़ों के लिए रखी जाती है जिनमें जवाब न मिले। इससे pelvis की लंबे समय की तकलीफ़ें टलती हैं। जहाँ margin को ख़तरा हो या वह छू गया हो, वहाँ यह लागू नहीं — उन गाँठों को radiotherapy चाहिए।
तुरंत नहीं। नीचे का जोड़ होने पर तुरंत जाना पड़े, बार-बार जाना पड़े, एक के बाद एक दस्त हों और कभी control न रहे — इसे low anterior resection syndrome कहा जाता है। एक-दो साल में सुधरता है, और इसका इलाज होता है: आँत की retraining, दवा, pelvic floor physiotherapy और ज़रूरत पड़े तो irrigation।
तरीक़े से ज़्यादा मायने निकाले हुए हिस्से की गुणवत्ता रखती है। Open, laparoscopic और robotic total mesorectal excision — अनुभवी हाथों में तीनों मान्य हैं, और सँकरी pelvis में robotic उपकरणों को सुविधा मिलती है। Dr Harsh Shah हर pelvis देखकर तरीक़ा चुनते हैं, और plane हाथ से जाता दिखे तो बिना झिझक बदलते हैं।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre
Gota, अहमदाबाद, गुजरात
Google rating 4.89, 216 reviews
Dr Harsh Shah अहमदाबाद–गांधीनगर क्षेत्र में दो जगह consultation करते हैं: Gota, अहमदाबाद की clinic, और Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर।
मलाशय कैंसर के operation के लिए मरीज़ पूरे गुजरात से आते हैं — गांधीनगर, राजकोट, सूरत, वडोदरा, भावनगर, जामनगर, जूनागढ़, मेहसाणा और कच्छ — और राजस्थान तथा मध्य प्रदेश से भी। बाहर से आना हो तो scans और reports पहले WhatsApp पर भेज दीजिए, ताकि जिस दिन आएँ उस दिन की consultation काम की बने।
यह ऑपरेशन आंत (कोलोरेक्टल) सर्जरी का एक हिस्सा है। बड़ी आंत और मलाशय की किस तकलीफ़ में सर्जन से मिलना चाहिए, और पहली मुलाक़ात में कौन-सी रिपोर्ट लानी हैं — पढ़ें: अहमदाबाद में आंत (कोलोरेक्टल) सर्जन · Colorectal surgeon in Ahmedabad (English)
MRI लेकर आइए, स्थिति साफ़ बता दी जाएगी। नीचे के मलाशय के कैंसर में second opinion operation से पहले लेने की चीज़ है, बाद में नहीं। फ़ोन +91-63555-64601 · WhatsApp कीजिए
Swasth Parivar: twice a month, practical advice on recovery, diet and warning signs. No advertising. Stop any time.
Your number is used for these updates and for the clinic to reach you. It is never sold or passed on. To stop, reply STOP on WhatsApp.